कीटनाशक अवशेष बना बड़ा खतरा: सुरक्षित और टिकाऊ खेती की ओर बढ़ने की अपील

पटना | 4 अप्रैल बिहार में खेती-किसानी के बदलते स्वरूप के बीच रासायनिक कीटनाशकों का बढ़ता उपयोग अब चिंता का विषय बनता जा रहा है। राज्य के कृषि मंत्री राम कृपाल यादव ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि कीटनाशकों का अंधाधुंध इस्तेमाल न केवल फसलों की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए भी गंभीर खतरा बनता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो खाद्य पदार्थों में कीटनाशक अवशेष (पेस्टिसाइड रेजिड्यू) की मात्रा खतरनाक स्तर तक पहुंच सकती है, जिससे कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

खाद्य श्रृंखला में बढ़ रहा जहर

कृषि मंत्री ने बताया कि कीटनाशकों का अत्यधिक उपयोग केवल खेतों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह खाद्य श्रृंखला के जरिए मानव शरीर तक पहुंचता है। अनाज, फल और सब्जियों में मौजूद रासायनिक अवशेष धीरे-धीरे शरीर में जमा होते हैं, जो लंबे समय में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं।

इतना ही नहीं, इसका असर पशु-आधारित उत्पादों जैसे दूध, दही और मांस पर भी पड़ रहा है। पशु जब ऐसे चारे का सेवन करते हैं जिसमें रासायनिक अवशेष मौजूद होते हैं, तो वह उनके उत्पादों की गुणवत्ता को भी प्रभावित करता है।

किसानों के लिए चेतावनी और सुझाव

मंत्री ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि कीटनाशकों का उपयोग केवल अनुशंसित मात्रा में ही करें। अधिक मात्रा में उपयोग करने से कीट तो पूरी तरह नियंत्रित नहीं होते, बल्कि उनकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ जाती है, जिससे भविष्य में समस्या और गंभीर हो सकती है।

उन्होंने किसानों को निम्नलिखित उपाय अपनाने की सलाह दी—

  • फसल चक्र (Crop Rotation) अपनाएं
  • रोग एवं कीट-प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें
  • खेत में कीटों के प्राकृतिक शत्रुओं का संरक्षण करें
  • एकीकृत कीट एवं रोग प्रबंधन (IPM) को प्राथमिकता दें
  • फेरोमोन ट्रैप और लाईट ट्रैप जैसे वैज्ञानिक उपायों का उपयोग करें

जैविक विकल्पों पर जोर

रासायनिक कीटनाशकों के विकल्प के रूप में मंत्री ने जैविक कीटनाशकों को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि नीम तेल, जैविक फफूंदनाशी और जीवाणुनाशी जैसे विकल्प न केवल पर्यावरण के लिए सुरक्षित हैं, बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी इनका कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता।

साथ ही, उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि यदि रासायनिक कीटनाशकों का उपयोग आवश्यक हो, तो उसे अंतिम विकल्प के रूप में ही अपनाएं। अत्यधिक विषैले कीटनाशकों (लाल, पीले और नीले लेबल वाले) के बजाय अपेक्षाकृत सुरक्षित हरे त्रिकोण लेबल वाले उत्पादों का चयन करना बेहतर रहेगा।

टिकाऊ खेती ही भविष्य

कृषि मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि किसान पारंपरिक और टिकाऊ खेती की ओर लौटें। सुरक्षित, संतुलित और पर्यावरण के अनुकूल खेती अपनाकर न केवल फसल की गुणवत्ता बढ़ाई जा सकती है, बल्कि बाजार में बेहतर कीमत भी प्राप्त की जा सकती है।

बढ़ते कीटनाशक उपयोग के बीच यह चेतावनी किसानों और आम लोगों दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। यदि अभी से जागरूकता और सही तकनीकों को अपनाया जाए, तो न केवल खेती को सुरक्षित बनाया जा सकता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ और स्वच्छ पर्यावरण भी सुनिश्चित किया जा सकता है।

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