किशगंज पुलिस महकमे में ‘ऑपरेशन क्लीन’: SDPO के बाद अब नगर थानाध्यक्ष पर ईओयू का प्रहार, पांच ठिकानों पर छापेमारी से मचा हड़कंप

पटना। बिहार पुलिस के भीतर भ्रष्टाचार के खिलाफ चल रही जंग अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है। सीमावर्ती जिले किशनगंज में खाकी की साख पर एक बार फिर गहरा दाग लगा है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत मंगलवार, 14 अप्रैल 2026 को बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। किशनगंज के एसडीपीओ (SDPO) गौतम कुमार के बाद अब नगर थाना अध्यक्ष, इंस्पेक्टर अभिषेक कुमार रंजन ईओयू की रडार पर आ गए हैं। आय से अधिक संपत्ति (DA) के मामले में ईओयू की अलग-अलग टीमों ने एक साथ इंस्पेक्टर के पटना, छपरा (सारण) और किशनगंज स्थित पांच ठिकानों पर धावा बोला है। शुरुआती जांच और अब तक की तलाशी में यह बात सामने आई है कि इंस्पेक्टर ने अपनी वैध आय से लगभग 1 करोड़ 70 लाख रुपये से अधिक की अकूत संपत्ति जमा कर रखी है। इस कार्रवाई ने न केवल सीमांचल की पुलिसिंग पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि उन भ्रष्ट अधिकारियों को भी कड़ा संदेश दिया है जो वर्दी की आड़ में अपनी तिजोरियां भरने में जुटे हैं।

भ्रष्टाचार की ‘चेन’ पर कड़ा प्रहार: पांच ठिकानों पर एक साथ दबिश

​मंगलवार की सुबह जब पटना से लेकर किशनगंज तक लोग अपने रोजमर्रा के कामों में जुटे थे, तभी आर्थिक अपराध इकाई की विशेष टीमों ने इंस्पेक्टर अभिषेक कुमार रंजन के ठिकानों की घेराबंदी शुरू कर दी। ईओयू ने इस कार्रवाई को पूरी गोपनीयता के साथ अंजाम दिया। जांच एजेंसी के अनुसार, इंस्पेक्टर के खिलाफ लंबे समय से गोपनीय शिकायतें मिल रही थीं, जिसके बाद उनके वित्तीय लेन-देन और संपत्ति का ब्योरा खंगाला गया। साक्ष्य पुख्ता होने के बाद ईओयू थाना में कांड संख्या 05/2026 दर्ज किया गया और कोर्ट से सर्च वारंट लेकर छापेमारी शुरू की गई।

​पटना के रामकृष्णा नगर स्थित उनके आवास पर जब ईओयू की टीम पहुँची, तो वहां मौजूद लोग हक्का-बक्का रह गए। टीम ने घर के कोने-कोने की तलाशी ली और कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों को अपने कब्जे में लिया। इसके साथ ही, उनके पैतृक जिले सारण के भेल्दी अंतर्गत पैगा गांव में भी ईओयू की टीम ने दस्तक दी। पैतृक आवास पर रेड के दौरान टीम ने जमीन के कागजात, बैंक पासबुक और निवेश से जुड़े दस्तावेजों की बारीकी से जांच की है।

किशगंज में खलबली: थाने से महज 50 मीटर की दूरी पर रेड

​सबसे अधिक गहमागहमी किशनगंज जिले में देखी गई, जहाँ अभिषेक कुमार रंजन वर्तमान में नगर थाना अध्यक्ष के रूप में तैनात हैं। ईओयू की 6 सदस्यीय टीम तीन गाड़ियों में सवार होकर किशनगंज पहुँची। टीम ने नगर थाने के समीप स्थित इंस्पेक्टर के सरकारी आवास और उनके कार्यालय (चैंबर) में सघन तलाशी अभियान चलाया। दिलचस्प बात यह है कि इंस्पेक्टर का आवास थाने से महज 50 मीटर की दूरी पर स्थित है।

​तलाशी के दौरान टीम ने वहां मौजूद कंप्यूटर, हार्ड डिस्क और कई ऐसी फाइलों को जब्त किया है जो संदिग्ध लेन-देन की ओर इशारा करती हैं। नगर थाने के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती कर दी गई थी ताकि जांच प्रक्रिया में कोई व्यवधान न आए। किशनगंज जैसे संवेदनशील और सीमावर्ती जिले में एक महत्वपूर्ण पद पर तैनात इंस्पेक्टर के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई ने स्थानीय पुलिस प्रशासन के भीतर भी खलबली मचा दी है।

1.70 करोड़ की काली कमाई का गणित

​आर्थिक अपराध इकाई द्वारा साझा की गई प्राथमिक जानकारी के अनुसार, अभिषेक कुमार रंजन ने अपनी नौकरी के दौरान आय के ज्ञात स्रोतों से कहीं अधिक संपत्ति अर्जित की है। यह अंतर लगभग 1 करोड़ 70 लाख 83 हजार रुपये का बताया जा रहा है। जांच में पता चला है कि यह संपत्ति चल और अचल दोनों रूपों में है।

​ईओयू को संदेह है कि पटना और सारण में कई बेनामी संपत्तियों में भी इंस्पेक्टर का पैसा लगा हो सकता है। अब तक की छापेमारी में भारी मात्रा में नकद, सोने के आभूषण और महंगे इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के बारे में भी जानकारी मिली है, जिसकी आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद की जाएगी। ईओयू के अधिकारी इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या यह काली कमाई केवल व्यक्तिगत है या इसके पीछे कोई बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा है।

एसडीपीओ गौतम कुमार के बाद दूसरा बड़ा झटका

​किशगंज पुलिस के लिए यह दूसरा बड़ा झटका है। गौर करने वाली बात यह है कि इससे कुछ ही दिनों पहले किशनगंज के एसडीपीओ गौतम कुमार भी आर्थिक अपराध इकाई की रडार पर आए थे। उनके खिलाफ भी आय से अधिक संपत्ति का मामला पाया गया था और उनके ठिकानों से करोड़ों की संपत्ति के दस्तावेज मिले थे।

​किशनगंज जिले में एक के बाद एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर भ्रष्टाचार की गाज गिरना यह संकेत दे रहा है कि जिले में ‘काली कमाई’ का खेल काफी समय से चल रहा था। ईओयू अब इस बात की कड़ियाँ जोड़ रही है कि क्या एसडीपीओ और इंस्पेक्टर के बीच किसी तरह का ‘लेन-देन’ का कोई साझा कनेक्शन तो नहीं था। सीमांचल के जिलों में शराबबंदी कानून के उल्लंघन, तस्करी और बालू माफियाओं के साथ सांठगांठ के आरोप अक्सर पुलिस पर लगते रहे हैं, और ईओयू की यह रेड इन्हीं जड़ों को खोदने की कोशिश है।

सारण में ‘पैगा’ गांव से लेकर पटना के गलियारों तक जांच की आंच

​सारण जिले के भेल्दी थाना क्षेत्र के पैगा गांव में इंस्पेक्टर के पैतृक घर पर हुई रेड ने स्थानीय लोगों को चौंका दिया है। ग्रामीणों के अनुसार, अभिषेक कुमार रंजन का परिवार वहां रसूखदार माना जाता था, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि ईओयू की टीम अचानक यहाँ पहुँच जाएगी। वहां के बंद कमरों और संदूकों को भी खोला गया ताकि छिपे हुए निवेश का पता चल सके।

​पटना में भी रामकृष्णा नगर स्थित आवास पर टीम अभी तक जमी हुई है। ईओयू के अधिकारियों का कहना है कि यह केवल एक छापेमारी नहीं है, बल्कि यह भ्रष्टाचार की एक लंबी फेहरिस्त का पर्दाफाश है। जांच एजेंसी अब उन बैंक खातों को भी फ्रीज करने की तैयारी में है, जिनके जरिए संदिग्ध ट्रांजैक्शन किए गए थे। साथ ही, बीमा पॉलिसी और म्यूचुअल फंड में किए गए निवेशों की भी वर्तमान वैल्यू निकाली जा रही है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ राज्य सरकार का कड़ा रुख

​नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार ने हाल के दिनों में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी नीति को और अधिक सख्त किया है। पुलिस विभाग के भीतर ही विभागीय जांच और ईओयू की कार्रवाई में तेजी आई है। इंस्पेक्टर अभिषेक कुमार रंजन पर हुई यह रेड यह बताती है कि कोई भी अधिकारी चाहे वह कितनी भी प्रभावशाली पोस्टिंग पर क्यों न हो, वह कानून की नजरों से बच नहीं सकता।

​किशनगंज नगर थाना अध्यक्ष पर इस एक्शन से जिले के अन्य पुलिसकर्मियों में भी हड़कंप है। भ्रष्टाचार के इन मामलों ने ईमानदार पुलिसकर्मियों के मनोबल पर भी असर डाला है, लेकिन ईओयू का कहना है कि इस तरह के ‘ऑपरेशन क्लीन’ से अंततः विभाग की साख ही मजबूत होगी। आने वाले दिनों में कुछ और बड़े चेहरों पर भी गाज गिर सकती है, क्योंकि ईओयू के पास कई अन्य अधिकारियों के खिलाफ भी पुख्ता इनपुट मौजूद हैं।

​शाम तक ईओयू इस पूरी छापेमारी का विस्तृत ब्योरा जारी कर सकती है, जिसमें जब्त किए गए नकद और आभूषणों की सटीक मात्रा बताई जाएगी। फिलहाल, किशनगंज से लेकर पटना तक अभिषेक कुमार रंजन के पांचों ठिकानों पर ईओयू के अधिकारी दस्तावेजों के अंबार में ‘काली कमाई’ के पक्के सबूत तलाश रहे हैं।

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