सम्राट चौधरी के CM बनते ही शराबबंदी पर सियासत तेज, अनंत सिंह ने उठाई बड़ी मांग

पटना: बिहार की राजनीति में नए मुख्यमंत्री के रूप में सम्राट चौधरी के चयन के साथ ही कई पुराने मुद्दे फिर से चर्चा में आ गए हैं। इनमें सबसे बड़ा और संवेदनशील मुद्दा है—शराबबंदी। मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह ने एक बार फिर इस नीति पर सवाल उठाते हुए राज्य में शराबबंदी खत्म करने की मांग कर दी है।

उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब बिहार में सत्ता परिवर्तन हो रहा है और नई सरकार गठन की प्रक्रिया चल रही है। इससे साफ है कि आने वाले दिनों में शराबबंदी को लेकर सियासी बहस और तेज होने वाली है।

अनंत सिंह की साफ मांग: “शराब फिर से चालू हो”

मीडिया से बातचीत करते हुए अनंत सिंह ने कहा कि बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद अपेक्षित परिणाम नहीं मिले हैं। उन्होंने दावा किया कि शराब बंद होने के बाद राज्य में अन्य प्रकार के नशे का प्रचलन बढ़ गया है, जो समाज के लिए और अधिक खतरनाक साबित हो रहा है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा,
“बिहार में शराबबंदी के कारण दूसरे तरह के नशे बढ़ गए हैं। इससे समाज को ज्यादा नुकसान हो रहा है। इसलिए शराब फिर से चालू होनी चाहिए।”

अनंत सिंह ने यह भी कहा कि वे इस मुद्दे को लेकर नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से व्यक्तिगत रूप से बात करेंगे और उन्हें अपनी राय से अवगत कराएंगे।

नई सरकार के सामने बड़ा नीति सवाल

सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही यह सवाल उठने लगा है कि क्या नई सरकार शराबबंदी नीति में कोई बदलाव करेगी या इसे पहले की तरह जारी रखेगी।

बिहार में वर्ष 2016 में लागू हुई पूर्ण शराबबंदी नीति मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सबसे बड़ी और चर्चित योजनाओं में रही है। इसे महिलाओं के बीच काफी समर्थन मिला, लेकिन समय-समय पर इसके क्रियान्वयन और प्रभाव को लेकर सवाल भी उठते रहे हैं।

ऐसे में अनंत सिंह जैसे नेताओं की मांग इस बहस को और तेज कर सकती है।

नीतीश कुमार को लेकर भी दिया बड़ा बयान

अनंत सिंह ने इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि भले ही उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ दिया हो, लेकिन बिहार की राजनीति में उनका प्रभाव बना रहेगा।

उन्होंने कहा,
“नीतीश कुमार भले ही पद पर नहीं हों, लेकिन बिहार के असली मालिक वही रहेंगे।”

यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि सत्ता परिवर्तन के बावजूद नीतीश कुमार का राजनीतिक कद और प्रभाव कम नहीं हुआ है।

निशांत कुमार को लेकर अटकलें

मीडिया से बातचीत के दौरान अनंत सिंह ने एक और बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि जदयू की ओर से नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार को डिप्टी सीएम बनाया जा सकता है।

हालांकि, इस संबंध में अब तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, निशांत कुमार फिलहाल सक्रिय राजनीति में आने के लिए तैयार नहीं हैं, लेकिन उनके नाम को लेकर चर्चाएं लगातार जारी हैं।

खुद मंत्री बनने से किया इनकार

अनंत सिंह ने खुद को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उन्हें मंत्री बनने की कोई इच्छा नहीं है और वे इस तरह की किसी दौड़ में शामिल नहीं हैं।

यह बयान उस समय आया है जब नई सरकार के गठन के साथ ही मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चर्चाएं तेज हैं।

शपथ ग्रहण की तैयारी

बिहार में नई सरकार का शपथ ग्रहण कार्यक्रम जल्द ही आयोजित होने वाला है। जानकारी के अनुसार, सम्राट चौधरी मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे और उनके साथ डिप्टी सीएम तथा अन्य मंत्री भी शपथ ग्रहण करेंगे।

राजभवन और प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज हो चुकी हैं। पूरे राज्य की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि नई सरकार किस दिशा में आगे बढ़ेगी।

जेल से बाहर आने के बाद फिर सक्रिय हुए अनंत सिंह

अनंत सिंह इन दिनों एक बार फिर सक्रिय राजनीति में नजर आ रहे हैं। हाल ही में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वे जेल से बाहर आए हैं।

गौरतलब है कि पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने जेल में रहते हुए भी मोकामा सीट से जीत हासिल की थी, जो उनकी राजनीतिक पकड़ को दर्शाता है।

कुछ समय पहले उन्होंने राजनीति से संन्यास लेने की बात भी कही थी, लेकिन अब वे फिर से सक्रिय भूमिका निभाते दिख रहे हैं।

शराबबंदी पर फिर छिड़ सकती है बहस

अनंत सिंह की मांग ने एक बार फिर बिहार में शराबबंदी पर बहस छेड़ दी है। एक तरफ जहां सरकार इसे सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम मानती है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष और कुछ नेता इसके दुष्परिणामों की ओर इशारा करते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि नई सरकार को इस मुद्दे पर संतुलित और व्यावहारिक निर्णय लेना होगा, क्योंकि यह केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक मुद्दा भी है।

कुल मिलाकर, सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के साथ ही बिहार की राजनीति में नए समीकरण बनते नजर आ रहे हैं। अनंत सिंह की शराबबंदी खत्म करने की मांग ने इस बात के संकेत दे दिए हैं कि आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक केंद्र में रह सकता है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि नई सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है—क्या पुरानी नीति जारी रहेगी या इसमें बदलाव देखने को मिलेगा।

बिहार की राजनीति में यह एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हो सकता है।

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