
मथुरा (वृंदावन), 7 अप्रैल 2026: उत्तर प्रदेश के वृंदावन में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक ने समाज, संस्कृति और गौसंरक्षण को लेकर कई महत्वपूर्ण विचार साझा किए। उनके संबोधन ने धार्मिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा को तेज कर दिया है।
धार्मिक माहौल में दिया संबोधन
वृंदावन स्थित मलूक पीठ गौशाला में आयोजित 452वें जयंती महोत्सव में मोहन भागवत शामिल हुए। इस दौरान योग गुरु समेत कई संत और श्रद्धालु मौजूद रहे।
कार्यक्रम में पहुंचकर भागवत ने पूजा-अर्चना की और आश्रम के शांत एवं आध्यात्मिक वातावरण की सराहना की। उन्होंने कहा कि यहां का माहौल इतना शांत है कि बोलने की इच्छा भी कम हो जाती है।
‘भारत दुनिया की आत्मा है’—भागवत
अपने संबोधन में भागवत ने भारत की वैश्विक भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि भारत केवल एक देश नहीं, बल्कि दुनिया की आत्मा है।
उन्होंने कहा कि जब तक भारत अपने मूल्यों और संस्कृति के साथ खड़ा रहेगा, तब तक दुनिया में संतुलन बना रहेगा। उनके अनुसार, आज विश्व भटकाव की स्थिति में है क्योंकि उसने अपनी मूल पहचान को खो दिया है।
गौसंरक्षण पर दिया जोर
गौसंरक्षण के मुद्दे पर बोलते हुए भागवत ने कहा कि केवल कानून बनाने से समस्या का समाधान नहीं होगा।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि जब समाज खुद गौभक्त बन जाएगा, तब गौहत्या स्वतः रुक जाएगी। इसके लिए समाज में जागरूकता और जनभावना का निर्माण जरूरी है।
उन्होंने यह भी माना कि सरकारें इस दिशा में प्रयास करती हैं, लेकिन कई व्यावहारिक चुनौतियां सामने आती हैं। ऐसे में समाज का सहयोग अनिवार्य है।
राम मंदिर का दिया उदाहरण
भागवत ने अपने संबोधन में राम मंदिर निर्माण का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि जब तक जनभावना मजबूत नहीं थी, तब तक समाधान नहीं निकल पाया।
लेकिन जैसे ही समाज में व्यापक समर्थन बना, रास्ता साफ हो गया। उन्होंने कहा कि गौसंरक्षण के मुद्दे पर भी यदि इसी तरह जनमत तैयार हो जाए, तो सकारात्मक परिणाम सामने आ सकते हैं।
संत समाज और संघ मिलकर लाएंगे बदलाव
भागवत ने कहा कि संत समाज और RSS मिलकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।
उन्होंने कहा कि संत समाज मार्गदर्शन देगा और संघ उनके साथ मिलकर समाज को सही दिशा देने का काम करेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले समय में भारत ‘विश्व गुरु’ के रूप में उभरेगा।
वृंदावन में दिए गए मोहन भागवत के इस बयान ने सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर नई बहस को जन्म दिया है। गौसंरक्षण से लेकर भारत की वैश्विक भूमिका तक, उनके विचारों ने एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया है, जो आने वाले समय में चर्चा का विषय बना रहेगा।


