​कटिहार में भीषण सड़क हादसा: बस और पिकअप की टक्कर में 10 की मौत

कटिहार। बिहार के कटिहार जिले में शनिवार की शाम एक ऐसी हृदयविदारक घटना की गवाह बनी, जिसने पूरे कोढ़ा प्रखंड को मातम के गहरे सन्नाटे में डुबो दिया। नेशनल हाईवे-31 (NH-31) पर स्थित बसगढ़ा और फुलवरिया के बीच का इलाका उस समय चीख-पुकार से दहल उठा, जब खुशियों से लदी एक पिकअप वैन काल का ग्रास बन गई। धमदाहा से मेला देखकर हंसी-खुशी अपने घर लौट रहे करीब 30 से अधिक लोगों के लिए यह सफर उनके जीवन का आखिरी सफर साबित हुआ। एक तेज रफ्तार अनियंत्रित बस और यात्रियों से भरी पिकअप वैन के बीच हुई सीधी भिड़ंत में अब तक 10 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि 30 से ज्यादा लोग जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। टक्कर इतनी भयावह थी कि पिकअप वैन के परखच्चे उड़ गए और सड़क पर चारों ओर खून और मलबे का ढेर लग गया। इस हादसे ने एक बार फिर बिहार की सड़कों पर बेलगाम दौड़ती गाड़ियों और ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाने वाले चालकों की करतूतों को उजागर कर दिया है।

खुशियों का सफर मातम में बदला: मेले से लौट रहे थे मासूम

​घटना शनिवार, 11 अप्रैल 2026 की शाम की है। पूर्णिया जिले के धमदाहा में लगे मेले का आनंद लेकर करीब 30 से अधिक ग्रामीण एक पिकअप वैन पर सवार होकर अपने घर की ओर लौट रहे थे। ग्रामीण अंचलों में अक्सर त्योहारों और मेलों के बाद समूह में यात्रा करने की परंपरा है, लेकिन पिकअप जैसे मालवाहक वाहनों पर इस तरह इंसानों को बिठाना सुरक्षा के लिहाज से हमेशा से खतरनाक रहा है। शाम के समय जब यह पिकअप वैन कोढ़ा थाना क्षेत्र के बसगढ़ा चौक के पास पहुँची, तभी सामने से आ रही एक बस ने उसे सीधे टक्कर मार दी।

​प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो टक्कर इतनी जोरदार थी कि उसकी गूँज काफी दूर तक सुनाई दी। पिकअप वैन में सवार महिलाएं, पुरुष और मासूम बच्चे संभल पाते, उससे पहले ही वे लोहे के मलबे और सड़क के बीच कुचल गए। घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि मंजर इतना डरावना था कि शवों को पहचानना भी मुश्किल हो रहा था। इस हादसे में जान गंवाने वालों में महिलाएं और एक छोटी बच्ची भी शामिल है, जिनकी खिलखिलाहट कुछ ही पलों पहले मेले की यादों में डूबी हुई थी।

बस चालक की लापरवाही: नशे और रफ्तार का खूनी तालमेल

​हादसे की प्रारंभिक जांच और स्थानीय लोगों के बयानों से जो तथ्य सामने आ रहे हैं, वे चौंकाने वाले हैं। बताया जा रहा है कि बस चालक पूरी तरह से अपना संतुलन खो चुका था। बस की रफ्तार नेशनल हाईवे के मानकों से कहीं अधिक थी। कुछ चश्मदीदों ने यह भी दावा किया है कि बस चालक नशे की हालत में था और वह रास्ते में पहले भी कुछ छोटे-मोटे हादसों को अंजाम देते हुए भाग रहा था।

​कोढ़ा के समीप जब बस और पिकअप की भिड़ंत हुई, तो पास से गुजर रही दो मोटरसाइकिलें भी इसकी चपेट में आ गईं। बाइक सवारों को बचने का मौका तक नहीं मिला और वे सीधे बस के नीचे आ गए। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि अगर बस की गति नियंत्रित होती, तो शायद इतने बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान नहीं होता। बस चालक की सनक ने 10 परिवारों के चिराग बुझा दिए और दर्जनों लोगों को उम्र भर के लिए अपंग बना दिया।

चीख-पुकार और स्थानीय नागरिकों का साहस

​हादसे के तुरंत बाद बसगढ़ा चौक और आसपास के ग्रामीण इलाकों से भारी संख्या में लोग मदद के लिए दौड़ पड़े। पुलिस के पहुँचने से पहले ही ग्रामीणों ने मलबे में दबे घायलों को बाहर निकालना शुरू कर दिया था। लोग निजी वाहनों, टेम्पो और जो भी साधन मिला, उससे घायलों को अस्पताल पहुँचाने लगे। खून से लथपथ बच्चों और महिलाओं को देख हर किसी की आँखें नम थीं।

​सूचना मिलते ही कोढ़ा थाना पुलिस और वरीय अधिकारी मौके पर पहुँचे। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एम्बुलेंस बुलाई और करीब 30 घायलों को कटिहार सदर अस्पताल और पूर्णिया सदर अस्पताल भेजा। डॉक्टरों के अनुसार, घायल हुए लोगों में से करीब 20 की हालत अत्यंत नाजुक बनी हुई है। इनमें से कई लोगों के शरीर के अंदरूनी हिस्सों में गहरी चोटें आई हैं और कुछ के अंग भंग हो चुके हैं। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, क्योंकि अस्पतालों में भर्ती कई लोग जीवन रक्षक प्रणालियों (Ventilators) पर हैं।

प्रशासनिक मुस्तैदी और मुआवजा की मांग

​हादसे के बाद प्रशासन ने एनएच-31 पर यातायात सुचारू कराने के लिए क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को किनारे कराया। कटिहार जिला प्रशासन और पुलिस कप्तान ने घटनास्थल का जायजा लिया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। पुलिस फरार बस चालक और क्लीनर की तलाश में छापेमारी कर रही है। वहीं, मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

​परिजनों और ग्रामीणों ने सरकार से मुआवजे और दोषियों को फांसी जैसी कड़ी सजा देने की मांग की है। लोगों का कहना है कि केवल मुआवजा देना समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि हाईवे पर ओवरलोडिंग और नशे में गाड़ी चलाने वालों के खिलाफ सख्त कानून का पालन होना चाहिए। कोढ़ा इलाके में इस भीषण हादसे के बाद चूल्हे नहीं जले हैं और पूरे क्षेत्र में केवल सिसकियां सुनाई दे रही हैं।

एनएच-31: दुर्घटनाओं का हॉटस्पॉट बनता राजमार्ग

​कटिहार से गुजरने वाला एनएच-31 पिछले कुछ समय से हादसों का केंद्र बनता जा रहा है। खासकर बसगढ़ा और गेड़ाबाड़ी जैसे इलाकों में सड़कों की डिजाइन या फिर डिवाइडर की कमी के कारण अक्सर गाड़ियां आमने-सामने टकरा जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हाईवे पर पेट्रोलिंग की कमी और स्पीड लिमिट को चेक करने वाले उपकरणों का अभाव ऐसे हादसों को निमंत्रण देता है।

​इसके अलावा, पिकअप जैसे वाहनों में क्षमता से अधिक लोगों का बैठना भी मौतों का आंकड़ा बढ़ा देता है। यदि परिवहन विभाग मालवाहक वाहनों में यात्रियों को बिठाने पर सख्ती बरतता, तो शायद आज 10 लोगों की जान बच सकती थी। इस हादसे ने सुरक्षा मानकों की पोल खोल कर रख दी है।

जिम्मेदारी किसकी?

​कटिहार की यह सड़क दुर्घटना केवल एक ‘हादसा’ नहीं है, बल्कि यह व्यवस्था की विफलता का परिणाम है। एक नशे में धुत चालक कई किलोमीटर तक बस भगाता रहा और किसी भी चेक पोस्ट पर उसे टोका नहीं गया। मेले से लौट रहे उन गरीबों का क्या दोष था, जिन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए केवल एक पिकअप वैन पर भरोसा किया? आज 10 परिवारों के सपने राख हो चुके हैं।

The Voice of Bihar की टीम उन सभी शोकाकुल परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना प्रकट करती है। हम प्रशासन से अपील करते हैं कि घायलों को श्रेष्ठ चिकित्सा उपलब्ध कराई जाए और इस सामूहिक हत्याकांड के जिम्मेदार बस चालक को ऐसी सजा मिले जो मिसाल बन सके। जब तक सड़कों पर इंसानी जान की कीमत केवल आंकड़ों तक सीमित रहेगी, तब तक ऐसी खूनी शामें आती रहेंगी। कटिहार की यह चीख पूरे प्रदेश को झकझोरने के लिए काफी है।

  • ये भी पढ़े..

    अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर भागलपुर वन विभाग में योग शिविर, वनकर्मियों ने अपनाया स्वस्थ जीवन का संकल्प

    Share Add as a preferred…