
पटना। बिहार के सियासी समर में 14 अप्रैल 2026 की यह दोपहर किसी सस्पेंस थ्रिलर फिल्म के क्लाइमेक्स की तरह आगे बढ़ रही है। जहाँ एक ओर मुख्य सचिवालय में नीतीश कुमार ने अपनी अंतिम कैबिनेट बैठक के बाद मंत्रियों और अधिकारियों के साथ विदाई की यादें साझा कीं, वहीं दूसरी ओर सत्ता के नए ढांचे में जनता दल यूनाइटेड (JDU) की भूमिका को लेकर एक बड़ा पेंच फंस गया है। ताज़ा घटनाक्रम के अनुसार, दोपहर 2 बजे प्रस्तावित जदयू विधायक दल की बैठक को अचानक रद्द कर दिया गया है। खबर है कि अब जदयू के विधायक और नेता किसी अलग बैठक के बजाय सीधे शाम 4 बजे होने वाली एनडीए विधानमंडल दल की बैठक में हिस्सा लेंगे। इस रणनीतिक बदलाव के पीछे सबसे बड़ी वजह नीतीश कुमार के पुत्र निशांत कुमार की हिचकिचाहट बताई जा रही है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि भाजपा के नेतृत्व वाली इस नई सरकार में उपमुख्यमंत्री (डिप्टी सीएम) का पद जदयू के खाते में जाना तय है, लेकिन इस पद को स्वीकार करने के लिए निशांत कुमार फिलहाल तैयार नहीं दिख रहे हैं।
जदयू की बैठक रद्द होने का राज: क्या है निशांत कुमार की उलझन?
पटना के 1 अणे मार्ग पर होने वाली जदयू विधायकों की बैठक का टलना यह साफ संकेत दे रहा है कि पार्टी के भीतर ‘उत्तराधिकार’ और ‘पद’ को लेकर मथनी चल रही है। सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार चाहते हैं कि उनकी विरासत को नई सरकार में निशांत कुमार आगे बढ़ाएं। लेकिन निशांत कुमार ने फिलहाल किसी भी सरकारी पद को लेने से मना कर दिया है। बताया जा रहा है कि वे सीधे उपमुख्यमंत्री जैसे बड़े संवैधानिक पद की जिम्मेदारी उठाने के बजाय संगठन या सामाजिक कार्यों के जरिए अपनी पहचान बनाना चाहते हैं।
निशांत की इस ‘ना’ ने जदयू नेतृत्व के सामने एक बड़ी संवैधानिक और राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। यदि निशांत कुमार को मनाने में सफलता नहीं मिलती है, तो मुख्यमंत्री आवास पर होने वाली बैठक का कोई ठोस परिणाम नहीं निकलता, यही वजह है कि बैठक को फिलहाल टालकर सीधे एनडीए की संयुक्त बैठक में शामिल होने का फैसला लिया गया। जदयू अब ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में है, जहाँ अंतिम समय तक निशांत कुमार को मनाने की कोशिशें जारी रहेंगी।
डिप्टी सीएम के लिए ‘प्लान-बी’: अनुभवी दिग्गजों पर टिकी नजरें
निशांत कुमार की असहमति की स्थिति में नीतीश कुमार ने अपना ‘प्लान-बी’ भी तैयार रखा है। सियासी हल्कों में यह खबर है कि अगर निशांत कुमार उपमुख्यमंत्री बनने के लिए तैयार नहीं होते हैं, तो नीतीश कुमार अपने तीन सबसे भरोसेमंद और अनुभवी चेहरों में से किसी दो को इस पद के लिए मनोनीत कर सकते हैं। इन नामों में विजेंद्र प्रसाद यादव, विजय कुमार चौधरी और श्रवण कुमार के नाम सबसे ऊपर हैं।
- विजेंद्र प्रसाद यादव: पार्टी के सबसे वरिष्ठ नेता और प्रशासनिक अनुभव के धनी। उन्हें डिप्टी सीएम बनाकर नीतीश कुमार सरकार में अनुभव और जातीय संतुलन को साधना चाहते हैं।
- विजय कुमार चौधरी: नीतीश कुमार के संकटमोचक माने जाने वाले विजय चौधरी की स्वीकार्यता भाजपा और जदयू दोनों में समान रूप से है।
- श्रवण कुमार: कुर्मी समाज से आने वाले और संगठन पर पकड़ रखने वाले श्रवण कुमार भी इस रेस में मजबूती से बने हुए हैं।
चर्चा यह है कि यदि निशांत कुमार मान जाते हैं, तो वे अकेले ही उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे, जिससे जदयू के भीतर ‘सिंगल पावर सेंटर’ बना रहेगा। लेकिन यदि वे पीछे हटते हैं, तो दो डिप्टी सीएम बनाकर नीतीश कुमार पार्टी के भीतर सत्ता के संतुलन को बरकरार रखने की कोशिश करेंगे।
आखिरी कैबिनेट की यादें और राजभवन की राह
इन तमाम सियासी समीकरणों के बीच, नीतीश कुमार ने आज मुख्य सचिवालय में अपनी आखिरी कैबिनेट बैठक संपन्न की। यह बैठक केवल एक औपचारिक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं थी, बल्कि इसमें विदाई की भावुकता भी घुली हुई थी। बैठक खत्म होने के बाद नीतीश कुमार ने अपने कैबिनेट सहयोगियों और राज्य के आला अधिकारियों के साथ ग्रुप फोटोग्राफी कराई। सचिवालय की सीढ़ियों पर खींची गई यह तस्वीर बिहार के पिछले दो दशकों के ‘नीतीश मॉडल’ के समापन की आधिकारिक गवाह बन गई है।
अंतिम कैबिनेट में नीतीश कुमार ने मंत्रियों और अफसरों का आभार जताया और यह संकेत दिया कि बिहार अब एक नए राजनीतिक सफर की ओर बढ़ रहा है। सचिवालय से निकलने के बाद अब नीतीश कुमार का अगला पड़ाव राजभवन है। वे किसी भी क्षण राज्यपाल से मिलकर मुख्यमंत्री पद से अपना इस्तीफा सौंप देंगे। इस्तीफे के साथ ही बिहार की वर्तमान सरकार आधिकारिक तौर पर भंग हो जाएगी और नई सरकार के गठन का रास्ता पूरी तरह साफ हो जाएगा।
एनडीए की बैठक पर टिकी नजरें: शाम 4 बजे होगा महाफैसला
अब बिहार की राजनीति का केंद्र बिंदु शाम 4 बजे होने वाली एनडीए विधानमंडल दल की बैठक बन गई है। जदयू के विधायक सीधे विधानसभा के सेंट्रल हॉल पहुँचेंगे, जहाँ भाजपा और अन्य सहयोगी दलों के साथ मिलकर नए नेतृत्व का अनुमोदन किया जाएगा। यह बैठक इस लिहाज से ऐतिहासिक होगी क्योंकि यहाँ पहली बार भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए का औपचारिक चेहरा सामने आएगा।
चूंकि जदयू ने अपनी अलग बैठक रद्द कर दी है, इसलिए अब सारा दारोमदार एनडीए की संयुक्त बैठक पर है। यहीं यह स्पष्ट होगा कि उपमुख्यमंत्री के रूप में कौन सा चेहरा भाजपा के संभावित मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ मंच साझा करेगा। क्या निशांत कुमार अंतिम क्षणों में अपने पिता और पार्टी के आग्रह को स्वीकार करेंगे? या फिर विजय चौधरी और विजेंद्र यादव जैसे अनुभवी कंधों पर सत्ता का यह नया बोझ आएगा? पटना की हवाओं में इस समय सतुआन की सोंधी महक और राजनीति की तीखी गर्माहट एक साथ महसूस की जा रही है।
निष्कर्ष: बदलाव के मुहाने पर खड़ा बिहार
नीतीश कुमार का इस्तीफा केवल एक व्यक्ति का पद छोड़ना नहीं है, बल्कि यह बिहार में शासन की एक पूरी शैली का संक्रमण है। 14 अप्रैल की यह दोपहर बिहार के लिए बहुत भारी है। सतुआन के पर्व पर जब लोग नए अनाज का स्वागत कर रहे हैं, बिहार की राजनीति भी एक नए नेतृत्व के स्वागत की तैयारी में है। निशांत कुमार की ‘ना’ और पुराने दिग्गजों की ‘उम्मीद’ के बीच फंसी जदयू के लिए यह अस्तित्व की लड़ाई भी है। भाजपा अब ‘बड़े भाई’ की भूमिका में है और उसे अपने साथ एक ऐसा जदयू चाहिए जो एकजुट रहे। अगले कुछ घंटों में राजभवन से निकलने वाली हर खबर बिहार के अगले पांच सालों की पटकथा लिखेगी।


