
- बिहार के पूर्णिया जिले के कसबा थाना क्षेत्र में एक ऐसी खौफनाक घटना सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं और रिश्तों की मर्यादा को तार-तार कर दिया है।
- कसबा नगर परिषद के वार्ड संख्या-9 स्थित राधा नगर मोहल्ले में मंगलवार की रात एक महिला ने अपने ही पति की धारदार हसुआ से गला रेतकर निर्मम हत्या कर दी।
- हत्या के बाद साक्ष्यों को छिपाने के लिए महिला ने पति के शव को एक बोरे में बंद किया और अपने सहयोगियों की मदद से घर से करीब 30 किलोमीटर दूर अमौर थाना क्षेत्र के पलसा घाट पुल के पास फेंक दिया।
- इस सनसनीखेज वारदात का सबसे चौंकाने वाला पहलू हत्या के बाद का घटनाक्रम रहा, जब आरोपी पत्नी खुद पूर्णिया सेंट्रल जेल के मुख्य गेट पर पहुंची और जेल अधिकारियों से खुद को सलाखों के पीछे डालने की गुहार लगाने लगी।
- पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी महिला को हिरासत में ले लिया है और घटनास्थल से मिले खून के धब्बों व अन्य साक्ष्यों की जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की टीम को बुलाया गया है।
पूर्णिया (द वॉयस ऑफ बिहार)।
राधा नगर की वह काली रात: जब रक्षक ही बन गई भक्षक
पूर्णिया का कसबा इलाका वैसे तो अपनी शांति के लिए जाना जाता है, लेकिन मंगलवार की रात यहां के राधा नगर मोहल्ले में जो कुछ हुआ, उसने पूरे जिले को सुन्न कर दिया है। 45 वर्षीय उमेश सिंह के घर में मंगलवार की रात मौत का तांडव हुआ। पुलिस के अनुसार, उमेश सिंह और उनकी पत्नी सुनीता देवी के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था, जो इतना बढ़ा कि सुनीता ने अपना आपा खो दिया। घर में रखे घास काटने वाले धारदार हसुआ से उसने सोए हुए पति पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। प्रहार इतना घातक था कि उमेश सिंह को संभलने या शोर मचाने का मौका तक नहीं मिला। कुछ ही पलों में कमरे का फर्श खून से लाल हो गया और उमेश की सांसें थम गईं। यह हत्या केवल एक शारीरिक अंत नहीं था, बल्कि उस विश्वास का भी कत्ल था जो एक पति अपनी पत्नी पर करता है।
साक्ष्य मिटाने की ‘सर्जिकल’ साजिश: 30 किलोमीटर का खूनी सफर
हत्या के बाद सुनीता देवी के सिर पर चढ़ा खून का जुनून अब डर में बदलने लगा था। उसने कमरे में फैले खून को देख साक्ष्यों को मिटाने की योजना बनाई। उसने पति के भारी-भरकम शरीर को अकेले ही एक बड़े बोरे में ठूंसा और उसे कसकर बांध दिया। अकेले इस काम को अंजाम देना मुश्किल था, इसलिए पुलिस को शक है कि इसमें उसके सहयोगियों ने भी साथ दिया। इसी संदेह के आधार पर पड़ोसी महेंद्र सिंह को हिरासत में लिया गया है। रात के सन्नाटे में, जब पूरी दुनिया सो रही थी, तब एक मोटरसाइकिल या छोटे वाहन के जरिए उमेश के शव को कसबा से 30 किलोमीटर दूर अमौर थाना क्षेत्र के पलसा घाट पुल के पास ले जाया गया। वहां सुनसान जगह देख शव को सड़क किनारे फेंक दिया गया, ताकि यह किसी दुर्घटना या अज्ञात हत्या का मामला लगे।
सुबह का सूरज और खून से सनी दीवारें: मासूम बेटे का डरावना सच
वारदात का खुलासा बुधवार की सुबह तब हुआ जब मृतक का छोटा बेटा पीयूष कुमार घर पहुंचा। जैसे ही उसने कमरे का दरवाजा खोला, उसकी चीख निकल गई। कमरे के फर्श, दीवारों और यहां तक कि बरामदे पर भी खून के सूखे धब्बे थे। तकिया और बिस्तर भी खून से लथपथ थे, लेकिन उसके पिता उमेश सिंह वहां नहीं थे। घर से पिता का गायब होना और चारों तरफ खून का होना यह बताने के लिए काफी था कि रात में कुछ बहुत बुरा हुआ है। पीयूष के शोर मचाने पर मोहल्ले के लोग जुटे और तुरंत स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने कसबा पुलिस को सूचना दी। घटनास्थल का नजारा इतना वीभत्स था कि देखने वालों की रूह कांप गई।
जेल के दरवाजे पर ‘सरेंडर’ का नाटक या पश्चाताप?
इस मामले का सबसे अजीबोगरीब मोड़ तब आया जब आरोपी सुनीता देवी अचानक पूर्णिया सेंट्रल जेल के गेट पर जा खड़ी हुई। वहां तैनात जेल कर्मियों से उसने कहा, “मैंने अपने पति को मार डाला है, मुझे अभी के अभी जेल के अंदर बंद कर दो।” जेल प्रहरियों के लिए यह स्थिति अकल्पनीय थी क्योंकि कोई भी अपराधी सीधे जेल नहीं आता। उन्होंने तुरंत इसकी सूचना स्थानीय के. हाट थाने को दी। पुलिस की एक टीम मौके पर पहुंची और उसे अपनी गाड़ी में बिठाया। के. हाट थाने में भी सुनीता ने अपना जुर्म कबूल करते हुए बार-बार खुद को जेल भेजने की रट लगाए रखी। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि हत्या के बाद बढ़ते मानसिक दबाव और पकड़े जाने के डर ने उसे इस असामान्य व्यवहार के लिए मजबूर किया होगा।
अमौर में मिला बोरे बंद शव: शिनाख्त और प्रशासनिक सक्रियता
एक तरफ सुनीता सरेंडर कर रही थी, दूसरी तरफ अमौर थाना पुलिस को पलसा घाट के पास एक संदिग्ध बोरा पड़ा होने की सूचना मिली। जब पुलिस ने बोरा खोला, तो उसमें से एक अधेड़ व्यक्ति की लाश मिली जिसकी गर्दन पर गहरे जख्म थे। कसबा पुलिस और परिजनों को वहां बुलाया गया, जिन्होंने मृतक की पहचान उमेश सिंह के रूप में की। सदर एसडीपीओ-2 राजेश कुमार और कसबा थानाध्यक्ष ज्ञान रंजन ने घटनास्थल का सघन मुआयना किया। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या सुनीता ने यह हत्या अकेले की या इसमें कोई पेशेवर अपराधी भी शामिल था। 30 किलोमीटर तक लाश को ले जाना बिना किसी मजबूत सहारे के संभव नहीं लगता, इसलिए पुलिस अब उन रास्तों के सीसीटीवी फुटेज भी खंगाल रही है।
एफएसएल (FSL) की टीम और वैज्ञानिक साक्ष्य: सुरागों की तलाश
मामले की गंभीरता और जघन्य प्रकृति को देखते हुए भागलपुर से एफएसएल की विशेष टीम को बुलाया गया। विशेषज्ञों ने राधा नगर स्थित घर से खून के नमूने, फिंगरप्रिंट्स और हत्या में इस्तेमाल किए गए संभावित हथियारों की जांच की। पुलिस को अंदेशा है कि कमरे की सफाई करने की कोशिश की गई थी, लेकिन खून के कुछ ऐसे धब्बे रह गए जो अब सबसे बड़े गवाह बन गए हैं। मृतक के पड़ोसी महेंद्र सिंह को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की जा रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, महेंद्र और सुनीता के बीच के संबंधों की भी जांच की जा रही है, जिससे इस हत्याकांड की असली वजह सामने आ सके।
बिखर गया परिवार: मासूम बच्चों का क्या होगा?
उमेष सिंह की मौत और मां के जेल जाने के बाद उनके बच्चों के सिर से माता-पिता दोनों का साया उठ गया है। पीयूष और उसके भाई-बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि पति-पत्नी के बीच अक्सर छोटे-मोटे विवाद होते थे, लेकिन बात कत्ल तक पहुंच जाएगी, यह किसी ने नहीं सोचा था। राधा नगर में अब मातम पसरा है और लोग इस खौफनाक वारदात की चर्चा करते थक नहीं रहे हैं। समाज में बढ़ती असहनशीलता और पारिवारिक विघटन का यह एक बेहद डरावना उदाहरण है, जहाँ एक छत के नीचे रहने वाले जीवनसाथी ही एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गए।
पुलिसिया कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया
कसबा थानाध्यक्ष ने बताया कि चूंकि शव अमौर थाना क्षेत्र से बरामद हुआ है, इसलिए प्राथमिक विधिक प्रक्रिया वहां से भी जुड़ी होगी, लेकिन मुख्य केस कसबा थाने में दर्ज किया जा रहा है। पुलिस यह सुनिश्चित कर रही है कि सुनीता देवी को कड़ी से कड़ी सजा मिले। हत्या में प्रयुक्त हसुआ को बरामद करने के लिए छापेमारी की जा रही है। एसडीपीओ राजेश कुमार ने कहा कि यह एक संवेदनशील मामला है और हम ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट’ में ट्रायल की अनुशंसा करेंगे ताकि पीड़ित परिवार को जल्द न्याय मिल सके।
निष्कर्ष: नैतिकता की बलि और व्यवस्था की चुनौती
पूर्णिया का यह ‘हसुआ हत्याकांड’ केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज के भीतर बढ़ती हिंसक प्रवृत्तियों का आईना है। 30 किलोमीटर तक शव को बोरे में ढोकर ले जाना और फिर खुद जेल पहुंचकर सरेंडर करना, एक विक्षिप्त मानसिकता को दर्शाता है। कानून तो अपना काम करेगा ही, लेकिन यह घटना पीछे कई सवाल छोड़ गई है। क्या पति-पत्नी के पवित्र रिश्ते में संवाद की कमी इतनी बढ़ गई है कि अब उसका अंत केवल श्मशान या जेल की सलाखों के पीछे ही होगा? द वॉयस ऑफ बिहार की टीम इस हत्याकांड की हर बारीकी पर नजर बनाए रखेगी।


