मालदा मंडल में पं. माखनलाल चतुर्वेदी जयंती पर साहित्यिक समारोह, हिन्दी के प्रचार-प्रसार पर जोर

मालदा : पूर्व रेलवे के मालदा मंडल में हिन्दी साहित्य के महान साहित्यकार, पत्रकार और कवि पं. माखनलाल चतुर्वेदी की जयंती पर एक भव्य और गरिमामय समारोह का आयोजन किया गया। राजभाषा विभाग के तत्वावधान में आयोजित यह कार्यक्रम मंडल के “मंदार सभाकक्ष” में संपन्न हुआ, जिसकी अध्यक्षता मंडल रेल प्रबंधक मनीष कुमार गुप्ता ने की।

पुष्पांजलि के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत मंडल रेल प्रबंधक द्वारा पं. माखनलाल चतुर्वेदी के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी महान साहित्यकार के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके साहित्यिक और राष्ट्रीय योगदान को याद किया।

हिन्दी के संवर्धन पर विशेष जोर

अपने संबोधन में मंडल रेल प्रबंधक मनीष कुमार गुप्ता ने हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार और साहित्यिक परंपरा को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल भाषा के विकास में सहायक होते हैं, बल्कि कर्मचारियों में सांस्कृतिक चेतना भी जागृत करते हैं।

विशिष्ट अतिथियों ने किया व्यक्तित्व-कृतित्व का विश्लेषण

कार्यक्रम में आमंत्रित वक्ताओं—साहेबगंज से श्याम लोचन और न्यू फरक्का से निर्मल ठाकुर—ने पं. माखनलाल चतुर्वेदी के जीवन, साहित्य और पत्रकारिता पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि चतुर्वेदी जी हिन्दी साहित्य के ऐसे स्तंभ हैं, जिनकी रचनाएँ समाज में जागरूकता और राष्ट्रभक्ति की भावना को प्रबल करती हैं। वर्तमान समय में भी उनके विचार और लेखन अत्यंत प्रासंगिक हैं।

स्थानांतरण पर अधिकारी का सम्मान

इस अवसर पर राजभाषा परिवार की ओर से अपर मुख्य राजभाषा अधिकारी सह अपर मंडल रेल प्रबंधक शिव कुमार प्रसाद के स्थानांतरण के उपलक्ष्य में उन्हें सम्मानित किया गया। मंडल रेल प्रबंधक ने उन्हें सम्मान पत्र देकर उनके योगदान की सराहना की।

सांस्कृतिक माहौल में संपन्न हुआ कार्यक्रम

कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ अनुवादक विद्यासागर राम ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन कनिष्ठ अनुवादक इंद्र ज्योति राय द्वारा प्रस्तुत किया गया।

समारोह में बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे, जिससे कार्यक्रम का माहौल साहित्यिक और सांस्कृतिक रंग में रंगा नजर आया।

साहित्य और संस्कृति से जुड़ाव का संदेश

इस आयोजन के माध्यम से पूर्व रेलवे ने यह संदेश दिया कि कार्यस्थल पर भी भाषा, साहित्य और संस्कृति को महत्व देना जरूरी है। ऐसे कार्यक्रम कर्मचारियों को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ हिन्दी के विकास को भी नई दिशा देते हैं।

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