
गोपालगंज। लालच की नींव पर जब सपनों के महल खड़े किए जाते हैं, तो उनके ढहने की आवाज अक्सर देर से सुनाई देती है, लेकिन उसकी गूँज पूरे समाज को झकझोर कर रख देती है। गोपालगंज जिले में एक ऐसी ही ‘धोखाधड़ी की बिसात’ बिछाई गई, जिसमें ‘आस्था’ नामक एक निजी कंपनी ने लोगों के विश्वास को न केवल जीता, बल्कि उसे 80 करोड़ रुपये की महाठगी में तब्दील कर दिया। शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को जिला मुख्यालय में उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब करीब 256 पीड़ितों का एक जत्था अपनी डूबी हुई पूंजी की गुहार लेकर पुलिस कप्तान के दफ्तर पहुँचा। ‘आस्था’—एक ऐसा नाम जिसे लोगों ने अपनी खुशहाली का जरिया माना था, वह अब एक ऐसे जख्म में बदल चुका है जिसकी भरपाई होना नामुमकिन सा लग रहा है।
निवेश का मायाजाल: जब ‘डबल’ के चक्कर में ‘सिंगल’ भी गंवाया
इस महाठगी की पटकथा वर्ष 2023 के मध्य में लिखी जानी शुरू हुई थी। गोपालगंज के नगर थाना क्षेत्र और आसपास के इलाकों में ‘आस्था’ नामक एक प्राइवेट कंपनी के एजेंटों ने सक्रियता बढ़ाई। उनका दावा सरल लेकिन जादुई था— “हमें अपना निवेश दें, और हम उसे मात्र 20 माह में दोगुना करके लौटाएंगे।” वित्तीय साक्षरता के अभाव और जल्द अमीर बनने की मानवीय कमजोरी का फायदा उठाते हुए, कंपनी ने मध्यमवर्गीय परिवारों, सेवानिवृत्त कर्मचारियों और छोटे व्यापारियों को अपना निशाना बनाया।
शुरुआत में कंपनी ने बेहद चालाकी से काम लिया। जिन कुछ लोगों ने छोटे निवेश किए थे, उन्हें समय सीमा से पहले ही ‘दोगुनी राशि’ लौटाकर समाज में एक कृत्रिम साख (Artificial Credibility) पैदा की गई। यह पोंजी स्कीम का वह ‘हनीमून पीरियड’ था, जहाँ लोग खुद चलकर कंपनी के दफ्तर पहुँचने लगे। लोगों ने अपनी जमीनों के सौदे किए, बेटियों की शादी के लिए रखे गहने बेचे और बैंक से लोन लेकर इस उम्मीद में निवेश किया कि 20 महीने बाद उनके सारे दुख दूर हो जाएंगे। लेकिन उन्हें क्या पता था कि वे जिस सीढ़ी पर चढ़ रहे हैं, वह सीधे खाई की ओर जाती है।
80 करोड़ की लूट: 10 लाख से लेकर 80 लाख तक का दांव
शुक्रवार को जब पीड़ितों ने एसपी विनय तिवारी से मुलाकात की, तो ठगी के जो आंकड़े सामने आए, उन्होंने जिला प्रशासन के भी होश उड़ा दिए। पीड़ितों के अनुसार, कंपनी ने केवल गोपालगंज से ही लगभग 80 करोड़ रुपये की उगाही की है। निवेश की राशि कोई मामूली नहीं थी। किसी ने 10 लाख रुपये लगाए थे, तो किसी ने अपने जीवन भर की जमापूंजी यानी 80 लाख रुपये तक इस कंपनी के हवाले कर दिए थे।
ठगी के शिकार हुए लोगों में 256 नाम तो वे हैं जो सामने आए हैं, लेकिन आशंका जताई जा रही है कि पीड़ितों की संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। नगर थाने में दिए गए आवेदन में बताया गया है कि कंपनी के कर्मियों ने उन्हें यह विश्वास दिलाया था कि उनका पैसा रियल एस्टेट और शेयर बाजार के ऐसे सुरक्षित पोर्टफोलियो में लगाया जा रहा है, जहाँ रिटर्न की गारंटी है। गणितीय दृष्टिकोण से देखें तो निवेशित राशि को 20 माह में दोगुना करना यानी वार्षिक रिटर्न का लगभग 60% से 70% होना अनिवार्य है, जो किसी भी वैध व्यावसायिक ढांचे में संभव नहीं है।


