पीयर थाना में घूसखोरी का वीडियो वायरल: अपर थानेदार सस्पेंड, SSP ने दिखाई सख्ती

मुजफ्फरपुर: बिहार में पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मुजफ्फरपुर जिले के पीयर थाना में तैनात एक अपर थानेदार का रिश्वत लेते वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुजफ्फरपुर के एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी अधिकारी को निलंबित कर दिया है।

दलाल के जरिए हो रही थी वसूली
मिली जानकारी के अनुसार, पूरा मामला एक पुराने केस से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि केस में राहत दिलाने के नाम पर एक व्यक्ति से पैसे की मांग की गई थी। इस काम के लिए थाने से जुड़े एक कथित दलाल का इस्तेमाल किया जा रहा था, जो पीड़ित पर लगातार पैसे देने का दबाव बना रहा था।

पीड़ित ने बताया कि वह इस दबाव से इतना परेशान हो गया कि उसे पैसे का इंतजाम करने के लिए कर्ज तक लेना पड़ा। हालांकि, उसने इस पूरे भ्रष्टाचार के खेल को उजागर करने की ठान ली।

कैमरे में कैद हुआ रिश्वत का खेल
जब पीड़ित पैसे देने के लिए आरोपी अधिकारी के आवास पर पहुंचा, तो उसके साथ मौजूद एक व्यक्ति ने मोबाइल से पूरी घटना का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। वायरल वीडियो में कथित तौर पर दलाल के माध्यम से 5000 रुपये लेते हुए दृश्य सामने आए हैं।

बताया जा रहा है कि यह रकम संबंधित सब-इंस्पेक्टर और वर्तमान अपर थानेदार अभिनंदन कुमार तक पहुंचाई जा रही थी। वीडियो सामने आने के बाद मामला तेजी से फैल गया और पुलिस महकमे में हलचल मच गई।

पहले भी विवादों में रहा पीयर थाना
यह कोई पहला मामला नहीं है जब पीयर थाना सुर्खियों में आया हो। इससे पहले भी यहां मारपीट और दुर्व्यवहार के आरोपों को लेकर कार्रवाई हो चुकी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि थाना परिसर में दलालों का दखल बढ़ गया है और बिना पैसे के कोई काम नहीं होता।

SSP का सख्त रुख, तत्काल सस्पेंशन
मामले के सामने आते ही मुजफ्फरपुर के एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने जांच के आदेश दिए। प्रारंभिक जांच में वीडियो को गंभीरता से लेते हुए आरोपी अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

एसएसपी ने स्पष्ट कहा कि पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार के लिए कोई जगह नहीं है और जो भी कर्मचारी विभाग की छवि खराब करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जांच जारी, आगे और कार्रवाई संभव
फिलहाल पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस मामले में और कौन-कौन लोग शामिल हैं और दलालों का नेटवर्क कितना बड़ा है।

खाकी की साख पर फिर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर पुलिस व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर सरकार पारदर्शिता और जवाबदेही की बात करती है, वहीं दूसरी ओर ऐसे मामले जमीनी हकीकत को उजागर करते हैं।

अब देखना होगा कि पुलिस विभाग इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करता है और क्या वाकई भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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