
- बिहार राज्य कर विभाग द्वारा मार्च 2026 के लिए जारी आधिकारिक आंकड़ों में भागलपुर सर्किल-1 ने अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करते हुए राज्य स्तरीय रैंकिंग में दूसरा स्थान प्राप्त किया है।
- लक्ष्य से कहीं अधिक वसूली करते हुए भागलपुर ने निर्धारित 36.56 करोड़ रुपये के मुकाबले 43.26 करोड़ रुपये का राजस्व जुटाया है, जो कुल लक्ष्य का 118.31 प्रतिशत है।
- राज्य का औसत जीएसटी संग्रह जहां 89.46 प्रतिशत पर सिमट गया, वहीं भागलपुर सर्किल-1 ने अपनी विकास दर से पूरे विभाग को अचंभित कर दिया है।
- इस वित्तीय दौड़ में केवल पटना का पाटलिपुत्र सर्किल ही भागलपुर से आगे रहा, जबकि अन्य बड़े औद्योगिक शहर और मंडल पिछड़ गए।
- आईजीएसटी (IGST) कैश के मद में हुई 25.79 करोड़ रुपये की वसूली को इस ऐतिहासिक प्रदर्शन का मुख्य आधार माना जा रहा है।
- भागलपुर सर्किल-1 अब तक कुल 321.41 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त कर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में एक अनिवार्य स्तंभ बनकर उभरा है।
भागलपुर (द वॉयस ऑफ बिहार)।
सिल्क सिटी की नई पहचान: अब व्यापारिक अनुशासन में भी नंबर-1 की ओर अग्रसर
बिहार की आर्थिक राजधानी बनने की होड़ में भागलपुर ने एक ऐसी छलांग लगाई है जिसने पटना के सत्ता गलियारों तक हलचल पैदा कर दी है। मार्च 2026 के समापन के साथ ही बिहार राज्य कर विभाग ने जब सर्किल-वार प्रदर्शन की रिपोर्ट साझा की, तो भागलपुर सर्किल-1 का नाम स्वर्ण अक्षरों में चमक उठा। यह केवल आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि भागलपुर के व्यापारियों के बढ़ते अनुशासन और क्षेत्र में पनप रही नई औद्योगिक चेतना का परिणाम है। 118.31 प्रतिशत की उपलब्धि हासिल करना किसी भी सर्किल के लिए एक सपना होता है, लेकिन भागलपुर ने इसे हकीकत में बदलकर यह संदेश दे दिया है कि ‘अंग जनपद’ अब बिहार के राजस्व का नया ‘पावर हाउस’ है।
आंकड़ों की जुबानी: जब लक्ष्य छोटा पड़ गया और जज्बा बड़ा हो गया
बिहार राज्य कर विभाग ने मार्च महीने के लिए भागलपुर सर्किल-1 को 36.56 करोड़ रुपये की वसूली का एक चुनौतीपूर्ण लक्ष्य दिया था। विभागीय जानकारों का मानना था कि मार्च की क्लोजिंग में बाजार के उतार-चढ़ाव को देखते हुए इस आंकड़े तक पहुंचना एक बड़ी उपलब्धि होगी। लेकिन जब अंतिम रिपोर्ट टेबल पर आई, तो सबको चौंकाते हुए भागलपुर सर्किल-1 ने 43.26 करोड़ रुपये की शानदार वसूली दर्ज कराई। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि यह लक्ष्य से लगभग 7 करोड़ रुपये अधिक है। इस प्रदर्शन के साथ ही भागलपुर सर्किल-1 ने चालू वित्तीय अवधि में अब तक कुल 321.41 करोड़ रुपये का विशाल राजस्व संचित कर लिया है, जो जिले के सर्वांगीण विकास के लिए एक शुभ संकेत है।
पटना बनाम भागलपुर: पाटलिपुत्र सर्किल से कड़ी टक्कर
राजस्व के इस महामुकाबले में भागलपुर ने बिहार के लगभग सभी बड़े सर्किलों को धूल चटा दी है। इस पूरी सूची में एकमात्र पटना का पाटलिपुत्र सर्किल ही ऐसा रहा जो भागलपुर से थोड़ा आगे निकलने में कामयाब रहा। पाटलिपुत्र सर्किल ने 123.80 प्रतिशत की उपलब्धि हासिल कर प्रथम स्थान प्राप्त किया। हालांकि, यदि संसाधनों और व्यापारिक बुनियादी ढांचे की तुलना की जाए, तो भागलपुर की 118.31 प्रतिशत की सफलता पटना के मुकाबले कहीं अधिक प्रभावशाली नजर आती है। भागलपुर ने गया, मुजफ्फरपुर और पूर्णिया जैसे बड़े राजस्व केंद्रों को पीछे छोड़ते हुए दूसरे स्थान पर कब्जा जमाया है, जो सिल्क सिटी के बढ़ते आर्थिक रसूख को दर्शाता है।
आईजीएसटी कैश: वह इंजन जिसने भागलपुर को दिलाई जीत
इस ऐतिहासिक प्रदर्शन के पीछे के तकनीकी कारणों की पड़ताल करें, तो आईजीएसटी (Integrated Goods and Services Tax) कैश का योगदान सबसे महत्वपूर्ण बनकर उभरा है। विभाग ने इस मद में 19.01 करोड़ रुपये का लक्ष्य रखा था, लेकिन भागलपुर के उद्यमियों और व्यापारियों ने अंतरराज्यीय व्यापार में ऐसी सक्रियता दिखाई कि संग्रह 25.79 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। आईजीएसटी कैश में हुई यह ‘ओवर-परफॉर्मेंस’ इस बात का प्रमाण है कि भागलपुर से तैयार होने वाला माल—चाहे वह रेशम हो, कृषि उत्पाद हो या लघु उद्योगों के उत्पाद—अब बिहार की सीमाओं को लांघकर देश के अन्य राज्यों में बड़े पैमाने पर भेजा जा रहा है। जब माल बाहर जाता है, तो टैक्स का फ्लो भी बढ़ता है, और भागलपुर ने इसी गणित को सफलतापूर्वक साध लिया है।
राज्य के औसत से कोसों आगे: पिछड़ते बिहार के बीच भागलपुर का उदय
मार्च 2026 की यह रिपोर्ट बिहार के अन्य हिस्सों के लिए आत्ममंथन का विषय भी है। जहां पूरे राज्य का औसत राजस्व संग्रह लक्ष्य के मुकाबले मात्र 89.46 प्रतिशत ही रहा, वहीं भागलपुर सर्किल-1 ने 118 प्रतिशत से अधिक का प्रदर्शन कर यह दिखा दिया कि सही रणनीति और व्यापारिक सुगमता हो, तो मंदी के दौर में भी रिकॉर्ड बनाया जा सकता है। राज्य के कई ऐसे सर्किल हैं जो 70 से 80 प्रतिशत के आंकड़े को छूने के लिए संघर्ष कर रहे थे, लेकिन भागलपुर ने उन सभी के लिए एक मानक (Benchmark) स्थापित कर दिया है। विभाग के अधिकारियों का मानना है कि भागलपुर की इस सफलता का अध्ययन अन्य सर्किलों में भी ‘बेस्ट प्रैक्टिस’ के रूप में किया जाना चाहिए।
मंडल की आंतरिक तुलना: मुंगेर और भागलपुर सर्किल-2 की स्थिति
भागलपुर प्रभाग के भीतर की बात करें, तो सर्किल-1 का प्रदर्शन अद्वितीय रहा है। प्रभाग के अन्य जिलों और सर्किलों की तुलना में यहाँ की सक्रियता काफी अधिक दिखी। पड़ोसी जिला मुंगेर इस सूची में चौथे स्थान पर रहा, जो एक सराहनीय प्रदर्शन है, लेकिन वह भागलपुर सर्किल-1 के करीब नहीं पहुँच सका। दूसरी ओर, भागलपुर सर्किल-2 और लखीसराय का प्रदर्शन औसत दर्जे का रहा। इन सर्किलों में राजस्व संग्रह लक्ष्य के आसपास ही सिमट गया या थोड़ा पीछे रहा। यह विषमता बताती है कि सर्किल-1 के अधिकार क्षेत्र में आने वाले व्यापारिक प्रतिष्ठानों और वहां के कर प्रशासन के बीच एक बेहतर समन्वय काम कर रहा है।
व्यापारिक अनुशासन या प्रशासनिक मुस्तैदी?
इस सफलता के पीछे दो प्रमुख कारक माने जा रहे हैं। पहला, भागलपुर राज्य कर विभाग के अधिकारियों की मुस्तैदी, जिन्होंने कर चोरी को रोकने के लिए ‘सॉफ्ट मॉनिटरिंग’ के साथ-साथ जागरूकता अभियान चलाए। दूसरा, भागलपुर के व्यापारियों की बदलती मानसिकता। अब व्यापारी पेनाल्टी और कानूनी पछड़ों से बचने के लिए समय पर रिटर्न दाखिल करने और टैक्स भुगतान को प्राथमिकता दे रहे हैं। टैक्स वकीलों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की भूमिका भी यहाँ महत्वपूर्ण रही है, जिन्होंने अंतिम समय की भागदौड़ से बचते हुए राजस्व के फ्लो को बनाए रखा।
अर्थव्यवस्था पर प्रभाव: भागलपुर के लिए इसके क्या मायने हैं?
जीएसटी संग्रह में दूसरे स्थान पर आने का मतलब केवल सरकार की तिजोरी भरना नहीं है। यह इस बात का स्पष्ट संकेतक है कि भागलपुर का बाजार ‘वाइब्रेंट’ है। अधिक जीएसटी का मतलब है अधिक टर्नओवर, और अधिक टर्नओवर का मतलब है क्षेत्र में रोजगार और निवेश के नए अवसर। जब कोई सर्किल राजस्व में अग्रणी होता है, तो राज्य सरकार का ध्यान भी वहां के बुनियादी ढांचे के विकास पर अधिक केंद्रित होता है। उम्मीद की जा रही है कि इस प्रदर्शन के बाद भागलपुर में व्यापारिक सुविधाओं के विस्तार, सड़कों के चौड़ीकरण और नए औद्योगिक क्षेत्रों के निर्माण में तेजी आएगी।
चुनौतियां और भविष्य की राह
दूसरे स्थान पर पहुँचने के बाद अब भागलपुर सर्किल-1 के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस प्रदर्शन को बरकरार रखने की होगी। अप्रैल से शुरू होने वाले नए सत्र में लक्ष्य और भी ऊंचे होंगे। अधिकारियों का कहना है कि वे अब उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेंगे जहां अभी भी राजस्व की संभावनाएं पूरी तरह से नहीं तलाशी गई हैं। विशेष रूप से ई-कॉमर्स और डिजिटल सेवाओं से जुड़े कर संग्रह को और अधिक पारदर्शी बनाने की योजना है। भागलपुर के चेंबर ऑफ कॉमर्स ने भी इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए सरकार से मांग की है कि अधिक टैक्स देने वाले व्यापारियों को पुरस्कृत किया जाए और उनके लिए सुविधाओं में इजाफा हो।
गर्व का क्षण, पर मंजिल अभी दूर है
भागलपुर सर्किल-1 की यह उपलब्धि अंग क्षेत्र के आर्थिक गौरव को पुनः स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। पटना के वर्चस्व को चुनौती देते हुए दूसरे पायदान पर आना कोई छोटी बात नहीं है। यह जीत भागलपुर के हर उस छोटे-बड़े व्यवसायी की है जो ईमानदारी से राष्ट्र निर्माण में अपना योगदान दे रहा है। हालांकि, पाटलिपुत्र सर्किल से पिछड़ना यह याद दिलाता है कि अभी सुधार की गुंजाइश बाकी है। यदि भागलपुर के सिल्क उद्योग और स्थानीय उत्पादों को थोड़ा और सरकारी प्रोत्साहन मिले, तो वह दिन दूर नहीं जब भागलपुर पूरे बिहार में राजस्व संग्रह में ‘शिखर’ पर होगा। फिलहाल, मार्च 2026 की यह रिपोर्ट भागलपुर के नाम एक सुनहरी याद बन गई है।


