
1.63 लाख सिलेंडरों का भारी बैकलाग
पटना। बिहार की राजधानी पटना में घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडरों के अवैध व्यावसायिक उपयोग और गैस आपूर्ति की गंभीर किल्लत को लेकर जिला प्रशासन और आपूर्ति विभाग ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। मंगलवार, 7 अप्रैल 2026 को शहर के विभिन्न इलाकों में चलाए गए एक बड़े जांच अभियान के दौरान 16 अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की गई, जिसमें दो प्रमुख होटलों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के साथ-साथ बड़ी संख्या में घरेलू गैस सिलेंडर जब्त किए गए हैं। एक ओर जहां व्यावसायिक प्रतिष्ठान सस्ते ईंधन के लालच में घरेलू उपभोक्ताओं के हक पर डाका डाल रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पटना के सवा लाख से अधिक परिवार अपने बुक किए गए सिलेंडरों के लिए हफ्तों से इंतजार कर रहे हैं।
प्रशासन की इस कार्रवाई ने उन होटल और रेस्टोरेंट संचालकों के बीच हड़कंप मचा दिया है जो नियमों को ताक पर रखकर घरेलू सिलेंडरों का उपयोग धड़ल्ले से कर रहे थे। आपूर्ति विभाग की टीमों ने सोमवार को हुई इस कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि घरेलू ईंधन का व्यावसायिक इस्तेमाल न केवल एक कानूनी अपराध है, बल्कि यह बाजार में कृत्रिम कमी पैदा करने का एक बड़ा कारण भी बन रहा है।
व्यावसायिक दुरुपयोग पर नकेल: 16 ठिकानों पर छापेमारी और सख्त कानूनी कार्रवाई
पटना के जिलाधिकारी और आपूर्ति विभाग के निर्देश पर गठित विशेष टीमों ने सोमवार को शहर के विभिन्न कोनों में औचक निरीक्षण किया। इस अभियान के तहत कुल 16 जगहों पर छापेमारी की गई। जांच का दायरा केवल होटलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संदेह के घेरे में आई छह गैस एजेंसियों के ठिकानों पर भी दबिश दी गई। छापेमारी के दौरान टीम ने पाया कि होटल और रेस्टोरेंट में व्यावसायिक नीले सिलेंडरों के बजाय घरेलू लाल सिलेंडरों का उपयोग खाना पकाने के लिए किया जा रहा था।
इस गंभीर उल्लंघन को देखते हुए प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो होटलों पर नामजद प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया। छापेमारी के क्रम में कुल 13 घरेलू गैस सिलेंडरों को मौके से जब्त किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि ये सिलेंडर उन एजेंसियों से अवैध रूप से प्राप्त किए गए थे, जिनकी मिलीभगत की भी जांच की जा रही है। पटना में घरेलू गैस के दुरुपयोग को रोकने के लिए पिछले कुछ हफ्तों से चलाए जा रहे इस विशेष अभियान के तहत अब तक कुल 22 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं और प्रशासन ने विभिन्न स्थानों से 121 सिलेंडरों को अपने कब्जे में लिया है।
गैस एजेंसियों की भूमिका और वितरण प्रणाली पर खड़े होते सवाल
इस छापेमारी अभियान की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि इसमें छह गैस एजेंसियों को भी शामिल किया गया। आपूर्ति विभाग को लगातार यह शिकायतें मिल रही थीं कि कुछ एजेंसियां घरेलू उपभोक्ताओं को समय पर सिलेंडर उपलब्ध कराने के बजाय उन्हें ऊंचे दामों पर होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को बेच रही हैं। जब आम उपभोक्ता अपने रिफिल के लिए बुकिंग करता है, तो उसे स्टॉक की कमी या लंबी प्रतीक्षा सूची का हवाला देकर टाल दिया जाता है, जबकि व्यावसायिक इकाइयों को आसानी से घरेलू सिलेंडर पहुंचा दिए जाते हैं।
जांच अधिकारियों के अनुसार, एजेंसियों के स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक स्टॉक में कई विसंगतियां पाई गई हैं। जब्त किए गए 13 सिलेंडरों की सीरीज और नंबरों के माध्यम से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वे किस एजेंसी को आवंटित किए गए थे और वे उपभोक्ताओं तक पहुंचने के बजाय होटलों तक कैसे पहुंच गए। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि किसी भी एजेंसी की सीधी संलिप्तता पाई जाती है, तो उनका लाइसेंस रद्द करने की अनुशंसा पेट्रोलियम मंत्रालय और संबंधित तेल कंपनियों से की जाएगी।
बैकलाग का भारी अंबार: उपभोक्ताओं की बढ़ती मुसीबतें और तेल कंपनियों का प्रदर्शन
छापेमारी और कालाबाजारी की खबरों के बीच पटना में गैस उपभोक्ताओं के लिए सबसे चिंताजनक खबर बैकलाग के आंकड़ों से आई है। 6 अप्रैल 2026 तक के आधिकारिक डेटा के अनुसार, पटना जिले में कुल 1.63 लाख (1,63,412) उपभोक्ताओं के गैस सिलेंडर की आपूर्ति लंबित है। यानी इतने परिवारों ने अपनी गैस बुक करा ली है, लेकिन कंपनियों की ओर से उन्हें अभी तक डिलीवरी नहीं मिली है।
इस बैकलाग में सबसे बदतर स्थिति इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड (IOCL) की देखी जा रही है। कुल 1.63 लाख के बैकलाग में अकेले आईओसीएल के उपभोक्ताओं की संख्या 1,17,546 है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि इंडेन के ग्राहकों को पटना में सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। दूसरी ओर, भारत पेट्रोलियम (BPCL) के पास 32,739 सिलेंडरों का बैकलाग है, जबकि हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) के 13,127 घरेलू गैस उपभोक्ताओं को अपनी बारी का इंतजार है।
आपूर्ति की यह कमी केवल उत्पादन का मुद्दा नहीं है, बल्कि वितरण श्रृंखला में आ रही बाधाओं और कालाबाजारी की ओर भी संकेत करती है। सवा लाख से अधिक उपभोक्ताओं का इंतजार इस बात का प्रमाण है कि बाजार में सिलेंडरों की उपलब्धता को लेकर तेल कंपनियों और एजेंसियों के बीच तालमेल की भारी कमी है।
कालाबाजारी और बैकलाग के बीच का गहरा संबंध
विशेषज्ञों और प्रशासनिक सूत्रों का मानना है कि होटलों में हो रही छापेमारी और बैकलाग के आंकड़ों का आपस में गहरा संबंध है। व्यावसायिक सिलेंडरों की कीमत घरेलू सिलेंडरों की तुलना में काफी अधिक होती है, जिससे बचने के लिए होटल संचालक घरेलू सिलेंडरों का अवैध स्टॉक जमा करते हैं। जब हजारों की संख्या में घरेलू सिलेंडर अवैध रूप से व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की ओर मोड़ दिए जाते हैं, तो स्वाभाविक रूप से सामान्य उपभोक्ताओं के लिए सिलेंडरों की कमी हो जाती है, जो अंततः बैकलाग के रूप में सामने आती है।
आईओसीएल के सवा लाख के करीब बैकलाग ने शहर के मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के सामने संकट खड़ा कर दिया है। कई इलाकों में उपभोक्ताओं को 15 से 20 दिनों की प्रतीक्षा के बाद भी गैस नहीं मिल पा रही है। प्रशासन ने तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ एक आपातकालीन बैठक बुलाई है ताकि इस लंबित सूची को जल्द से जल्द समाप्त किया जा सके और आपूर्ति व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाया जा सके।
भविष्य की रणनीति और निगरानी तंत्र
पटना जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि घरेलू गैस की चोरी और दुरुपयोग पर कार्रवाई केवल अस्थायी नहीं होगी। आपूर्ति विभाग ने एक विशेष निगरानी प्रकोष्ठ का गठन किया है जो नियमित रूप से संदिग्ध होटलों, ढाबों और रेस्टोरेंटों की जांच करेगा। साथ ही, गैस एजेंसियों के गोदामों पर अचानक निरीक्षण का सिलसिला भी जारी रहेगा।
विभाग ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि उनके आसपास कहीं भी घरेलू गैस सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग हो रहा है या यदि कोई एजेंसी सिलेंडर की डिलीवरी में जानबूझकर देरी कर रही है, तो उसकी सूचना तुरंत आपूर्ति कार्यालय को दें। प्रशासन का लक्ष्य आने वाले दस दिनों के भीतर आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल के लंबित बैकलाग को कम से कम 50 प्रतिशत तक लाने का है, ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके। फिलहाल, 16 ठिकानों पर हुई इस छापेमारी ने कालाबाजारी करने वालों के बीच यह कड़ा संदेश दिया है कि नियमों की अनदेखी महंगी पड़ सकती है।


