भागलपुर में कर्ज की बलि चढ़ा एक और आशियाना: टोटो चालक बिट्टू ने फंदे से लगाई मौत की छलांग, चोरी और लोन के बीच उलझकर रह गई जिंदगी

भागलपुर। सिल्क सिटी भागलपुर के बरारी थाना क्षेत्र में रोजी-रोटी की जद्दोजहद और आर्थिक तंगी ने एक हंसते-खेलते परिवार की नींव हिला दी है। बरारी के पश्चिम टोला निवासी 30 वर्षीय युवक बिट्टू कुमार ने कर्ज के बढ़ते बोझ और मानसिक दबाव के आगे घुटने टेकते हुए मौत को गले लगा लिया। सोमवार की सुबह जब मोहल्ले के लोग जगे, तो उनके सामने एक ऐसी खबर थी जिसने गरीबी और मजबूरी के उस कड़वे सच को उजागर कर दिया, जो अक्सर बंद कमरों में सिसकता रह जाता है। बिट्टू का शव घर की छत पर बने एक कमरे में एस्बेस्टस के हुक से लटका पाया गया। इस घटना ने न केवल बरारी बल्कि पूरे शहर के उन छोटे कामगारों के बीच सन्नाटा फैला दिया है, जो हर दिन लोन की किश्तों और जरूरतों के बीच जंग लड़ते हैं।

​बिट्टू की मौत केवल एक व्यक्ति का अंत नहीं है, बल्कि यह उस संघर्ष की हार है जो एक टोटो चालक अपने परिवार को बेहतर जिंदगी देने के लिए कर रहा था। घटना की सूचना मिलते ही बरारी थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और शव को पोस्टमार्टम के लिए मायागंज अस्पताल भेजा।

​रविवार की वह मनहूस रात और सन्नाटे में चीखती खामोशी

​घटनाक्रम के अनुसार, रविवार की रात पश्चिम टोला स्थित बिट्टू के घर में सब कुछ सामान्य लग रहा था। मृतक के भाई रंजन कुमार यादव ने मायागंज अस्पताल में पुलिस के समक्ष दिए गए अपने आधिकारिक बयान में बताया कि रात का खाना खाने के बाद परिवार के सभी सदस्य अपने-अपने कमरों में सोने चले गए थे। बिट्टू अक्सर घर की छत पर बने एक अलग कमरे में सोता था। उस रात भी वह खाना खाने के बाद ऊपर चला गया।

​देर रात करीब दो से तीन बजे के बीच, जब बिट्टू की पत्नी मेघा अपने पति के पास ऊपर वाले कमरे में पहुंची, तो उसकी आंखों के सामने वह मंजर था जिसे कोई भी सुहागिन सपने में भी नहीं देखना चाहेगी। बिट्टू का शरीर रस्सी के फंदे के सहारे लटका हुआ था। मेघा की चीख सुनकर नीचे सो रहे भाई रंजन और पिता बुलो सहित अन्य परिजन दौड़कर ऊपर पहुंचे। आनन-फानन में फंदे को काटकर बिट्टू को नीचे उतारा गया और उम्मीद की एक क्षीण किरण लेकर परिजन उसे मायागंज अस्पताल लेकर भागे। लेकिन वहां मौजूद डॉक्टरों ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों की उस एक घोषणा ने परिवार के भविष्य पर अंधेरा छा दिया।

​चोरी गया टोटो और लोन का जानलेवा जंजाल

​बिट्टू की मौत के पीछे की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम दर्दनाक नहीं है। मृतक की पत्नी मेघा ने रोते हुए पुलिस और स्थानीय लोगों को बताया कि उनके पति की परेशानी का मुख्य कारण ‘टोटो’ था। कुछ महीने पहले बिट्टू का टोटो चोरी हो गया था, जो उनके परिवार की आय का एकमात्र जरिया था। टोटो चोरी होने के बाद बिट्टू पूरी तरह टूट गया था, लेकिन परिवार की जिम्मेदारी और दो बच्चों के पेट पालने की मजबूरी में उसने हार नहीं मानी और बरारी थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने के बाद कर्ज लेकर दूसरा टोटो खरीदा।

​यहीं से परेशानियों का नया दौर शुरू हुआ। दूसरा टोटो लोन पर लिया गया था, जिसकी मासिक किश्तें (ईएमआई) समय पर चुकाना बिट्टू के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा था। दिन भर टोटो चलाने के बाद भी इतनी कमाई नहीं हो पाती थी कि घर का खर्च और बैंक का कर्ज दोनों साथ-साथ चल सकें। पिछले कुछ समय से कई किश्तें बकाया हो गई थीं, जिसे लेकर बिट्टू मानसिक रूप से काफी परेशान रहने लगा था। उसे डर था कि कहीं बैंक वाले उसका यह टोटो भी न खींच ले जाएं। चोरी की मार और फिर कर्ज की फांस ने उसे उस मोड़ पर खड़ा कर दिया जहां उसे मौत ही एकमात्र रास्ता नजर आई।

​”जल्दी ऊपर आना”… पत्नी की आंखों में अधूरा रह गया वादा

​मेघा ने बताया कि रविवार की रात बिट्टू ने बहुत ही शांत भाव से खाना मांगा था। खाना खाने के बाद उसने मेघा से कहा था कि वह काम निपटाकर जल्दी ऊपर कमरे में आ जाए। मेघा के अनुसार, घर के कामों और बच्चों की वजह से उसे ऊपर जाने में थोड़ी देरी हो गई और इसी बीच उसकी आंख भी लग गई। जब वह काफी देर बाद ऊपर पहुंची, तो पाया कि बिट्टू ने मेज (टेबल) के सहारे चढ़कर एस्बेस्टस की छत में लगे लोहे के हुक से फंदा लगाकर अपनी जान दे दी थी।

​पत्नी को इस बात का गहरा मलाल है कि यदि वह समय पर ऊपर पहुंच जाती, तो शायद अपने पति को इस आत्मघाती कदम को उठाने से रोक पाती। कमरे के भीतर का दृश्य यह बयां कर रहा था कि बिट्टू ने बहुत ही सुनियोजित तरीके से इस घटना को अंजाम दिया। वहां कोई सुसाइड नोट तो नहीं मिला, लेकिन कमरे में बिखरी गरीबी और टोटो के कागजात उसकी बेबसी की कहानी खुद-ब-खुद कह रहे थे।

​पिता का बयान: मानसिक सेहत और दो मासूमों का भविष्य

​बिट्टू के पिता बुलो ने पुलिस को बताया कि टोटो चोरी होने और कर्ज बढ़ने के बाद से उनके बेटे की दिमागी हालत भी कुछ ठीक नहीं रह रही थी। वह अक्सर गुमसुम रहता था और किसी से ज्यादा बात नहीं करता था। पिता का कहना है कि आर्थिक तंगी ने उसे भीतर से खोखला कर दिया था। बिट्टू अपने पीछे दो छोटे बच्चे छोड़ गया है, जिनके सिर से अब पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया है।

​मोहल्ले के लोगों का कहना है कि बिट्टू एक सीधा-सादा युवक था। उसे उम्मीद थी कि टोटो चलाकर वह अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिला पाएगा, लेकिन ईएमआई के बोझ ने उसे इतना दबा दिया कि उसकी हिम्मत जवाब दे गई। भागलपुर जैसे शहरों में जहां टोटो चालकों की संख्या तेजी से बढ़ी है, वहां उनकी कमाई और बैंकों के लोन का दबाव एक बड़ी सामाजिक समस्या बनता जा रहा है।

​पुलिसिया कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया

​सोमवार को पुलिस ने बिट्टू के शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया। बरारी थाना पुलिस ने इस मामले में यूडी केस (अप्राकृतिक मृत्यु) दर्ज किया है। भाई रंजन कुमार यादव और पत्नी मेघा के बयानों को दर्ज कर लिया गया है। परिजनों ने फिलहाल इस घटना को लेकर किसी भी व्यक्ति विशेष पर कोई आरोप नहीं लगाया है। पुलिस का कहना है कि प्राथमिक तौर पर यह मामला आर्थिक तंगी के कारण की गई आत्महत्या का ही लग रहा है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि हो पाएगी।

​बरारी इलाके में इस घटना के बाद से मातम का माहौल है। पश्चिम टोला के निवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि मृतक के परिवार और मासूम बच्चों की स्थिति को देखते हुए उन्हें कुछ सरकारी सहायता प्रदान की जाए। दो मासूम बच्चों और एक बेसहारा पत्नी के लिए अब आगे का सफर पहाड़ जैसा कठिन होने वाला है, क्योंकि घर का इकलौता कमाने वाला सदस्य अब इस दुनिया में नहीं रहा। बिट्टू की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या विकास की दौड़ में छोटे कामगारों को कर्ज के इस मकड़जाल से बचाने के लिए हमारे पास कोई ठोस सुरक्षा तंत्र है?

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