किशनगंज के पूर्व एसडीपीओ गौतम कुमार सस्पेंड, ईओयू की पूछताछ में बेनामी संपत्तियों के ‘साम्राज्य’ का खुलासा

34 साल की सर्विस में सीमाई जिलों का मोह और करोड़ों की दौलत; ईओयू ने खंगाले राज, अब महिला मित्रों और करीबियों के नाम पर दर्ज भूखंडों की बारी

पटना। बिहार में भ्रष्टाचार के विरुद्ध चल रहे जीरो टॉलरेंस अभियान के तहत एक और बड़े पुलिस अधिकारी पर कानूनी और प्रशासनिक गाज गिरी है। राज्य सरकार ने किशनगंज के पूर्व एसडीपीओ गौतम कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। अकूत बेनामी संपत्तियां अर्जित करने और आय से अधिक संपत्ति के गंभीर आरोपों में घिरे गौतम कुमार पर अब विभागीय कार्यवाही भी संचालित की जाएगी। हालांकि, गृह विभाग ने प्रशासनिक गोपनीयता बरतते हुए फिलहाल उनके निलंबन से जुड़ी आधिकारिक अधिसूचना को सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन पुलिस मुख्यालय के सूत्रों ने इसकी पुष्टि कर दी है।

​यह कार्रवाई उस वक्त सामने आई है जब आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने इस पुलिस अधिकारी के खिलाफ शिकंजा पूरी तरह कस दिया है। सोमवार को पटना स्थित ईओयू के मुख्यालय में गौतम कुमार को तलब किया गया था, जहां जांच टीम ने उनसे लगभग पांच घंटे तक कड़ी पूछताछ की। यह पूरा मामला केवल एक अधिकारी के भ्रष्टाचार की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है जहां तीन दशकों से अधिक की सेवा में एक लोक सेवक ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल धन उगाही के लिए किया।

​पांच घंटे की पूछताछ और ‘खराब सेहत’ का बहाना

​सोमवार की दोपहर जब गौतम कुमार ईओयू कार्यालय पहुंचे, तो जांच अधिकारियों ने सवालों की लंबी फेहरिस्त उनके सामने रख दी। ईओयू ने उनके स्वयं, उनकी पत्नी, परिजनों और विशेष रूप से उनकी महिला मित्रों के नाम पर खरीदी गई संपत्तियों के स्रोत को लेकर सवाल दागे। जांच टीम यह जानना चाहती थी कि एक सरकारी वेतन पर काम करने वाले अधिकारी ने ढाई दर्जन से अधिक भूखंडों (प्लॉट) की खरीद के लिए करोड़ों रुपये कहां से जुटाए।

​सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान गौतम कुमार का रवैया असहयोगपूर्ण रहा। उन्होंने अधिकांश सवालों के जवाब या तो बहुत ही सतही दिए या फिर ‘याद नहीं है’ कहकर टालने की कोशिश की। जब जांच अधिकारियों ने संपत्तियों के दस्तावेजों के साथ उन्हें घेरा, तो उन्होंने बार-बार अपनी खराब तबीयत का हवाला दिया और पूछताछ को टालने का प्रयास किया। ईओयू ने उनके बयानों को रिकॉर्ड कर लिया है और अब दी गई जानकारियों का दोबारा सत्यापन किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि सत्यापन के बाद उन्हें दोबारा नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।

​सीमाओं के पार तक फैला है काली कमाई का निवेश

​ईओयू की अब तक की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। गौतम कुमार के विरुद्ध 31 मार्च को आय से करीब 60 फीसदी अधिक संपत्ति अर्जित करने का मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद एक अप्रैल को उनके पटना, पूर्णिया और किशनगंज स्थित आधा दर्जन ठिकानों पर छापेमारी की गई थी। इस छापेमारी में केवल जमीन के कागजात ही नहीं, बल्कि विलासिता के अन्य सामान भी मिले हैं।

​जांच में पता चला है कि गौतम कुमार ने केवल बिहार के पटना और पूर्णिया में ही नहीं, बल्कि दिल्ली-एनसीआर, पश्चिम बंगाल और पड़ोसी देश नेपाल में भी बड़े पैमाने पर निवेश कर रखा है। उनके पास से थार और क्रेटा जैसी तीन महंगी गाड़ियां, लाखों रुपये के सोने के आभूषण और अंतरराष्ट्रीय ब्रांड की कीमती घड़ियां बरामद हुई हैं। ईओयू की टीम अब उन कड़ियों को जोड़ रही है कि किस तरह काली कमाई के पैसे को इन विलासितापूर्ण वस्तुओं और अंतरराष्ट्रीय निवेश में बदला गया।

​दो गोपनीय मोबाइल नंबर खोलेंगे अवैध कारोबार के राज

​इस पूरे प्रकरण में डिजिटल साक्ष्य सबसे महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकते हैं। पूर्णिया और किशनगंज में तलाशी के दौरान ईओयू की टीम के हाथ दो ऐसे मोबाइल नंबर लगे हैं, जो कथित तौर पर गौतम कुमार के नाम पर नहीं, बल्कि किसी दूसरे व्यक्ति के नाम से आवंटित कराए गए थे। संभावना जताई जा रही है कि इन गोपनीय नंबरों का उपयोग वे अपने ‘अवैध सिंडिकेट’ और माफियाओं से संपर्क साधने के लिए करते थे।

​ईओयू की तकनीकी टीम इन नंबरों के कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (सीडीआर) और लोकेशन हिस्ट्री को खंगाल रही है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि ये नंबर उन सफेदपोशों और बिचौलियों के नाम भी उजागर कर सकते हैं, जो गौतम कुमार के इस भ्रष्टाचार के साम्राज्य को खाद-पानी दे रहे थे। यह भी जांचा जा रहा है कि इन नंबरों के जरिए नेपाल और पश्चिम बंगाल के किन लोगों से उनकी नियमित बातचीत होती थी।

​34 साल की सेवा और सीमाई जिलों का ‘विशेष अनुराग’

​गौतम कुमार के सेवाकाल पर नजर डालें तो एक संदिग्ध पैटर्न साफ नजर आता है। ईओयू ने उनसे यह तीखा सवाल भी पूछा कि उनके 34 वर्षों के कार्यकाल में उनका अधिकांश पदस्थापन बिहार के सीमाई जिलों में ही क्यों रहा? पूर्णिया, किशनगंज और अररिया जैसे जिलों में उनकी बार-बार होने वाली पोस्टिंग को लेकर जांच टीम संदेह में है।

​क्या इन जिलों में पोस्टिंग के लिए उन्होंने किसी राजनीतिक रसूख या ‘सफेदपोश’ संरक्षकों का सहारा लिया? सीमाई जिलों में तस्करी, अवैध उत्खनन और भू-माफियाओं के साथ उनके कथित संबंधों को लेकर भी पूछताछ की गई। जांच टीम को संदेह है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में होने वाली अवैध गतिविधियों को संरक्षण देने के बदले उन्हें बड़ी रकम मिलती थी, जिसे उन्होंने बेनामी संपत्तियों में निवेश किया।

​जांच का बढ़ता दायरा: अब रडार पर अन्य अधिकारी

​गौतम कुमार के निलंबन और पूछताछ के बाद अब ईओयू की जांच का दायरा अन्य विभागों तक भी फैल गया है। इसी कड़ी में मंगलवार को सहरसा के डीआरडीए निदेशक वैभव कुमार की पेशी ईओयू कार्यालय में होनी है। भ्रष्टाचार के इस नेटवर्क में और कितने अधिकारी और सफेदपोश शामिल हैं, ईओयू इसकी गहराई से पड़ताल कर रही है।

​गौतम कुमार के मामले में ईओयू की टीम अब उनकी महिला मित्रों और करीबियों के बैंक खातों की भी जांच करने की तैयारी में है। जांच टीम का मानना है कि सीधे तौर पर अपने नाम से संपत्ति खरीदने के बजाय, उन्होंने दूसरों के नाम पर निवेश कर कानून की आंखों में धूल झोंकने की कोशिश की है। फिलहाल, किशनगंज के इस पूर्व एसडीपीओ पर हुआ यह प्रहार बिहार पुलिस के उन अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है जो वर्दी की आड़ में भ्रष्टाचार की नींव पर अपना महल खड़ा कर रहे हैं। आने वाले दिनों में ईओयू की रिपोर्ट के आधार पर इस मामले में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां और संपत्तियों की जब्ती संभव है।

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