
पटना, 10 अप्रैल 2026 — बिहार का डेयरी सेक्टर अब बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है। राज्य सरकार ने डेयरी उद्योग को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। इसी कड़ी में डेयरी निदेशालय और (CII) के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर कर डेयरी ट्रांसफॉर्मेशन प्रोजेक्ट की औपचारिक शुरुआत की गई है। इस साझेदारी को राज्य के डेयरी विकास के लिए एक निर्णायक कदम माना जा रहा है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मत्स्य, डेयरी एवं पशु संसाधन मंत्री ने कहा कि यह रणनीतिक साझेदारी बिहार के डेयरी सेक्टर के लिए मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने बताया कि सरकार का लक्ष्य टिकाऊ डेयरी फार्मिंग को बढ़ावा देना और बाजार आधारित विकास मॉडल को मजबूत करना है, ताकि किसानों की आय में वास्तविक बढ़ोतरी हो सके। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में उत्पादित दूध और दुग्ध उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
सरकार की योजना के तहत राज्य के 24,248 गांवों में डेयरी कोऑपरेटिव सोसाइटी का गठन किया जाएगा और 8,053 पंचायतों में ‘सुधा केंद्र’ स्थापित किए जाएंगे। इससे दूध संग्रह, प्रसंस्करण और विपणन की पूरी व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। यह पहल मुख्यमंत्री के ‘सात निश्चय’ कार्यक्रम के अंतर्गत डेयरी क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
विभाग के सचिव ने बताया कि ‘सात निश्चय-3’ के तहत डेयरी और मत्स्य पालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डेयरी संयंत्रों की क्षमता बढ़ाने, पशुओं के नस्ल सुधार कार्यक्रम को तेज करने और हर पंचायत में पशु सहायकों की नियुक्ति करने की योजना बनाई गई है, जिससे किसानों को तकनीकी सहायता मिल सके और उत्पादन में वृद्धि हो।
उन्होंने यह भी बताया कि फिलहाल बिहार का डेयरी नेटवर्क पूर्वोत्तर भारत और झारखंड तक सीमित है, लेकिन अब इसे विस्तार देकर पूर्वी उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे बड़े बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी है। इससे राज्य के दुग्ध उत्पादों की मांग बढ़ेगी और किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा।
इस परियोजना में की भूमिका मार्केटिंग, ब्रांडिंग और रणनीतिक सहयोग प्रदान करने की होगी, जिससे बिहार के डेयरी उत्पादों को देशभर और वैश्विक स्तर पर पहचान मिल सके। कार्यक्रम में के प्रबंध निदेशक , CII बिहार के उपाध्यक्ष समेत कई अन्य अधिकारियों ने भी इस पहल को राज्य के लिए ऐतिहासिक बताते हुए इसके सफल क्रियान्वयन पर जोर दिया।
कुल मिलाकर, यह पहल बिहार को डेयरी क्षेत्र में एक मजबूत पहचान दिलाने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगी।


