
मधेपुरा/पटना। 08 अप्रैल 2026 : भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर चलते हुए बिहार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (Vigilance Investigation Bureau) ने एक बार फिर खाकी को बेनकाब किया है। मधेपुरा जिले के पुरैनी थाना के प्रभारी थानाध्यक्ष (SI) अनिल कुमार सिंह को मंगलवार की सुबह सात हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया गया। पटना से आई निगरानी विभाग की विशेष टीम ने जाल बिछाकर इस कार्रवाई को अंजाम दिया। जैसे ही हाट बाजार की एक दुकान में रुपयों का लेन-देन हुआ, सादे लिबास में तैनात निगरानी के अधिकारियों ने दरोगा जी की कलाई थाम ली। इस गिरफ्तारी के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
क्या है पूरा मामला: जमीन विवाद की जांच के बदले ‘सौदा’
गिरफ्तार एसआई अनिल कुमार सिंह मूल रूप से गया जिले के वजीरगंज (मझौली गांव) का रहने वाला है। वह पुरैनी थाने में तैनात था और वर्तमान में कार्यवाहक थानाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल रहा था। भ्रष्टाचार की इस कहानी की शुरुआत 20 मार्च को हुई थी:
- पीड़ित की शिकायत: औराय गांव (वार्ड नंबर 4) के रहने वाले वशिष्ठ कुमार विश्वकर्मा ने निगरानी विभाग में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।
- रिश्वत की मांग: वशिष्ठ का एक जमीन विवाद का मामला न्यायालय में लंबित है। इस मामले की जांच और रिपोर्ट तैयार करने के एवज में एसआई अनिल कुमार सिंह ने पैसों की डिमांड की थी।
- सत्यापन और जाल: निगरानी विभाग के डीएसपी आसिफ इकबाल मेहंदी के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई। शिकायत के गुप्त सत्यापन में रिश्वत मांगे जाने की पुष्टि हुई। इसके बाद मंगलवार सुबह 10 बजे गिरफ्तारी का पूरा ‘ब्लूप्रिंट’ तैयार किया गया।
बाजार में ‘ऑपरेशन क्लीन’: रंगेहाथ पकड़े गए दरोगा जी
निगरानी की टीम ने पीड़ित वशिष्ठ कुमार को केमिकल लगे नोटों के साथ तैयार किया। योजना के मुताबिक, थाना के पास ही स्थित बड़ी हाट बाजार की एक दुकान को मुलाकात के लिए चुना गया। जैसे ही वशिष्ठ ने एसआई अनिल कुमार सिंह को रिश्वत के सात हजार रुपये थमाए, आसपास छिपे निगरानी के जवानों ने उसे दबोच लिया।
दरोगा जी के पास से रिश्वत की रकम बरामद की गई और उनके हाथ धुलवाए जाने पर वे गुलाबी हो गए, जो रिश्वत लेने का पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण है। मधेपुरा के एसपी संदीप सिंह ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि कानून सबके लिए बराबर है और विभागीय जांच भी सुनिश्चित की जाएगी।
खाकी पर ‘घूस’ का दाग: गया के रहने वाले हैं अनिल
गिरफ्तार एसआई अनिल कुमार सिंह का पिछला रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। एक जिम्मेदार पद पर रहते हुए सात हजार जैसी छोटी रकम के लिए अपनी वर्दी और इज्जत दांव पर लगाने की इस घटना ने पुलिस की छवि को गहरा धक्का पहुँचाया है। निगरानी की टीम कागजी कार्यवाही पूरी करने के बाद आरोपी एसआई को अपने साथ पटना ले गई है, जहाँ उन्हें निगरानी की विशेष अदालत में पेश किया जाएगा।
भ्रष्टाचार के खिलाफ बढ़ता प्रहार
मधेपुरा में हुई यह कार्रवाई उन भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो जनता के काम के बदले अपनी जेब गरम करने की ताक में रहते हैं। निगरानी विभाग की सक्रियता ने आम लोगों में विश्वास जगाया है कि अगर वे हिम्मत दिखाएं, तो बड़े से बड़ा ‘साहब’ भी सलाखों के पीछे पहुँच सकता है।
जमीन विवाद जैसे मामलों में पुलिस का हस्तक्षेप अक्सर भ्रष्टाचार की जड़ बनता है। ऐसे में पुरैनी की यह घटना सिस्टम में व्याप्त गहरी बीमारी का एक छोटा सा नमूना है। अब देखना यह है कि न्यायालय से अनिल कुमार सिंह को क्या सजा मिलती है।


