
पटना/भागलपुर। बिहार के छोटे शहरों को हवाई मार्ग से जोड़ने की बहुप्रतीक्षित योजना अब धरातल पर उतरती दिखाई दे रही है। राज्य के चार प्रमुख शहरों—भागलपुर, मोतिहारी, गोपालगंज और छपरा—के लिए अगले सात दिन अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाले हैं। रविवार, 12 अप्रैल 2026 को मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इन शहरों में हवाई अड्डों की व्यवहार्यता (Feasibility) और विस्तार की संभावनाओं को टटोलने के लिए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) की एक उच्चस्तरीय तकनीकी टीम दिल्ली से अगले सप्ताह बिहार पहुँच रही है। यह टीम 15 से 18 अप्रैल के बीच इन चारों स्थानों का सघन दौरा करेगी और अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। इस सर्वेक्षण का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि इन हवाई पट्टियों को व्यावसायिक उड़ानों के लिए तैयार करने हेतु कितनी अतिरिक्त भूमि और बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होगी। बिहार सरकार के निरंतर प्रयासों और ‘उड़ान’ (UDAN) योजना के प्रति प्रतिबद्धता का ही परिणाम है कि अब अंग जनपद और सारण प्रमंडल के लोगों के लिए आसमान की दूरियां घटने वाली हैं।
सर्वेक्षण का कार्यक्रम और तकनीकी टीम का एजेंडा
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की यह टीम दिल्ली से सीधे पटना पहुँचेगी और वहां से जिला स्तर पर निर्धारित शेड्यूल के अनुसार अपना काम शुरू करेगी। 15 अप्रैल से शुरू होने वाले इस चार दिवसीय दौरे में टीम प्रत्येक हवाई अड्डे की रनवे क्षमता, भौगोलिक स्थिति, आसपास की बाधाओं (Obstacles) और सुरक्षा मानकों का आकलन करेगी।
टीम के एजेंडे में सबसे प्रमुख कार्य ‘प्री-फीजिबिलिटी रिपोर्ट’ (Pre-feasibility Report) तैयार करना है। यह रिपोर्ट ही तय करेगी कि भविष्य में इन शहरों से छोटे 72-सीटर (ATR-72) या बड़े वाणिज्यिक विमान उड़ान भर पाएंगे या नहीं। सर्वे के दौरान टीम रनवे की मजबूती, मिट्टी की वहन क्षमता और एटीसी (ATC) टॉवर व टर्मिनल बिल्डिंग के लिए प्रस्तावित स्थलों का भी निरीक्षण करेगी। इसके बाद यह रिपोर्ट राज्य सरकार के सिविल विमानन विभाग को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर केंद्र सरकार के साथ आगे का पत्राचार किया जाएगा।
रनवे की वर्तमान स्थिति: एक तुलनात्मक विश्लेषण
बिहार के इन चारों हवाई अड्डों की वर्तमान स्थिति एक-दूसरे से काफी अलग है। कुछ स्थानों पर रनवे की लंबाई संतोषजनक है, तो कहीं इसे व्यावसायिक मानकों तक लाने के लिए बड़े भूमि अधिग्रहण की आवश्यकता होगी। वर्तमान तकनीकी आंकड़ों के अनुसार इन हवाई अड्डों की स्थिति निम्नलिखित है:
एयरपोर्ट का नाम | रनवे की लंबाई (फीट) | रनवे की चौड़ाई (फीट) | वर्तमान स्थिति और चुनौतियां |
|---|---|---|---|
गोपालगंज | 6000 | 150 | यहाँ रनवे की लंबाई सबसे अधिक है, जो इसे बड़े विमानों के लिए अनुकूल बनाती है। |
भागलपुर | 3500 | 150 | अंग जनपद का यह एयरपोर्ट फिलहाल काफी छोटा है; यहाँ रनवे विस्तार सबसे बड़ी चुनौती है। |
मोतिहारी | 1950 | 300 | यहाँ चौड़ाई पर्याप्त है लेकिन लंबाई बेहद कम है, जिससे छोटे चार्टर विमान ही उतर सकते हैं। |
छपरा | 3000 | 100 | सारण का यह एयरपोर्ट फिलहाल रनवे और चौड़ाई दोनों ही मामलों में संकरा है। |
इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि गोपालगंज को छोड़कर बाकी तीनों शहरों में व्यावसायिक उड़ानों के लिए रनवे को कम से कम 5000 से 6000 फीट तक बढ़ाना होगा। तकनीकी टीम अपनी रिपोर्ट में यह स्पष्ट करेगी कि इस विस्तार के लिए किस दिशा में कितनी जमीन चाहिए होगी।
‘उड़ान’ योजना में शामिल होने की राह हुई प्रशस्त
केंद्र सरकार की ‘क्षेत्रीय संपर्क योजना’ (RCS) यानी ‘उड़ान’ (Ude Desh Ka Aam Nagrik) के तहत बिहार सरकार ने इन चारों एयरपोर्टों को शामिल करने के लिए पहले ही केंद्र को पत्र लिखा है। राज्य सरकार ने अपनी गंभीरता दिखाते हुए भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को पूर्व व्यवहार्यता अध्ययन (Pre-feasibility Study) के लिए आवश्यक भुगतान भी कर दिया है।
उड़ान योजना में शामिल होने का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि यहाँ से उड़ान भरने वाली एयरलाइनों को केंद्र सरकार की ओर से सब्सिडी (VGF) मिलेगी, जिससे आम नागरिकों के लिए हवाई टिकट की कीमतें सस्ती होंगी। भागलपुर जैसे व्यापारिक केंद्र और गोपालगंज जैसे प्रवासी बाहुल्य क्षेत्रों के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं होगी। राज्य सरकार का मानना है कि यदि इन चार शहरों में कनेक्टिविटी बढ़ती है, तो बिहार के पर्यटन और औद्योगिक विकास को नई रफ्तार मिलेगी।
भागलपुर: अंग जनपद की पुरानी मांग और नई उम्मीद
भागलपुर के लिए यह सर्वे विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। ‘सिल्क सिटी’ के नाम से मशहूर यह शहर न केवल व्यापारिक दृष्टि से बल्कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भी उत्तर बिहार और झारखंड के एक बड़े हिस्से का केंद्र है। भागलपुर में हवाई सेवा की मांग दशकों पुरानी है। वर्तमान में यहाँ 3500 फीट का छोटा रनवे है, जो केवल वीआईपी (VIP) मूवमेंट या छोटे विमानों के लिए ही उपयुक्त है।
तकनीकी टीम जब यहाँ पहुँचेगी, तो उसे घनी आबादी और पास की ऊंची इमारतों जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। भागलपुर वासियों को उम्मीद है कि टीम रनवे विस्तार के लिए ऐसा तकनीकी रास्ता निकालेगी जिससे कम से कम भूमि अधिग्रहण में काम चल सके। भागलपुर में एयरपोर्ट शुरू होने से यहाँ के सिल्क कारोबार को अंतरराष्ट्रीय पहचान मिलेगी और दूर-दराज से आने वाले व्यापारियों को सुविधा होगी।
भूमि अधिग्रहण: सफलता की सबसे बड़ी कुंजी
भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की रिपोर्ट आने के बाद गेंद राज्य सरकार के पाले में होगी। प्री-फीजिबिलिटी रिपोर्ट में जब जमीन की आवश्यकता का ब्यौरा सामने आएगा, तब असली परीक्षा शुरू होगी। बिहार जैसे सघन आबादी वाले राज्य में एयरपोर्ट के लिए जमीन जुटाना एक दुष्कर कार्य रहा है। बिहटा और दरभंगा के अनुभवों से सीख लेते हुए सरकार को इन चार जिलों के जिलाधिकारियों को पहले से ही सक्रिय करना होगा।
मोतिहारी और छपरा में रनवे की वर्तमान लंबाई काफी कम है, जिसका अर्थ है कि वहां बड़े पैमाने पर जमीन की जरूरत पड़ेगी। गोपालगंज में रनवे पहले से ही 6000 फीट लंबा है, इसलिए वहां कम निवेश में जल्द हवाई सेवा शुरू होने की संभावना सबसे अधिक है। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया मुआवजा और जन-सहमति के साथ पारदर्शी तरीके से पूरी हो, ताकि कोई कानूनी अड़चन न आए।
क्षेत्रीय आर्थिक विकास पर पड़ने वाला प्रभाव
हवाई संपर्क केवल सुविधा का विषय नहीं है, बल्कि यह आर्थिक प्रगति का इंजन भी है।
- पर्यटन: मोतिहारी और चंपारण का क्षेत्र गांधीवादी पर्यटन और वाल्मीकि नगर टाइगर रिजर्व के करीब होने के कारण पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है।
- रोजगार: एयरपोर्ट के आने से लॉजिस्टिक्स, होटल इंडस्ट्री और टैक्सी सेवाओं में हजारों नए रोजगार पैदा होंगे।
- स्वास्थ्य: इमरजेंसी की स्थिति में एयर एम्बुलेंस की सुविधा इन चार जिलों के मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित होगी।
- प्रवासी कनेक्ट: गोपालगंज और छपरा से एक बड़ी आबादी खाड़ी देशों और अन्य राज्यों में रहती है; उन्हें सीधे घर पहुँचने में आसानी होगी।
बिहार के आसमान में बदलाव की आहट
अगले सप्ताह आने वाली दिल्ली की टीम केवल सर्वे नहीं करेगी, बल्कि वह बिहार के लाखों लोगों की उम्मीदों का नक्शा तैयार करेगी। भागलपुर, मोतिहारी, गोपालगंज और छपरा के हवाई अड्डों का कायाकल्प बिहार के सुशासन और आधारभूत संरचना के प्रति सरकार की गंभीरता का प्रमाण है। 15 से 18 अप्रैल का समय बिहार के विमानन इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय जोड़ सकता है।
हालांकि, तकनीकी टीम की रिपोर्ट के बाद जमीन अधिग्रहण और निर्माण की लंबी प्रक्रिया बाकी है, लेकिन ‘सर्वे’ के लिए टीम का आना यह दर्शाता है कि इच्छाशक्ति अब क्रियान्वयन में बदल रही है। The Voice of Bihar की टीम इस सर्वे के हर छोटे-बड़े अपडेट पर अपनी नजर बनाए रखेगी, क्योंकि अंग और सारण जनपद की यह उड़ान अब रुकने वाली नहीं है। उम्मीद की जानी चाहिए कि अगले दो-तीन वर्षों में इन हवाई पट्टियों पर व्यावसायिक विमानों की गूँज सुनाई देगी और बिहार का ‘आम नागरिक’ वाकई उड़ान भरेगा।


