
पटना। बिहार के राजनैतिक इतिहास में 15 अप्रैल 2026 की दोपहर प्रशासनिक सुधार और कार्यसंस्कृति में बदलाव की एक नई इबारत लेकर आई है। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के ठीक बाद सम्राट चौधरी ने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए सीधा रुख मुख्य सचिवालय का किया। यहाँ उन्होंने राज्य की नौकरशाही के शीर्ष अधिकारियों के साथ न केवल औपचारिक मुलाकात की, बल्कि शासन चलाने का अपना ‘सख्त और स्पष्ट’ एजेंडा भी मेज पर रख दिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अब बिहार में ‘फाइलें दौड़ाने’ का नहीं, बल्कि ‘समस्याएं सुलझाने’ का युग शुरू हो चुका है। सचिवालय के सभागार में आयोजित इस पहली उच्च स्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री के तेवर यह बता रहे थे कि वे नौकरशाही को केवल आदेश देने नहीं, बल्कि उन्हें जवाबदेही के उस कटघरे में खड़ा करने आए हैं जहाँ जनता की समस्याओं का समाधान ही एकमात्र पैमाना होगा। सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को ‘दुगुनी गति’ से काम करने का निर्देश देते हुए यह साफ कर दिया कि मुख्यालय से लेकर ब्लॉक और थाने तक, भ्रष्टाचार और काम लटकाने की प्रवृत्ति को अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’: ऊपर से नीचे तक होगी सफाई
मुख्यमंत्री ने अपनी पहली बैठक में जिस मुद्दे पर सबसे अधिक जोर दिया, वह था भ्रष्टाचार। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में अधिकारियों को चेतावनी दी कि राज्य सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर पूरी दृढ़ता से काम करेगी। सम्राट चौधरी ने कहा कि भ्रष्टाचार केवल बड़े दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सबसे बुरा असर प्रखंड, अंचल और थानों में पड़ता है जहाँ आम आदमी अपनी शिकायतों को लेकर पहुँचता है।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ‘ऊपर से नीचे तक’ किसी भी स्तर पर अगर भ्रष्टाचार की गंध आई, तो कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री का मानना है कि शासन की योजनाओं की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि वह बिना किसी ‘कमीशन’ या ‘रिश्वत’ के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। उन्होंने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने अधीन आने वाले दफ्तरों में पारदर्शिता सुनिश्चित करें और बिचौलिया संस्कृति को जड़ से समाप्त करें।
फाइल लटकाने की प्रवृत्ति पर प्रहार: सिर्फ पत्र लिखने से नहीं चलेगा काम
सचिवालय की कार्यसंस्कृति पर प्रहार करते हुए सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को एक नई नसीहत दी। उन्होंने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि अधिकारी केवल ‘फाइल बढ़ाने’ और ‘पत्र लिखने’ की खानापूर्ति में लगे रहते हैं, जिससे जनता से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य लटके रह जाते हैं। मुख्यमंत्री ने सख्त लहजे में कहा कि मुख्यालय स्तर से लेकर सबसे निचले प्रशासनिक स्तर तक कार्यों को लटकाने की यह प्रवृत्ति अब बंद होनी चाहिए।
”जनता की समस्याओं का समाधान तेजी से हो, यह हम सबकी प्रवृत्ति होनी चाहिए। फाइलों का अंबार लगाने के बजाय उनका त्वरित निष्पादन महत्वपूर्ण है।”
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने विभागों में लंबित फाइलों का ब्यौरा तैयार करें और उनके निष्पादन की समय सीमा तय करें। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वे केवल रिपोर्ट नहीं देखेंगे, बल्कि उन फैसलों का धरातल पर प्रभाव भी देखेंगे। उन्होंने कहा कि कार्य को सरल बनाना और उसे समय पर पूरा करना ही वास्तविक सुशासन है।
भूमि विवाद: 70% झगड़ों की जड़ पर होगा सीधा प्रहार
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दे—भूमि विवाद—पर अधिकारियों का ध्यान खींचा। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि बिहार में होने वाले करीब 60 से 70 प्रतिशत आपसी विवादों और अपराधों की जड़ भूमि विवाद ही है। अंचल और अनुमंडल स्तर पर इन मामलों का ससमय निपटारा न होना समाज में वैमनस्य और हिंसा को बढ़ावा देता है।
उन्होंने निर्देश दिया कि भूमि विवाद से संबंधित समस्याओं के समाधान में किसी भी प्रकार की जटिलता नहीं होनी चाहिए। प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाते हुए इनका जल्द से जल्द निपटारा किया जाए। मुख्यमंत्री ने अंचलाधिकारियों (CO) और थानों के बीच बेहतर समन्वय की बात कही ताकि जमीन से जुड़े विवादों को बढ़ने से पहले ही खत्म किया जा सके। उनका लक्ष्य है कि भूमि सुधार और राजस्व से जुड़ी सेवाओं को इतना सुलभ बनाया जाए कि आम जनता को अपने ही हक के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
सात निश्चय और प्रगति यात्रा: विरासत को मिलेगी नई रफ़्तार
सम्राट चौधरी ने अपनी सरकार के विजन को नीतीश कुमार की सुशासन वाली विरासत से जोड़ते हुए कहा कि राज्य में विकास की जो मजबूत नींव रखी गई है, उसे अब और ऊँचाई पर ले जाना है। उन्होंने सात निश्चय-1 और सात निश्चय-2 के तहत चल रही योजनाओं की समीक्षा करने की बात कही और साथ ही 2025 में लागू हुए सात निश्चय-3 पर तेजी से काम शुरू करने का आदेश दिया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि नीतीश कुमार के साथ ‘प्रगति यात्रा’ और ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान उन्हें बिहार के ग्रामीण अंचलों की समस्याओं को नजदीक से देखने का मौका मिला है। प्रगति यात्रा के दौरान घोषित 430 योजनाओं का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं का ससमय पूरा होना राज्य के विकास के लिए अनिवार्य है। उन्होंने अधिकारियों को याद दिलाया कि वे स्वयं भी वित्त मंत्री और अन्य विभागों के मंत्री के रूप में प्रशासनिक बारीकियों से अवगत रहे हैं, इसलिए उन्हें आंकड़ों में उलझाना मुश्किल होगा।
ब्लॉक, अंचल और थाना: जनता की सुविधा का केंद्र बनें
प्रशासन का असली चेहरा ब्लॉक, अंचल और थाने होते हैं। सम्राट चौधरी ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि इन जगहों पर आम जनता को सम्मान मिले और उनकी समस्याओं का ससमय समाधान हो। उन्होंने कहा कि थाना और अंचल कार्यालयों की कार्यशैली में संवेदनशीलता और अनुशासन दिखना चाहिए।
मुख्यमंत्री का मानना है कि अगर निचले स्तर पर प्रशासन मुस्तैद रहे, तो जनता को अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए जिला मुख्यालय या पटना आने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे नियमित रूप से प्रखंडों और थानों का औचक निरीक्षण करें और जनता से संवाद कर फीडबैक प्राप्त करें। ‘संवेदनशीलता’ और ‘अनुशासन’ के साथ काम करना ही विकसित बिहार का मूल मंत्र होना चाहिए।
विकसित भारत और समृद्ध बिहार का साझा संकल्प
बैठक के अंत में सम्राट चौधरी ने अपनी सरकार के दीर्घकालिक लक्ष्य को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत’ के सपने से जोड़ा। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में बिहार की भूमिका अग्रणी होनी चाहिए। इसके लिए पूरे प्रशासनिक अमले को एकजुट होकर एक टीम की तरह काम करना होगा।
मुख्यमंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने कार्यों की प्रगति और वर्तमान स्थिति की विस्तृत रूप-रेखा तैयार करें। आने वाले दिनों में वे हर विभाग की अलग-अलग समीक्षा करेंगे। उन्होंने अधिकारियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वे बिहार को एक समृद्ध और विकसित प्रदेश बनाने के इस मिशन में उनके साथ हैं, लेकिन इसके लिए प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी पुरानी कार्यशैली को बदलकर ‘पब्लिक-सेंट्रिक’ (जनता-केंद्रित) एप्रोच अपनानी होगी।
बैठक में मौजूद थे शासन के शीर्ष स्तंभ
इस महत्वपूर्ण बैठक में बिहार प्रशासन के सभी बड़े चेहरे मौजूद थे। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह और पुलिस महानिदेशक (DGP) विनय कुमार सहित सभी विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और सचिव उपस्थित रहे। इसके अलावा मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, कुमार रवि, डॉ० चन्द्रशेखर सिंह और विशेष कार्य पदाधिकारी गोपाल सिंह भी इस रणनीति सत्र का हिस्सा बने। अधिकारियों की इतनी बड़ी मौजूदगी यह बताती है कि सम्राट चौधरी ने पहले ही दिन शासन की नब्ज पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है।
सचिवालय से बाहर निकलते समय मुख्यमंत्री के चेहरे पर जो दृढ़ता थी, वह यह संदेश दे रही थी कि बिहार में अब घोषणाओं का नहीं, बल्कि ‘परिणाम’ का दौर शुरू हो चुका है। सम्राट चौधरी का यह पहला प्रशासनिक संवाद बिहार की नौकरशाही के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ की तरह है।


