
मुख्य बिंदु:
- बैठक का स्थान: प्रतिबिंब सभागार, नियोजन भवन, पटना।
- प्रमुख विजन: कौशल विकास, गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण और रोजगार सृजन के जरिए आत्मनिर्भर बिहार।
- बड़ा लक्ष्य: प्रदेश के युवाओं को एक करोड़ रोजगार के अवसरों से जोड़ना।
- सख्त निर्देश: मानकों का पालन न करने वाले ‘कुशल युवा कार्यक्रम’ (KYP) केंद्रों पर होगी सीधी कार्रवाई।
- नया दृष्टिकोण: प्रशिक्षण केंद्रों पर बायोमेट्रिक उपस्थिति और आधुनिक तकनीक आधारित ट्रेनिंग अनिवार्य।
पटना। बिहार के युवाओं को रोजगार की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें वैश्विक मानकों के अनुरूप हुनरमंद बनाने के लिए राज्य सरकार ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 को पटना के नियोजन भवन स्थित प्रतिबिंब सभागार में युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। विभाग के माननीय मंत्री संजय सिंह ‘टाइगर’ ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि विभाग का लक्ष्य केवल कागजी आंकड़े बढ़ाना या प्रमाणपत्र बांटना नहीं है, बल्कि हर हाथ को काम और हर हुनर को सम्मान दिलाना है। ‘टाइगर’ के नाम से चर्चित मंत्री ने अधिकारियों को दो टूक कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी भी स्तर पर सुस्ती या गुणवत्ता से समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कौशल से स्वावलंबन: आत्मनिर्भर युवा ही बनेगा बिहार की ताकत
समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री संजय सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि प्रदेश के युवाओं में प्रतिभा की कमी नहीं है, बस उन्हें सही दिशा और आधुनिक प्रशिक्षण की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि “कौशल विकास और गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण ही वह चाबी है, जिससे आत्मनिर्भर बिहार के द्वार खुलेंगे।” विभाग का मुख्य उद्देश्य युवाओं को केवल साक्षर बनाना नहीं, बल्कि उन्हें ‘रोजगार योग्य’ (Employable) बनाना है।
मंत्री ने बिहार कौशल विकास मिशन के तहत चल रहे विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों की बारीकी से समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रशिक्षण केंद्रों पर केवल पारंपरिक पाठ्यक्रम न पढ़ाए जाएं, बल्कि बदलती तकनीक के दौर में युवाओं को आधुनिक तकनीक (Modern Tech-based Training) पर आधारित कौशल सिखाया जाए, ताकि वे निजी क्षेत्र की जरूरतों को पूरा कर सकें।
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और ITI का कायाकल्प
बैठक में निदेशालय नियोजन एवं प्रशिक्षण के अंतर्गत संचालित राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की अद्यतन स्थिति पर विस्तृत चर्चा की गई। मंत्री ने निर्देश दिया कि:
- रिक्त सीटों की पूर्ति: सभी आईटीआई संस्थानों में खाली पड़ी सीटों को भरने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
- उपस्थिति की निगरानी: छात्रों और प्रशिक्षकों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित की जाए।
- स्टडी किट का वितरण: युवाओं को समय पर स्टडी किट और टूल किट उपलब्ध कराई जाए ताकि उनके व्यावहारिक ज्ञान (Practical Knowledge) में कोई कमी न रहे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि आईटीआई संस्थानों को आधुनिक उद्योगों की मांग के अनुरूप तैयार किया जाना चाहिए ताकि यहाँ से निकलने वाले छात्र सीधे बड़ी कंपनियों में प्लेसमेंट पा सकें।
रोजगार मेले: जिला स्तर पर मचेगी धूम
सरकार के एक करोड़ रोजगार देने के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को लेकर मंत्री संजय सिंह ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने अधिकारियों को आदेश दिया कि अब केवल राजधानी में नहीं, बल्कि जिला स्तर पर नियमित रूप से रोजगार मेलों (Rojgar Mela) और विशेष नियोजन मेलों का आयोजन किया जाए।
मंत्री ने एक नई पहल की बात करते हुए कहा कि “नियुक्ति के बाद भी युवाओं का अनुश्रवण (Monitoring) किया जाना चाहिए।” विभाग अब यह ट्रैक करेगा कि जिन युवाओं को रोजगार मेलों के जरिए नौकरी मिली है, वे अपने कार्यस्थल पर टिके हुए हैं या नहीं और उन्हें वास्तविक लाभ मिल रहा है या नहीं। यह कदम डेटा की पारदर्शिता और योजनाओं की सफलता दर मापने में क्रांतिकारी साबित होगा।
कुशल युवा कार्यक्रम (KYP) पर ‘टाइगर’ की नजर
बिहार के लोकप्रिय ‘कुशल युवा कार्यक्रम’ (KYP) केंद्रों के संचालन को लेकर मंत्री ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि विभाग को ऐसी शिकायतें मिल रही हैं कि कुछ केंद्र निर्धारित मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं।
मंत्री का अल्टीमेटम: “विभागीय अधिकारी सभी केंद्रों का नियमित भौतिक निरीक्षण करें। जो केंद्र इंफ्रास्ट्रक्चर या प्रशिक्षण की गुणवत्ता में कमी बरत रहे हैं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और जरूरत पड़ने पर उनकी मान्यता रद्द की जाए।”
साथ ही, उन्होंने सभी कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों में विभागीय योजनाओं के व्यापक प्रचार-प्रसार का निर्देश दिया, ताकि गांव-गांव के छात्र करिअर सूचना केंद्रों का लाभ उठा सकें।
प्रशासनिक मुस्तैदी और टीम वर्क
बैठक में विभाग के सचिव डॉ. कौशल किशोर, निदेशालय नियोजन एवं प्रशिक्षण के निदेशक सुनील कुमार और अपर सचिव हेमंत कुमार सिंह सहित कई आला अधिकारी मौजूद रहे। मंत्री ने टीम वर्क की सराहना की लेकिन यह भी याद दिलाया कि फाइलों की गति धरातल पर दिखनी चाहिए। युवा आयोग के सचिव विकास कुमार और मंत्री के आप्त सचिव विमल कुमार सिंह को भी समन्वय बेहतर करने के निर्देश दिए गए।
निष्कर्ष: सुशासन और हुनर का संगम
युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग की यह समीक्षा बैठक इस बात का संकेत है कि बिहार सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर अब ‘प्रो-एक्टिव’ मोड में है। मंत्री संजय सिंह ‘टाइगर’ की यह मुस्तैदी आने वाले दिनों में रोजगार के क्षेत्र में बड़ी हलचल पैदा कर सकती है। अगर प्रशिक्षण और प्लेसमेंट के बीच का यह तालमेल सफल रहा, तो बिहार का युवा पलायन करने के बजाय अपने ही प्रदेश में रहकर तरक्की की नई इबादत लिखेगा।
कौशल विकास केंद्रों पर बायोमेट्रिक उपस्थिति और गुणवत्तापूर्ण ट्रेनिंग की अनिवार्यता यह सुनिश्चित करेगी कि सरकारी खजाने का पैसा वास्तव में युवाओं के कौशल निखारने पर खर्च हो रहा है। फिलहाल, विभाग अब जिलावार रोजगार मेलों के कैलेंडर तैयार करने में जुट गया है।


