
मोकामा/पटना। बिहार की राजधानी पटना से सटे मोकामा का घोसवरी इलाका गुरुवार की शाम एक बड़ी हिंसक वारदात का गवाह बना, जिसने न केवल सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी बल्कि सामाजिक सौहार्द के मंच को रणक्षेत्र में तब्दील कर दिया। बाबा चौहारमल महोत्सव के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व राज्यसभा सांसद ब्रह्मदेव आनंद पासवान पर हुए जानलेवा हमले के मामले में अब कानूनी शिकंजा कसना शुरू हो गया है। 4 अप्रैल 2026 की दोपहर तक मिली जानकारी के अनुसार, इस हमले को लेकर घोसवरी थाने में कुल 31 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पूर्व सांसद के लिखित आवेदन पर पुलिस ने 11 नामजद और 20 अज्ञात हमलावरों को आरोपी बनाया है। यह घटना उस समय हुई जब हजारों की संख्या में श्रद्धालु और अनुयायी अपने आराध्य बाबा चौहारमल की गौरव गाथा सुनने के लिए एकत्रित हुए थे।
चाराडीह का अखाड़ा: जब भाषण के बीच मंच पर चढ़े हथियारबंद शिकारी
घटनाक्रम की शुरुआत गुरुवार को घोसवरी के चाराडीह में आयोजित बाबा चौहारमल राष्ट्रीय महोत्सव के दौरान हुई। यह महोत्सव क्षेत्र के लोगों के लिए केवल एक मेला नहीं, बल्कि स्वाभिमान और पहचान का प्रतीक माना जाता है। पूर्व सांसद ब्रह्मदेव आनंद पासवान मंच से जनसभा को संबोधित कर रहे थे और सामाजिक एकता पर अपना व्याख्यान दे रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तभी अचानक भीड़ के बीच से कुछ लोग शोर मचाते हुए मंच की ओर बढ़े।
इन लोगों के हाथों में अवैध हथियार थे और वे सीधे मंच पर चढ़ गए। पूर्व सांसद ने पुलिस को दिए अपने बयान में बताया कि हमलावरों ने उनके साथ न केवल अभद्र व्यवहार किया, बल्कि मारपीट भी शुरू कर दी। मंच पर मौजूद अन्य समिति सदस्य और पूर्व सांसद के समर्थक जब बचाव के लिए आगे आए, तो उनके साथ भी बर्बरता की गई। हमलावरों का दुस्साहस इतना था कि उन्होंने सरेआम जान से मारने की धमकी दी और काफी देर तक मंच पर उत्पात मचाते रहे।
नामजद आरोपियों की सूची: मोकामा से नालंदा तक के तार
पूर्व सांसद ब्रह्मदेव आनंद पासवान ने अपनी प्राथमिकी में जिन 11 लोगों को नामजद किया है, उनके तार मोकामा के विभिन्न गांवों से लेकर पड़ोसी जिला नालंदा तक जुड़े हुए हैं। पुलिस ने जिन मुख्य आरोपियों पर मुकदमा दर्ज किया है, उनमें शामिल हैं:
- राजकुमार पासवान (गोरहाड़ी)
- मिथिलेश पासवान (कन्हाईपुर)
- राजुराज पासवान (सरमेरा, नालंदा)
- सोहन कुमार (सकसोहरा)
- सत्यप्रकाश पासवान (सकसोहरा)
- वीरमणि पासवान (ईशानगर)
- ब्रजेश पासवान (नालंदा)
- अरुण पासवान (मालपुर)
- बटोरन पासवान (सरमेरा, नालंदा)
- पप्पू पासवान (बिंद)
- दयानन्द पासवान (पंडारक)
इनके अलावा 20 अन्य अज्ञात लोगों पर भी भीड़ का फायदा उठाकर हमला करने और दंगा भड़काने का आरोप है। पुलिस अब इन सभी नामों के आपराधिक इतिहास और उनके आपसी संबंधों की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि यह हमला अचानक हुआ या इसके पीछे कोई सोची-समझी साजिश थी।
सुरक्षा में भारी चूक और महोत्सव का अपमान (विशेष विश्लेषण)
द वॉयस ऑफ बिहार के विशेष विश्लेषण के अनुसार, बाबा चौहारमल महोत्सव जैसे राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में, जहाँ एक पूर्व सांसद और कई गणमान्य लोग मौजूद हों, वहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होना प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करता है।
- खुफिया तंत्र की विफलता: जब 11 नामजद आरोपी अलग-अलग जिलों और गांवों से हथियार लेकर एक ही जगह जमा हुए, तो क्या स्थानीय पुलिस को इसकी भनक तक नहीं लगी?
- मंच की सुरक्षा: एक पूर्व राज्यसभा सांसद का मंच सुरक्षा घेरे में होना चाहिए था। हमलावरों का सीधे मंच पर चढ़ जाना यह बताता है कि वहां तैनात बल या तो पर्याप्त नहीं था या फिर पूरी तरह से लापरवाह था।
- सामाजिक असर: बाबा चौहारमल पासवान समुदाय के लिए एक महान महापुरुष और लोक देवता हैं। उनके नाम पर आयोजित महोत्सव में हिंसा होना न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करता है, बल्कि आने वाले समय में जातीय तनाव का कारण भी बन सकता है।
जान से मारने की धमकी और दहशत का माहौल
ब्रह्मदेव आनंद पासवान ने अपनी शिकायत में इस बात पर विशेष जोर दिया है कि हमलावरों का मुख्य उद्देश्य केवल कार्यक्रम में व्यवधान डालना नहीं था, बल्कि वे उन्हें शारीरिक रूप से गंभीर नुकसान पहुँचाना चाहते थे। हथियार लहराते हुए मंच पर चढ़ना और बार-बार जान से मारने की बात कहना यह दर्शाता है कि यह हमला किसी पुराने विवाद या रंजिश का परिणाम हो सकता है।
हमले के दौरान महोत्सव में भगदड़ मच गई थी, जिससे कई बुजुर्गों और बच्चों को भी चोटें आईं। महोत्सव की आयोजन समिति के सदस्यों का कहना है कि वे वर्षों से इस कार्यक्रम का सफल आयोजन करते आ रहे हैं, लेकिन ऐसी हिंसा की कल्पना कभी नहीं की गई थी। इस घटना के बाद चाराडीह और आसपास के गांवों में पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है ताकि स्थिति पर नियंत्रण रखा जा सके।
पुलिस की कार्रवाई: छापेमारी और साक्ष्य संकलन
घोसवरी थाना प्रभारी ने बताया कि प्राथमिकी दर्ज होने के तुरंत बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। नामजद आरोपियों के ठिकानों पर देर रात छापेमारी की गई, हालांकि अभी तक किसी की गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस महोत्सव के दौरान बनाए गए वीडियो फुटेज और वहां मौजूद लोगों के मोबाइल कैमरों से मिले साक्ष्यों को खंगाल रही है ताकि अज्ञात 20 आरोपियों की भी पहचान की जा सके।
पुलिस अधीक्षक (पटना ग्रामीण) ने भी इस मामले में संज्ञान लिया है और स्पष्ट किया है कि कानून को हाथ में लेने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस अब उन हथियारों की भी तलाश कर रही है जिनका जिक्र प्राथमिकी में किया गया है।
एक सवालिया निशान व्यवस्था पर
निष्पक्ष रूप से देखा जाए तो, ब्रह्मदेव आनंद पासवान पर हुआ यह हमला बिहार के राजनीतिक और सामाजिक परिवेश में बढ़ती असहिष्णुता का उदाहरण है। किसी महोत्सव के मंच पर चढ़कर एक पूर्व जनप्रतिनिधि के साथ मारपीट करना यह संदेश देता है कि अपराधियों के मन में कानून का डर खत्म हो चुका है। हालांकि, पुलिस की सक्रियता अब इस बात पर निर्भर करेगी कि वे कितनी जल्दी इन 31 लोगों को सलाखों के पीछे पहुँचाते हैं।
दूसरी ओर, इस घटना ने महोत्सव की पवित्रता को भी ठेस पहुँचाई है। आने वाले समय में ऐसे आयोजनों में सुरक्षा मानकों को लेकर नए दिशा-निर्देशों की आवश्यकता महसूस की जा रही है ताकि भविष्य में किसी भी जनप्रतिनिधि या आम नागरिक के साथ ऐसी अभद्रता न हो सके।
न्याय की प्रतीक्षा में मोकामा
ब्रह्मदेव आनंद पासवान पर हुए हमले ने मोकामा की राजनीति में उबाल ला दिया है। 31 लोगों पर मामला दर्ज होना केवल एक कानूनी प्रक्रिया है, लेकिन असली न्याय तब होगा जब उन हाथों को बेनकाब किया जाएगा जिन्होंने इन हमलावरों को चाराडीह के मंच तक भेजा था। 4 अप्रैल 2026 की शाम तक घोसवरी पुलिस की टीमें छापेमारी जारी रखे हुए हैं और पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।
द वॉयस ऑफ बिहार की टीम इस पूरी स्थिति पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। हमारा मानना है कि आस्था के इन केंद्रों पर हिंसा के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। ब्रह्मदेव आनंद पासवान और उनके समर्थकों को अब पुलिस की कार्रवाई से इंसाफ की उम्मीद है।


