पटना के जेपी गंगा पथ पर नारी शक्ति का हुंकार: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने ‘विकसित भारत रन’ को दिखाई हरी झंडी, 17 अप्रैल को बताया महिलाओं के लिए ‘क्रांतिकारी’ दिन

पटना। बिहार की राजधानी पटना का मरीन ड्राइव यानी जेपी गंगा पथ शुक्रवार की सुबह एक ऐतिहासिक गवाह बना। अवसर था ‘नारी शक्ति वंदन अभियान’ के तहत आयोजित ‘नारी शक्ति फॉर विकसित भारत रन’ का, जहाँ हजारों की संख्या में महिलाओं ने अपनी उपस्थिति से यह संदेश दिया कि नए भारत के निर्माण में उनकी भूमिका अब निर्णायक होने वाली है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने दीघा गोलंबर पर आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में शामिल होकर न केवल धावकों का उत्साहवर्धन किया, बल्कि राजनैतिक क्षितिज पर महिलाओं के लिए एक नए युग की शुरुआत का उद्घोष भी किया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर स्पष्ट रूप से कहा कि 17 अप्रैल का यह दिन देश की आधी आबादी के लिए किसी बड़े राजनैतिक और सामाजिक इंकलाब से कम नहीं है। उन्होंने लोकसभा में लंबित महत्वपूर्ण विधेयक का जिक्र करते हुए इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में आजादी के बाद का सबसे बड़ा कदम करार दिया। गंगा की लहरों के किनारे उमड़ा यह ‘शक्ति का सैलाब’ केवल एक दौड़ नहीं थी, बल्कि यह संसद से लेकर सड़क तक महिलाओं की आवाज बुलंद करने का एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा।

दीघा गोलंबर पर ‘शक्ति’ का स्वागत: हरी झंडी और हस्ताक्षर अभियान

​सुबह की पहली किरण के साथ ही जेपी गंगा पथ पर महिलाओं का जमावड़ा शुरू हो गया था। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जब कार्यक्रम स्थल पर पहुँचे, तो फिजाओं में ‘नारी शक्ति’ के नारों की गूँज सुनाई देने लगी। मुख्यमंत्री का स्वागत अंतरराष्ट्रीय शूटर और विधायक श्रेयसी सिंह ने पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र भेंट कर पारंपरिक तरीके से किया। मुख्यमंत्री ने इस दौरान नारी शक्ति वंदन अभियान के तहत चलाए जा रहे हस्ताक्षर अभियान में हिस्सा लिया और अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए अभियान के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

​इसके बाद मुख्यमंत्री ने दीघा गोलंबर से ‘नारी शक्ति फॉर विकसित भारत रन’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। जैसे ही झंडी लहराई गई, जोश और उमंग से भरी महिलाएं जेपी गंगा पथ की सड़कों पर दौड़ पड़ीं। मुख्यमंत्री ने हाथ हिलाकर सभी प्रतिभागियों का अभिवादन स्वीकार किया। इस दौड़ का उद्देश्य समाज में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत’ के सपने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करना था। मुख्यमंत्री के साथ मंच पर महिला विधायकों और नगर निगम की प्रतिनिधियों की मौजूदगी ने इस कार्यक्रम को और भी गरिमामयी बना दिया।

17 अप्रैल: महिलाओं के लिए क्यों है यह क्रांतिकारी दिन?

​मंच से जनसमूह को संबोधित करते हुए सम्राट चौधरी ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण राजनैतिक और संवैधानिक विषय पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज का दिन (17 अप्रैल) इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होने वाला है। मुख्यमंत्री ने बताया कि यदि आजादी के बाद महिलाओं को वास्तविक ताकत देने वाला विधेयक आज लोकसभा से पारित होता है, तो यह इस देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था में सबसे बड़ा परिवर्तन होगा।

​सम्राट चौधरी ने इसके तकनीकी और संख्यात्मक पहलुओं को साझा करते हुए कहा कि इस विधेयक के पारित होने के बाद लोकसभा में सीटों की संख्या वर्तमान 543 से बढ़कर 816 हो जाएगी। सबसे बड़ी बात यह है कि इन बढ़ी हुई सीटों में से एक-तिहाई (33 प्रतिशत) सीटें सीधे तौर पर महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। मुख्यमंत्री ने बड़े ही आत्मविश्वास के साथ कहा कि अब वह समय दूर नहीं जब लोकसभा की एक-तिहाई सीटों पर महिलाएं चुनाव जीतकर संसद पहुँचेंगी और वहां न केवल अपनी आवाज बुलंद करेंगी, बल्कि देश के शासन-प्रशासन में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर ‘राज’ करेंगी। उन्होंने इस विधेयक को महिला आत्मनिर्भरता का सबसे बड़ा दस्तावेज बताया।

बिहार का मॉडल और नीतीश कुमार का विजन

​संबोधन के दौरान सम्राट चौधरी ने महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में बिहार द्वारा पहले ही उठाए गए क्रांतिकारी कदमों की सराहना की। उन्होंने कहा कि बिहार ने महिला भागीदारी के मामले में पूरे देश को राह दिखाई है। मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार में पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण दिया गया था।

​इस आरक्षण का परिणाम आज बिहार के गांवों और शहरों में साफ देखा जा सकता है, जहाँ महिलाएं मुखिया, सरपंच और मेयर के पदों पर बैठकर समाज की दिशा बदल रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के इस सफल प्रयोग ने महिलाओं को काफी ताकत दी है और वे अब आत्मनिर्भर बन रही हैं। उन्होंने इसी तर्ज पर अब राष्ट्रीय स्तर पर लोकसभा और विधानसभाओं में आरक्षण लागू होने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि सदन के भीतर नीति-निर्माण में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ सके।

प्रधानमंत्री का संकल्प और बिहार की एकजुटता

​सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने तय कर लिया है कि देश की 816 लोकसभा सीटों में से एक-तिहाई पर महिलाएं जीतकर संसद के भीतर राष्ट्र का नेतृत्व करें। उन्होंने कहा कि यह केवल आरक्षण नहीं है, बल्कि देश की आधी आबादी को उनका हक देने का एक प्रयास है। मुख्यमंत्री ने सभी बिहारवासियों से अपील की कि वे इस ऐतिहासिक निर्णय का पूरी एकजुटता के साथ स्वागत करें।

​उन्होंने कहा कि जब विधानसभाओं में भी एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए सुरक्षित होंगी, तो प्रदेश के विकास की रफ़्तार दोगुनी हो जाएगी। सम्राट चौधरी ने आयोजकों को इस सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए कहा कि ऐसी दौड़ समाज की मानसिकता बदलने में सहायक होती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि विकसित भारत के निर्माण में नारी शक्ति वह मजबूत स्तंभ बनेगी जो देश को विश्व गुरु के पद पर आसीन करेगी।

दिग्गजों की मौजूदगी और प्रशासनिक मुस्तैदी

​इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में बिहार की कई प्रमुख महिला नेत्रियां और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। विधायक श्रेयसी सिंह, विधायक रमा निषाद, और विधायक संगीता कुमारी ने अपनी उपस्थिति से प्रतिभागियों का मनोबल बढ़ाया। पटना नगर निगम की महापौर सीता साहू ने भी महिलाओं के बीच पहुँचकर उनके साहस की सराहना की।

​सुरक्षा और व्यवस्था के दृष्टिकोण से जिला प्रशासन ने पुख्ता इंतजाम किए थे। पटना के जिलाधिकारी डॉ० त्यागराजन एस०एम० और वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के० शर्मा स्वयं व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे थे। सुरक्षा के कड़े घेरे के बीच हजारों महिलाओं ने बिना किसी असुविधा के इस दौड़ को पूरा किया। जेपी गंगा पथ के एक बड़े हिस्से को इस कार्यक्रम के लिए विशेष रूप से सुरक्षित किया गया था। गणमान्य व्यक्तियों की सूची और बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि पटना अब महिलाओं के अधिकारों के प्रति कितना सजग हो चुका है।

भविष्य की राह: संसद से समाज तक सशक्त नारी

​मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की बातों ने वहां मौजूद महिलाओं में एक नया आत्मविश्वास भर दिया। दौड़ में शामिल प्रतिभागियों का कहना था कि जब प्रदेश का मुखिया स्वयं उनकी ताकत और उनके अधिकारों की बात करता है, तो उन्हें समाज की बेड़ियों को तोड़ने की नई शक्ति मिलती है। 17 अप्रैल की यह सुबह केवल एक खेल गतिविधि नहीं थी, बल्कि यह भविष्य की उस संसद की एक झलक थी जहाँ महिलाएं बराबरी की हिस्सेदार होंगी।

​मुख्यमंत्री के संबोधन के बाद जेपी गंगा पथ का पूरा इलाका तालियों की गूँज से भर उठा। सम्राट चौधरी ने अंत में पुनः आयोजकों को शुभकामनायें दीं और वहां से रवाना हुए। इस कार्यक्रम के बाद अब राजनैतिक हलकों में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ने और महिला आरक्षण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। बिहार की धरती से नारी शक्ति का यह शंखनाद आने वाले समय में देश की राजनीति में बड़े बदलावों का संकेत दे रहा है। विकसित भारत का जो सपना आज पटना की सड़कों पर दौड़ता नजर आया, वह जल्द ही सदन की मर्यादाओं में अपना आकार लेता दिखेगा।

  • ये भी पढ़े..

    बिहार में सौर ऊर्जा को मिलेगा बड़ा बढ़ावा, 20 नवंबर तक ढाई लाख घरों पर लगेंगे सोलर पैनल; अतिरिक्त बिजली सरकार खरीदेगी

    Share Add as a preferred…

    ज्ञान बिंदु कोचिंग के संचालक रौशन आनंद को मिली जमानत, भाई प्रिंस यादव की संदिग्ध मौत के बीच सहरसा पहुंचेंगे अंतिम संस्कार में

    Share Add as a preferred…