बिहार में ‘पावर’ का नया कीर्तिमान: बिजली कंपनियों ने 19 हजार करोड़ की कमाई से रचा इतिहास; टैरिफ में बदलाव से आम उपभोक्ताओं की जेब को मिली बड़ी राहत

मशरूम की खेती अब ‘कृषि’ के दायरे में

  • ​बिहार की दोनों प्रमुख बिजली वितरण कंपनियों (NBPDCL और SBPDCL) ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के समापन पर राजस्व संग्रहण के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त करते हुए 19 हजार करोड़ रुपये से अधिक की ऐतिहासिक आय दर्ज की है।
  • ​पिछले वित्तीय वर्ष (2024-25) की तुलना में इस बार राजस्व में 1916 करोड़ रुपये की भारी बढ़त देखी गई है, जो विकास और वित्तीय प्रबंधन की दिशा में 12 प्रतिशत की शानदार छलांग है।
  • ​उत्तर बिहार बिजली वितरण कंपनी (NBPDCL) ने जहाँ 8,866 करोड़ रुपये जुटाए, वहीं दक्षिण बिहार बिजली वितरण कंपनी (SBPDCL) 10,169 करोड़ रुपये के राजस्व के साथ अग्रणी रही।
  • ​नए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ताओं को बड़ी सौगात देते हुए सरकार ने 100 यूनिट से अधिक खपत पर लगने वाले अतिरिक्त स्लैब रेट को समाप्त कर दिया है, जिससे शहरी घरेलू बिजली 1.53 रुपये प्रति यूनिट तक सस्ती होगी।
  • ​सरकारी विभागों से 2200 करोड़ रुपये के केंद्रीकृत भुगतान ने कंपनियों की बैलेंस शीट को मजबूती दी है, साथ ही राजकोष में 2263 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड योगदान देकर बिजली विभाग राज्य का बड़ा आर्थिक स्तंभ बनकर उभरा है।

पटना (द वॉयस ऑफ बिहार)।

अंधेरे से आत्मनिर्भरता तक: बिहार की बिजली कंपनियों का वित्तीय कायाकल्प

बिहार की विकास गाथा में बिजली विभाग ने एक नया और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया है। 31 मार्च 2026 को समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के आंकड़ों ने यह सिद्ध कर दिया है कि बिहार अब केवल बिजली की मांग करने वाला राज्य नहीं, बल्कि एक पेशेवर और आर्थिक रूप से सुदृढ़ ऊर्जा तंत्र वाला प्रदेश बन चुका है। 19 हजार करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व संग्रहण केवल एक सांख्यिकीय उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह राज्य की प्रशासनिक चुस्ती और उपभोक्ताओं के बढ़ते भरोसे का परिणाम है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में शुरू हुई ऊर्जा सुधार की नीतियों ने अब रंग लाना शुरू कर दिया है, जहाँ गुणवत्तापूर्ण आपूर्ति और समय पर बिल भुगतान एक नई संस्कृति के रूप में विकसित हुए हैं।

राजस्व का गणित: उत्तर और दक्षिण बिहार के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा

राजस्व के आंकड़ों का विश्लेषण करें तो दक्षिण बिहार बिजली वितरण कंपनी (SBPDCL) ने 10,169 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित कर अपनी श्रेष्ठता बनाए रखी है। इसके पीछे मुख्य कारण पटना, गया और भागलपुर जैसे बड़े शहरी केंद्रों में स्मार्ट मीटरिंग और सघन राजस्व वसूली अभियान रहे हैं। वहीं, उत्तर बिहार बिजली वितरण कंपनी (NBPDCL) ने भी 8,866 करोड़ रुपये के साथ अपनी वित्तीय स्थिति में बड़ा सुधार किया है। पिछले वर्ष की तुलना में 12 प्रतिशत की यह समेकित वृद्धि बताती है कि ग्रामीण इलाकों में भी अब लोग मुफ्तखोरी की मानसिकता छोड़कर नियमित बिल भुगतान की ओर बढ़ रहे हैं। यह बिजली चोरी के खिलाफ चलाए गए अभियानों और ‘स्मार्ट मीटर’ के सफल क्रियान्वयन की बड़ी जीत है।

सरकारी विभागों की ‘वित्तीय अनुशासन’ ने बदली तस्वीर

अक्सर यह देखा जाता था कि बिजली कंपनियों का बड़ा हिस्सा सरकारी विभागों के बकाये में फंसा रहता था। लेकिन ऊर्जा सचिव मनोज कुमार सिंह के अनुसार, इस बार 2200 करोड़ रुपये का भुगतान सीधे सरकारी विभागों से प्राप्त हुआ है। शिक्षा विभाग, नगर विकास, पंचायती राज, स्वास्थ्य और गृह (पुलिस) जैसे विभागों ने केंद्रीकृत रूप से अपने बकाये का निपटारा किया है। यह प्रशासनिक तालमेल का ही परिणाम है कि वितरण कंपनियों ने राज्य के राजकोष में 2263 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड राजस्व जमा किया है। इसके अलावा, वाणिज्य कर विभाग को विद्युत शुल्क के रूप में 2234 करोड़ और जीएसटी के मद में 29 करोड़ रुपये दिए गए हैं। यह योगदान बिहार की अर्थव्यवस्था को गति देने में सहायक सिद्ध होगा।

नया टैरिफ: आम आदमी के लिए राहत की नई किरण

राजस्व में हुई इस ऐतिहासिक वृद्धि का सीधा लाभ अब उपभोक्ताओं को मिलने जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जो नया टैरिफ लागू किया गया है, वह विशेष रूप से मध्यम वर्ग और शहरी उपभोक्ताओं के लिए राहत भरा है। अब तक 100 यूनिट से अधिक बिजली खर्च करने पर दरें बढ़ जाती थीं, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है। अब सभी यूनिटों का विपत्रीकरण (Billing) न्यूनतम दर पर ही होगा।

​इस निर्णय से होने वाली बचत का विवरण इस प्रकार है:

  • शहरी घरेलू उपभोक्ता: 100 यूनिट से अधिक की खपत पर प्रति यूनिट 1.53 रुपये की सीधी बचत होगी।
  • ग्रामीण गैर-घरेलू उपभोक्ता: इन्हें प्रति यूनिट 0.42 रुपये की राहत मिलेगी।
  • शहरी गैर-घरेलू (व्यावसायिक) उपभोक्ता: इनके बिल में प्रति यूनिट 1.20 रुपये की कमी आएगी। यह सरलीकरण न केवल बिलों में पारदर्शिता लाएगा, बल्कि उन लोगों को भी प्रोत्साहित करेगा जो अधिक खपत के बावजूद समय पर भुगतान करना चाहते हैं।

मशरूम उत्पादन को ‘कृषि’ का दर्जा: किसानों के लिए बड़ा फैसला

कृषि प्रधान बिहार में खेती की लागत कम करने की दिशा में ऊर्जा विभाग ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। अब मशरूम की खेती को पूर्णतः कृषि का दर्जा दे दिया गया है। इसका अर्थ यह है कि मशरूम उत्पादन से जुड़े किसान अब व्यावसायिक दरों के बजाय सस्ती कृषि दरों पर बिजली प्राप्त कर सकेंगे। इससे सूबे के हजारों मशरूम उत्पादकों की लागत में भारी कमी आएगी और वे तकनीकी रूप से उन्नत उपकरणों का उपयोग कर सकेंगे। बिहार जो पहले से ही मशरूम उत्पादन में अग्रणी राज्यों में शामिल है, इस फैसले के बाद इस क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छुएगा।

टीओडी (Time of Day) टैरिफ: स्मार्ट मीटर और बड़े उपभोक्ताओं के लिए अनिवार्य

ऊर्जा के संतुलित उपयोग को बढ़ावा देने के लिए ‘टाइम ऑफ डे’ (टीओडी) टैरिफ को अब 10 किलोवाट से अधिक भार वाले सभी उपभोक्ताओं और सभी स्मार्ट मीटर धारकों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। कृषि उपभोक्ताओं को इससे बाहर रखा गया है। टीओडी टैरिफ का मुख्य उद्देश्य ग्रिड पर पड़ने वाले भार को प्रबंधित करना है। इसके तहत दिन के अलग-अलग समय में बिजली की दरें अलग-अलग होंगी। यदि उपभोक्ता ‘ऑफ-पीक’ ऑवर्स (जब बिजली की मांग कम होती है) में भारी उपकरणों का उपयोग करते हैं, तो उन्हें कम दर पर भुगतान करना होगा। यह व्यवस्था स्मार्ट ग्रिड प्रबंधन की दिशा में एक आधुनिक कदम है।

मंत्री बिजेन्द्र यादव का विजन: “उपभोक्ता का सहयोग ही असली पूंजी”

ऊर्जा एवं योजना विकास मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि यह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दूरदर्शी सोच का परिणाम है। उन्होंने कहा कि बिजली कंपनी का यह कीर्तिमान केवल सरकारी प्रयासों से नहीं, बल्कि जनता के निरंतर सहयोग से संभव हुआ है। उपभोक्ताओं ने 24 घंटे गुणवत्तापूर्ण बिजली की उपलब्धता को देखते हुए अपनी जिम्मेदारी समझी और नियमित बिल भुगतान किया। विभाग अब अपनी सेवाओं को और अधिक हाई-टेक बनाने पर ध्यान दे रहा है ताकि शिकायतों का निवारण क्षण भर में हो सके।

स्मार्ट मीटरिंग: राजस्व वृद्धि का ‘गेम चेंजर’

बिहार में स्मार्ट मीटर लगाने की प्रक्रिया ने राजस्व संग्रहण के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। पहले बिलिंग एरर और मीटर रीडिंग की समस्याओं के कारण बड़ी मात्रा में राजस्व का नुकसान होता था। स्मार्ट मीटर ने न केवल उपभोक्ता को अपने खर्च पर नियंत्रण रखने की शक्ति दी है, बल्कि कंपनियों के लिए ‘कैश फ्लो’ को भी आसान बना दिया है। यही कारण है कि आज बिजली कंपनियां घाटे से उबरकर राज्य के विकास में हजारों करोड़ का योगदान दे रही हैं।

निष्कर्ष: बिहार के उज्ज्वल भविष्य की नई ऊर्जा

बिजली कंपनियों द्वारा 19 हजार करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व जुटाना बिहार के औद्योगिक और सामाजिक विकास की नई नींव है। एक समय था जब बिहार को ‘बिजली संकट’ वाले राज्य के रूप में जाना जाता था, लेकिन आज यह ‘राजस्व अधिशेष’ की ओर बढ़ रहा है। टैरिफ में दी गई राहत यह दर्शाती है कि जब सरकारी संस्थाएं मुनाफे में आती हैं, तो उसका सीधा लाभ जनता तक पहुँचता है। मशरूम खेती को कृषि का दर्जा और टीओडी टैरिफ जैसे प्रयोग आने वाले समय में बिहार के ऊर्जा क्षेत्र को देश के लिए एक रोल मॉडल बनाएंगे।

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