​नवगछिया में कोहराम: बाबा विशु राउत सेतु पर काल बनकर दौड़ा हाईवा, तीन मज़दूरों की मौत, पाँच घायल

नवगछिया (भागलपुर)। बिहार के भागलपुर जिले अंतर्गत नवगछिया अनुमंडल में एक बार फिर तेज रफ्तार का कहर मासूम जिंदगियों पर भारी पड़ा है। 15 अप्रैल 2026, बुधवार की सुबह जब सूरज की किरणें नई उम्मीदें लेकर आ रही थीं, उसी वक्त बाबा विशु राउत सेतु पर चीख-पुकार मच गई। पटना के टाल क्षेत्रों में हाड़तोड़ मजदूरी कर अपने गांव लौट रहे मजदूरों की खुशियां उस वक्त मातम में बदल गईं, जब एक अनियंत्रित हाईवा ने उनकी पिकअप वैन को जोरदार टक्कर मार दी। यह टक्कर इतनी भीषण थी कि पिकअप के परखच्चे उड़ गए और मौके पर ही तीन मजदूरों की सांसें थम गईं। मृतकों में दो महिलाएं और एक बुजुर्ग पुरुष शामिल हैं, जो अपने परिवार का पेट पालने के लिए घर से दूर पसीना बहाकर वापस लौट रहे थे। इस हादसे ने न केवल आठ परिवारों को उजाड़ दिया है, बल्कि नेशनल हाईवे और सेतुओं पर बेलगाम दौड़ते भारी वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

​हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि टक्कर के बाद पिकअप वैन सड़क पर कई बार पलटी और उसमें सवार मजदूर दब गए। पटना के टाल क्षेत्रों में काम खत्म कर घर वापसी की खुशी इन मजदूरों के चेहरे पर साफ देखी जा सकती थी, लेकिन उन्हें क्या पता था कि घर की दहलीज तक पहुँचने से पहले ही मौत उनका रास्ता रोके खड़ी है। स्थानीय लोगों और राहगीरों ने तुरंत बचाव कार्य शुरू किया, लेकिन मौके की तस्वीर दिल दहला देने वाली थी। चारों तरफ खून और मजदूरों का सामान बिखरा पड़ा था। सूचना मिलते ही नवगछिया पुलिस और एम्बुलेंस मौके पर पहुँची और घायलों को अस्पताल पहुँचाने की प्रक्रिया शुरू की गई। हादसे के बाद पुल पर लंबा जाम लग गया और अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।

​इस सड़क हादसे ने मिल्की गांव के तीन घरों के चिरागों को हमेशा के लिए बुझा दिया है। मृतकों की पहचान मिल्की गांव की संजो देवी (60 वर्ष), कारी देवी (55 वर्ष) और पांचू चौधरी (60 वर्ष) के रूप में हुई है। ये तीनों ही अपने परिवारों के लिए सहारा थे। इसके अलावा घायलों में फुदनी चौधरी (55 वर्ष), मनोज यादव (40 वर्ष) और शोभा देवी की हालत अत्यंत गंभीर बनी हुई है। इन तीनों को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए भागलपुर के मायागंज अस्पताल (JLNMCH) रेफर किया गया है, जहाँ वे जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। वहीं अन्य दो घायलों चंपा देवी (40 वर्ष) और बेचनी देवी (50 वर्ष) का इलाज नवगछिया अनुमंडल अस्पताल में चल रहा है। मिल्की गांव में जैसे ही यह खबर पहुँची, वहां कोहराम मच गया और हर घर से रोने की आवाजें आने लगीं।

​हादसे के पीछे की एक बड़ी वजह खगड़िया से नवगछिया के बीच लगा भीषण ट्रैफिक जाम बताया जा रहा है। घायलों ने बताया कि वे लोग सीधे रास्ते से नवगछिया आ रहे थे, लेकिन खगड़िया के पास गाड़ियों की लंबी कतार और जाम के कारण चालक ने रास्ता बदलने का निर्णय लिया। समय बचाने के चक्कर में पिकअप को चौसा के रास्ते मोड़ दिया गया ताकि कदवा होते हुए नवगछिया पहुँचा जा सके। किसी को इस बात का अंदेशा नहीं था कि जाम से बचने के लिए चुना गया यह वैकल्पिक रास्ता उनके जीवन का आखिरी रास्ता साबित होगा। कदवा से आगे बढ़ते ही जैसे ही गाड़ी बाबा विशु राउत सेतु पर चढ़ी, हाईवा ने काल बनकर उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। घायलों का कहना है कि टक्कर इतनी अचानक हुई कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला।

​हादसे की जानकारी मिलते ही नवगछिया के यातायात थानाध्यक्ष सुजीत वारसी दल-बल के साथ मौके पर पहुँचे। पुलिस ने सबसे पहले स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को मलबे से बाहर निकाला और अस्पताल भेजा। दुर्घटनाग्रस्त पिकअप वैन को पुलिस ने जब्त कर लिया है, जबकि टक्कर मारने वाला हाईवा चालक वाहन सहित मौके से फरार होने में सफल रहा। यातायात थानाध्यक्ष सुजीत वारसी ने बताया कि प्राथमिक जांच में तेज रफ्तार को हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है। पुलिस फरार हाईवा और उसके चालक की पहचान के लिए पुल पर लगे सीसीटीवी कैमरों और आसपास के चश्मदीदों के बयानों का सहारा ले रही है। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।

​यह हादसा केवल एक सड़क दुर्घटना नहीं है, बल्कि बिहार के गरीब मजदूरों की उस त्रासदी का हिस्सा है जहाँ उन्हें पेट की आग बुझाने के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर जाना पड़ता है। पटना के टाल क्षेत्रों में जब काम खत्म होता है, तो ये मजदूर अक्सर सस्ते परिवहन के चक्कर में पिकअप या असुरक्षित वाहनों का सहारा लेते हैं। बाबा विशु राउत सेतु पर हुआ यह हादसा इसी मजबूरी का परिणाम है। अगर सड़कों पर भारी वाहनों की रफ्तार पर अंकुश होता और मजदूरों के लिए सुरक्षित परिवहन के साधन सुलभ होते, तो शायद मिल्की गांव की इन महिलाओं और बुजुर्गों को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ती। स्थानीय ग्रामीणों ने मांग की है कि पुलों और नेशनल हाईवे पर स्पीड ब्रेकर या रडार गन की व्यवस्था की जाए ताकि तेज रफ्तार गाड़ियों पर लगाम लग सके।

​मिल्की गांव के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। संजो देवी और कारी देवी के परिवार वालों ने बताया कि ये लोग कई महीनों से पटना में रहकर काम कर रहे थे और इस बार कुछ पैसे बचाकर घर लौट रहे थे ताकि घर की मरम्मत और बच्चों की जरूरतों को पूरा किया जा सके। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। आज उनकी मेहनत की कमाई तो घर पहुँची, लेकिन वे खुद कफन में लिपटे हुए लौटे। गांव के लोग इस बात से भी आक्रोशित हैं कि हाईवा चालक ने टक्कर मारने के बाद रुकने की जहमत नहीं उठाई और घायलों को तड़पता हुआ छोड़कर भाग गया। ग्रामीणों का कहना है कि बाबा विशु राउत सेतु पर आए दिन छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन प्रशासन इसे रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठा रहा है।

​इस हादसे ने एक बार फिर भागलपुर और नवगछिया के बीच के यातायात तंत्र की खामियों को उजागर कर दिया है। 16 अप्रैल की यह सुबह नवगछिया के लिए एक काला अध्याय साबित हुई है। तीन जिंदगियां जो केवल दो वक्त की रोटी की तलाश में घर से निकली थीं, वे सड़क के खूनी खेल का हिस्सा बन गईं। पुलिस अब अपनी तफ्तीश कर रही है और घायलों का मायागंज में संघर्ष जारी है। आने वाले समय में ऐसे हादसों को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाने की सख्त जरूरत है ताकि दोबारा किसी मजदूर के घर का चूल्हा इस तरह न बुझे। फिलहाल पूरे इलाके में गम और गुस्से का माहौल बना हुआ है और लोग प्रशासन से दोषियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।

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