
बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच एक और बड़ा मामला सामने आया है, जिसने पुलिस महकमे में हलचल मचा दी है। के पूर्व थानाध्यक्ष पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस मामले में ने जांच तेज कर दी है और उन्हें पूछताछ के लिए बुलाने की तैयारी चल रही है।
सूत्रों के अनुसार, अभिषेक कुमार रंजन को अगले सप्ताह पटना स्थित ईओयू मुख्यालय में पेश होने के लिए नोटिस भेजा जा सकता है। जांच एजेंसी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए उनके वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों की गहन जांच कर रही है।
50 करोड़ की संपत्ति का दावा
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि आरोपी अधिकारी ने अपने सेवाकाल के दौरान करीब 50 करोड़ रुपये की संपत्ति अर्जित की है। यह संपत्तियां केवल बिहार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पश्चिम बंगाल, दिल्ली-एनसीआर और अन्य राज्यों में भी फैली हुई बताई जा रही हैं।
जांच एजेंसियों को सिलीगुड़ी में फ्लैट, दार्जिलिंग रोड के पास जमीन और अन्य निवेशों के दस्तावेजों की जानकारी मिली है। अब इन संपत्तियों के स्रोत की जांच की जा रही है कि यह धन वैध है या अवैध कमाई से जुड़ा हुआ है।
गौतम कुमार से कनेक्शन
इस मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब के खिलाफ चल रही जांच के दौरान अभिषेक कुमार रंजन का नाम सामने आया। बताया जा रहा है कि दोनों अधिकारियों के बीच करीबी संबंध थे और वे एक-दूसरे के “राजदार” माने जाते थे।
ईओयू को शक है कि दोनों ने मिलकर अवैध कमाई का एक संगठित नेटवर्क खड़ा किया था, जिसमें कई स्तरों पर भ्रष्टाचार शामिल हो सकता है।
माफिया नेटवर्क से जुड़े आरोप
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी अधिकारी के स्थानीय स्तर पर बालू, शराब और एंट्री माफिया से संबंध थे। आरोप है कि इन अवैध कारोबारियों को संरक्षण देने के बदले उन्हें तय कमीशन मिलता था।
इसी अवैध कमाई को बाद में जमीन, मकान और अन्य संपत्तियों में निवेश किया गया, जिससे नामी और बेनामी संपत्तियों का बड़ा जाल तैयार हुआ।
छापेमारी और जांच का दायरा
हाल ही में ईओयू की टीम पश्चिम चंपारण के सिकटा स्थित उनके ससुराल भी पहुंची थी। हालांकि छापेमारी की भनक पहले ही लगने के कारण वहां से कोई बड़ी बरामदगी नहीं हो सकी।
इसके बावजूद जांच एजेंसी डिजिटल और बैंकिंग रिकॉर्ड खंगाल रही है, जिससे पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।
आगे क्या होगा?
ईओयू का कहना है कि यह मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि एक बड़े भ्रष्टाचार नेटवर्क की ओर इशारा करता है। आने वाले दिनों में इस केस में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।
पूछताछ के दौरान अभिषेक कुमार रंजन से उनकी संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश और संदिग्ध लेनदेन को लेकर विस्तृत सवाल पूछे जाएंगे। उन्हें अपने बचाव में दस्तावेज पेश करने का मौका भी दिया जाएगा।
पुलिस विभाग में हलचल
इस पूरे मामले ने बिहार पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार सामने आ रहे भ्रष्टाचार के मामलों से विभाग की छवि प्रभावित हो रही है।
ईओयू ने साफ किया है कि जांच निष्पक्ष होगी और दोषी पाए जाने पर किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
कुल मिलाकर, यह मामला बिहार में चल रही भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई का एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच एजेंसियां इस नेटवर्क की कितनी गहराई तक पहुंच पाती हैं और किन-किन लोगों की संलिप्तता सामने आती है।


