​गोपालगंज में ‘हाई-टेक’ वाहन चोर गिरोह का महा-उद्भेदन: गंडक किनारे चल रही थी फर्जी कागजात की फैक्ट्री, स्कॉर्पियो-बोलेरो समेत 8 वाहन और 50 फर्जी नंबर प्लेट बरामद

गोपालगंज/महम्मदपुर। बिहार के गोपालगंज जिले की पुलिस ने अंतरजिला वाहन चोर गिरोह के एक ऐसे नेटवर्क का पर्दाफाश किया है जो न केवल गाड़ियां चुराता था, बल्कि उन्हें पूरी तरह ‘लीगल’ (वैध) दिखाने के लिए फर्जी कागजात तैयार करने की पूरी फैक्ट्री चला रहा था। महम्मदपुर थाना क्षेत्र में हुई इस बड़ी कार्रवाई में पुलिस ने 5 शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से भारी मात्रा में चोरी के वाहन, लैपटॉप, प्रिंटर, गैस कटर और दर्जनों फर्जी नंबर प्लेट बरामद हुए हैं। 1 अप्रैल 2026 की दोपहर को शुरू हुई यह कार्रवाई 2 अप्रैल तक चली छापेमारी में तब्दील हो गई, जिससे उत्तर बिहार के वाहन चोर सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है।

बगीश मोड़ पर फिल्मी चेज: भागती स्कॉर्पियो और पुलिस की घेराबंदी

​घटनाक्रम की शुरुआत 1 अप्रैल को महम्मदपुर थाना क्षेत्र के बगीश मोड़ पर हुई। पुलिस बल यहाँ नियमित वाहन जांच अभियान चला रहा था। इसी दौरान महम्मदपुर की ओर से एक सफेद रंग की स्कॉर्पियो बिना नंबर प्लेट के अत्यंत तेज गति से आती हुई दिखाई दी। पुलिस ने जब हाथ देकर रुकने का इशारा किया, तो चालक ने गति और बढ़ा दी और पुलिस टीम को चकमा देकर भागने का प्रयास किया।

​पुलिस टीम ने बिना समय गंवाए सरकारी वाहन से उस संदिग्ध स्कॉर्पियो का पीछा करना शुरू किया। कुछ किलोमीटर तक चली इस ‘फिल्मी चेज’ के बाद अपराधी खुद को घिरता देख नियंत्रण खो बैठे। चालक ने चलती गाड़ी रोकी और अंधेरे व झाड़ियों का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गया, लेकिन गाड़ी की पिछली सीट पर बैठे दो अन्य व्यक्तियों को पुलिस ने चारों तरफ से घेराबंदी कर दबोच लिया।

जितेन्द्र और तबरेज ने खोला राज: चोरी से लेकर ‘पंचिंग’ तक का खेल

​पकड़े गए दोनों व्यक्तियों की पहचान जितेन्द्र कुमार (लडौली, सिधवलिया) और तबरेज आलम (मछरगाँवा, पूर्वी चम्पारण) के रूप में हुई। जब पुलिस ने स्कॉर्पियो के कागजात मांगे, तो दोनों बगले झाँकने लगे। सघन पूछताछ के बाद जो सच सामने आया, उसने पुलिस के भी होश उड़ा दिए। जितेन्द्र और तबरेज ने स्वीकार किया कि उनका एक बड़ा संगठित गिरोह है जो बिहार के विभिन्न जिलों से एसयूवी (SUV) और दोपहिया वाहनों की चोरी करता है।

​गिरोह का काम करने का तरीका बेहद पेशेवर था। वे केवल गाड़ी नहीं चुराते थे, बल्कि उनके पास एक पूरी तकनीकी टीम थी जो चोरी की गई गाड़ियों का रंग बदल देती थी। सबसे खतरनाक बात यह थी कि वे गैस कटर के जरिए इंजन नंबर और चेसिस नंबर को मिटाकर उस पर फर्जी नंबरों की ‘पंचिंग’ कर देते थे। इसके बाद लैपटॉप और प्रिंटर की मदद से गाड़ी के हूबहू असली जैसे दिखने वाले फर्जी कागजात और स्मार्ट कार्ड तैयार किए जाते थे।

विशेष टीम का गठन और अंतरजिला छापेमारी

​मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक गोपालगंज ने तुरंत एक विशेष छापेमारी टीम का गठन किया। इसमें अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (सदर-02), महम्मदपुर थानाध्यक्ष, सिधवलिया थानाध्यक्ष, मांझागढ़ थानाध्यक्ष और तकनीकी शाखा के विशेषज्ञों को शामिल किया गया। गिरफ्तार अभियुक्तों की निशानदेही पर पुलिस ने पूर्वी चम्पारण, मोतिहारी और मुजफ्फरपुर में एक साथ दबिश दी।

​इस छापेमारी में गिरोह के तीन अन्य सदस्य पकड़े गए:

  1. मुन्ना कुमार यादव (पूर्वी चम्पारण): यह गिरोह का ‘टेक्निकल एक्सपर्ट’ था, जिसका मुख्य काम चोरी की गाड़ियों के लिए फर्जी रजिस्ट्रेशन पेपर और स्मार्ट कार्ड तैयार करना था।
  2. लक्ष्मण राय (मुजफ्फरपुर) और मनोज राय (मोतिहारी): इन दोनों का मुख्य काम चोरी की गई और ‘री-मॉडल’ की गई गाड़ियों के लिए ग्राहक ढूंढना और उनका क्रय-विक्रय करना था।

जितेन्द्र का गैरेज: जहाँ बदल जाती थी गाड़ियों की पहचान

​सबसे बड़ी सफलता तब मिली जब पुलिस ने गिरफ्तार जितेन्द्र कुमार के गैरेज पर छापा मारा। यहाँ पुलिस को 3 बोलेरो और 3 मोटरसाइकिलें खड़ी मिलीं, जिनकी पहचान मिटाने का काम चल रहा था। गैरेज से ही पुलिस ने लैपटॉप, 3 प्रिंटर, इनवर्टर, गैस कटर और सबसे चौंकाने वाली चीज—50 फर्जी नंबर प्लेट—बरामद की। इन नंबर प्लेटों पर बिहार और अन्य राज्यों के नंबर पहले से ही लिखे हुए थे, ताकि किसी भी गाड़ी को तुरंत नया नंबर दिया जा सके।

​इसके अलावा, मुजफ्फरपुर के सुरेश कुमार (जो फिलहाल फरार है) के पास से भी एक अन्य चोरी का वाहन बरामद किया गया है। पुलिस ने कुल मिलाकर 1 स्कॉर्पियो, 4 बोलेरो और 3 मोटरसाइकिलें जब्त की हैं।

बरामद सामग्री का विस्तृत विवरण: हाई-टेक अपराध के सबूत

​पुलिस ने गिरोह के ठिकानों से जो जखीरा बरामद किया है, वह इनके संगठित अपराध की पुष्टि करता है:

  • वाहन: 01 स्कॉर्पियो, 04 बोलेरो, 03 मोटरसाइकिल।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स: 01 लैपटॉप, 03 प्रिंटर, 01 इनवर्टर, 01 बैटरी, 04 मोबाइल फोन।
  • दस्तावेज: 09 फर्जी स्मार्ट कार्ड।
  • उपकरण: 01 गैस कटर (इंजन/चेसिस नंबर बदलने के लिए), 50 फर्जी नंबर प्लेट।

उत्तर बिहार में वाहन चोरी का बढ़ता जाल (विशेष विश्लेषण)

​द वॉयस ऑफ बिहार के विशेष विश्लेषण के अनुसार, गोपालगंज और पूर्वी चम्पारण का यह इलाका वाहन चोरों के लिए एक ‘ट्रांजिट पॉइंट’ बनता जा रहा है। यहाँ से चोरी की गई गाड़ियां अक्सर नेपाल या बिहार के सुदूर देहाती इलाकों में खपा दी जाती हैं।

  1. फर्जीवाड़े की गंभीरता: लैपटॉप और प्रिंटर के जरिए 09 स्मार्ट कार्ड का बरामद होना यह बताता है कि यह गिरोह परिवहन विभाग (RTO) के समानांतर अपनी व्यवस्था चला रहा था। आम आदमी के लिए असली और फर्जी कागजात में फर्क करना नामुमकिन था।
  2. गैस कटर का इस्तेमाल: इंजन और चेसिस नंबर बदलना एक जटिल प्रक्रिया है, जिसे ये अपराधी बेहद सफाई से अंजाम दे रहे थे। इससे पुलिस की ‘वाहन’ (VAHAN) एप जैसी तकनीक भी चकमा खा सकती है।
  3. सिंडिकेट की पहुंच: मोतिहारी, मुजफ्फरपुर और गोपालगंज के अपराधियों का एक साथ काम करना यह दर्शाता है कि इनका नेटवर्क पूरे उत्तर बिहार में फैला हुआ है।

प्रशासनिक सतर्कता और आगामी कार्रवाई

​महम्मदपुर थाना में इस संबंध में कांड संख्या-128/26 दर्ज की गई है। पुलिस अब गिरोह के अन्य फरार सदस्यों, जैसे मुजफ्फरपुर के सुरेश कुमार, की गिरफ्तारी के लिए मानवीय और तकनीकी साक्ष्यों (CDR और लोकेशन) के आधार पर छापेमारी कर रही है। पकड़े गए सभी 5 अभियुक्तों का पुराना आपराधिक इतिहास खंगाला जा रहा है ताकि उन पर सीसीए (CCA) जैसी सख्त धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सके।

​पुलिस ने आम जनता से भी अपील की है कि वे पुरानी गाड़ियां खरीदते समय पूरी सावधानी बरतें और केवल कागजात पर भरोसा न कर स्थानीय थाने या परिवहन कार्यालय से भौतिक सत्यापन जरूर कराएं। गोपालगंज पुलिस ने किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी देने के लिए अपना हेल्पलाइन नंबर 9031827299 भी जारी किया है।

पुलिस की जीत और समाज की चुनौती

​गोपालगंज पुलिस की यह कार्रवाई निश्चित रूप से सराहनीय है। बगीश मोड़ पर दिखाई गई मुस्तैदी ने एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश कर दिया। हालांकि, यह घटना एक चिंताजनक पहलू भी उजागर करती है। 50 फर्जी नंबर प्लेट और प्रिंटर का मिलना यह बताता है कि हमारे बीच अपराधी कितने ‘अपडेटेड’ हो चुके हैं।

​प्रशासन को चाहिए कि वे सेकंड-हैंड गाड़ियों के बाजार पर अपनी निगरानी और बढ़ाएं। साथ ही, ग्रामीण इलाकों के गैरेज संचालकों का अनिवार्य पंजीकरण और समय-समय पर उनकी जांच होनी चाहिए ताकि ऐसे गैरेज ‘चोरी की गाड़ियों के ब्यूटी पार्लर’ न बन सकें।

समाधान की दिशा में बढ़ते कदम

​3 अप्रैल 2026 की रात तक महम्मदपुर और गोपालगंज के अन्य थानों में सुरक्षा व्यवस्था सामान्य है, लेकिन पुलिस की टीमें अभी भी फील्ड में हैं। जितेन्द्र, तबरेज, मुन्ना, लक्ष्मण और मनोज की गिरफ्तारी ने कम से कम उत्तर बिहार में सक्रिय एक बड़े गिरोह की कमर तोड़ दी है। यह कार्रवाई उन लोगों के लिए एक बड़ी राहत है जिनकी गाड़ियां हाल के महीनों में चोरी हुई थीं। गोपालगंज पुलिस ने स्पष्ट संदेश दिया है कि अपराध संगठित हो या व्यक्तिगत, कानून के लंबे हाथ उन तक पहुँचकर ही रहेंगे।

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