​बिहार के SC/ST छात्रों के लिए बड़ा फैसला: छात्रावास अनुदान अब दो हजार रुपये, बापू सभागार में छह हजार छात्र-छात्राओं ने भरी उड़ान

पटना। बिहार की राजधानी के ऐतिहासिक बापू सभागार में सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को सामाजिक न्याय और शैक्षणिक क्रांति का एक नया अध्याय लिखा गया। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग द्वारा आयोजित ‘डॉ. भीमराव अम्बेडकर समग्र शिक्षा समागम’ के दौरान राज्य सरकार ने हाशिए पर खड़े समाज के युवाओं के लिए अपनी प्रतिबद्धता को एक नई ऊंचाई दी। इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण वह ऐतिहासिक घोषणा रही, जिसके तहत राज्य के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (SC/ST) छात्रावासों में रहने वाले विद्यार्थियों को मिलने वाली मासिक अनुदान राशि को सीधे दो गुना कर दिया गया है। अब इन छात्रों को प्रतिमाह एक हजार रुपये के स्थान पर दो हजार रुपये का अनुदान प्राप्त होगा। यह निर्णय केवल एक आर्थिक सहायता नहीं है, बल्कि उन हजारों मेधावी युवाओं के सपनों में निवेश है जो संसाधनों के अभाव में अपनी प्रतिभा को निखारने से चूक जाते थे। कार्यक्रम के दौरान बापू सभागार की दीवारों ने उस समय एक नई गूँज सुनी जब राज्य के विभिन्न कोनों से आए छह हजार विद्यार्थियों ने बाबा साहेब के ‘शिक्षित बनो’ के संकल्प को सामूहिक रूप से दोहराया।

अनुदान में ऐतिहासिक बढ़ोतरी और आर्थिक सुरक्षा का नया ढांचा

​शिक्षा समागम की अध्यक्षता करते हुए अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने विभाग की योजनाओं का खाका प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार का प्राथमिक उद्देश्य समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ना है। छात्रावास अनुदान राशि को एक हजार से बढ़ाकर दो हजार रुपये करने का निर्णय अप्रैल 2026 से ही प्रभावी हो गया है। मंत्री के अनुसार, बढ़ती महंगाई और छात्रों की पोषण संबंधी जरूरतों को देखते हुए यह वृद्धि अनिवार्य थी। इसके साथ ही विद्यालय छात्रवृत्ति की दरों को भी दो गुना करने का ऐलान किया गया है।

​इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रतिमान गढ़ रहा है। उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे केवल डिग्रियां हासिल करने तक सीमित न रहें, बल्कि ज्ञान के उस शिखर को छुएं जहाँ से वे समाज और राष्ट्र के निर्माण में अपनी अहम भूमिका निभा सकें। सम्राट चौधरी ने जोर देकर कहा कि बाबा साहेब की जयंती की पूर्व संध्या पर यह आयोजन उन वर्गों के लिए सम्मान का प्रतीक है जिन्हें लंबे समय तक अवसरों से वंचित रखा गया।

मेधा का सम्मान: गयाघाट की बेटियों ने रचा इतिहास

​समागम का सबसे गौरवशाली क्षण वह था जब राज्य भर के 91 डॉ. भीमराव अम्बेडकर आवासीय विद्यालयों के उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को मंच पर सम्मानित किया गया। विशेष रूप से चर्चा का केंद्र रहीं गयाघाट स्थित आवासीय विद्यालय की 123 छात्राएं, जिन्होंने बिहार इंटरमीडिएट परीक्षा में प्रथम श्रेणी से सफलता प्राप्त कर अपनी मेधा का लोहा मनवाया है। इन बेटियों की सफलता इस बात का प्रमाण है कि यदि सरकार सही वातावरण और संसाधन उपलब्ध कराए, तो ग्रामीण और पिछड़े परिवेश से आने वाली प्रतिभाएं भी वैश्विक मंच पर खड़ी होने की क्षमता रखती हैं।

​कार्यक्रम में उपस्थित विधानसभा अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार और उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने इन छात्रों की उपलब्धि को बिहार के गौरवशाली भविष्य का संकेत बताया। सम्मानित होने वाले मेधावियों के लिए यह क्षण केवल एक पुरस्कार नहीं, बल्कि उनके संघर्षों की विजय गाथा थी। लखेंद्र कुमार रौशन ने कहा कि ये छात्र न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं। सरकार इन छात्रों के आगे की पढ़ाई के लिए भी हर संभव सहयोग प्रदान करने के लिए तैयार है।

सिविल सेवा से विदेश तक: योजनाओं का सघन जाल

​बिहार सरकार केवल प्रारंभिक शिक्षा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह उच्च पदों पर समाज के पिछड़े वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए ‘मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति सिविल सेवा प्रोत्साहन योजना’ का प्रभावी संचालन कर रही है। इस योजना के तहत प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए 30 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक की एकमुश्त सहायता दी जाती है। मंत्री ने जानकारी दी कि अब तक इस योजना से 6223 अभ्यर्थी लाभान्वित हो चुके हैं, जो विभिन्न प्रशासनिक सेवाओं में अपनी जगह बनाने की ओर अग्रसर हैं।

​इसके अलावा, ‘नेशनल ओवरसीज स्कॉलरशिप’ योजना के माध्यम से बिहार की मेधा अब सात समुंदर पार भी अपनी चमक बिखेरेगी। उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के छात्रों को वित्तीय सहायता प्रदान करने हेतु विभाग ने आवश्यक कार्यवाही पूरी कर ली है। यह कदम उन युवाओं के लिए वरदान साबित होगा जो आर्थिक तंगी के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा का सपना भी नहीं देख पाते थे। लखेंद्र कुमार रौशन ने स्पष्ट किया कि अब बिहार का दलित-पिछड़ा युवा भी हार्वर्ड और ऑक्सफोर्ड जैसे संस्थानों में पढ़ाई कर सकेगा।

बुनियादी ढांचे का विकास: 38 जिलों में कन्या छात्रावास

​शैक्षणिक सुविधाओं को धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने बुनियादी ढांचे के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया है। राज्य के सभी 38 जिलों में बालिकाओं के लिए 100 बेड वाले विशेष छात्रावासों का निर्माण कार्य प्रगति पर है। इससे उन छात्राओं को बड़ी राहत मिलेगी जो अपने घर से दूर जिला मुख्यालयों में रहकर पढ़ाई करती हैं। सुरक्षा और सुविधा के दृष्टिकोण से इन छात्रावासों को आधुनिक मानकों के अनुरूप बनाया जा रहा है।

​समग्र विकास की कड़ी में मंत्री ने अन्य विभागीय उपलब्धियों को भी साझा किया:

  • समेकित थरुहट विकास अभिकरण: कुल 357 योजनाओं में से 279 को पूर्ण कर लिया गया है, जिससे जनजाति बहुल क्षेत्रों में विकास की रफ्तार तेज हुई है।
  • बिहार महादलित विकास मिशन: राज्य भर में 4858 सामुदायिक भवन-सह-वर्कशेड का निर्माण कराया गया है, जो सामाजिक एकीकरण और कौशल विकास के केंद्र बन रहे हैं।
  • 24×7 सहायता केंद्र: छात्रों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए विभाग एक निरंतर सक्रिय कॉल सेंटर संचालित कर रहा है।

विकास रजिस्टर 2.0 और भविष्य का रोडमैप

​योजनाओं की पारदर्शिता और शत-प्रतिशत पहुँच सुनिश्चित करने के लिए ‘विकास मित्रों’ की भूमिका को और सशक्त बनाया गया है। अब ‘विकास रजिस्टर 2.0’ के माध्यम से हर परिवार की जरूरतों और योजनाओं के लाभ का डिजिटल डेटा तैयार किया जा रहा है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक सरकार की नीतियां पहुँच सकें। लखेंद्र कुमार रौशन ने कहा कि सरकार अपने कार्यकाल के प्रारंभ से ही जनकल्याणकारी नीतियों के लिए संकल्पित है।

​कार्यक्रम के अंत में उपस्थित अन्य मंत्रियों—दिलीप जायसवाल, संजय कुमार सिंह, प्रमोद कुमार, मदन साहनी, रामकृपाल यादव, सुनील कुमार, संजय सिंह टाइगर और अरुण शंकर प्रसाद—ने भी छात्रों का मनोबल बढ़ाया। विधायक संजीव कुमार चौरसिया, निदेशक प्रियंका रानी और विभागीय पदाधिकारियों ने भी छात्रों को अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण का पाठ पढ़ाया। अपर सचिव गौतम पासवान द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ यह समागम संपन्न हुआ। बापू सभागार से निकले ये 6000 विद्यार्थी केवल छात्र नहीं, बल्कि एक नए बिहार के राजदूत बनकर अपने जिलों की ओर लौटे हैं, जिनके कंधों पर बाबा साहेब के सपनों का बोझ और सरकार के सहयोग का संबल है।

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