200 करोड़ के मनी लॉन्ड्रिंग केस में को जमानत, कोर्ट ने रखीं सख्त शर्तें

नई दिल्ली, 7 अप्रैल 2026: 200 करोड़ रुपये के चर्चित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कथित ठग सुकेश चंद्रशेखर को दिल्ली की एक अदालत से राहत मिली है। कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी है, लेकिन इसके साथ ही कई कड़ी शर्तें भी लागू की गई हैं।

अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि किसी व्यक्ति को लंबे समय तक बिना उचित कारण जेल में रखना उसके मौलिक अधिकारों और त्वरित सुनवाई के अधिकार का उल्लंघन है।

जमानत के साथ रखी गई ये शर्तें
कोर्ट ने सुकेश चंद्रशेखर को 5 लाख रुपये के मुचलके और इतनी ही जमानत राशि पर रिहा करने का आदेश दिया है।

साथ ही अदालत ने कुछ अहम शर्तें भी लगाई हैं:

  • गवाहों से संपर्क या उन्हें प्रभावित नहीं करेंगे
  • जांच अधिकारी को अपना पता और मोबाइल नंबर देना होगा
  • पासपोर्ट जमा करना होगा
  • बिना अनुमति देश छोड़कर नहीं जा सकेंगे

इन शर्तों का उद्देश्य जांच प्रक्रिया को प्रभावित होने से रोकना है।

क्या है पूरा मामला?
यह मामला 200 करोड़ रुपये की कथित रंगदारी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है। आरोप है कि अवैध तरीके से प्राप्त धन को वैध बनाने के लिए इसका इस्तेमाल किया गया।

यह केस तमिलनाडु के चर्चित ‘टू लीव्स’ चुनाव चिन्ह घोटाले से भी जुड़ा बताया जाता है, जिसमें कथित तौर पर चुनाव आयोग के अधिकारी को रिश्वत देने की कोशिश की गई थी।

इस पूरे मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा की जा रही है।

जमानत के बाद भी जेल से बाहर नहीं आएंगे
हालांकि इस मामले में जमानत मिलने के बावजूद सुकेश चंद्रशेखर फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे।

दरअसल, उनके खिलाफ कुल 31 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से 26 में उन्हें पहले ही जमानत मिल चुकी है, लेकिन अभी भी कुछ मामले लंबित हैं।

जब तक बाकी मामलों में भी राहत नहीं मिलती, तब तक उनकी रिहाई संभव नहीं है।

कोर्ट की टिप्पणी बनी चर्चा का विषय
सुनवाई के दौरान अदालत की यह टिप्पणी कि “बिना वजह लंबे समय तक जेल में रखना व्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है” कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बन गई है।

इसे न्यायिक प्रक्रिया में संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सुकेश चंद्रशेखर को इस मामले में भले ही जमानत मिल गई हो, लेकिन उनकी कानूनी मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। कई मामलों में सुनवाई जारी है, जिससे साफ है कि आगे का रास्ता अभी भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

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