वीरपुर बराज के पास कोसी ने बदली धारा, सरकार अलर्ट; पायलट चैनल बनाकर नदी को मुख्य धारा में लाने की कवायद तेज

पूर्वी तटबंध पर बढ़ा दबाव, 2.5 किमी लंबा चैनल निर्माण युद्धस्तर पर जारी; मानसून से पहले काम पूरा करने का लक्ष्य

बिहार की ‘बाढ़ की त्रासदी’ के रूप में पहचान रखने वाली कोसी नदी ने एक बार फिर अपना रुख बदल लिया है। वीरपुर बराज के निकट नदी की धारा बदलने से पूर्वी तटबंध पर भारी दबाव बन गया है, जिससे प्रशासन और जल संसाधन विभाग की चिंता बढ़ गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने तत्काल कदम उठाते हुए नदी को उसकी मूल धारा में वापस लाने की योजना पर तेजी से काम शुरू कर दिया है।

जल संसाधन विभाग द्वारा बराज के डाउनस्ट्रीम हिस्से में पायलट चैनल का निर्माण कराया जा रहा है, ताकि कोसी की बदली हुई धारा को नियंत्रित कर उसे वापस मध्य प्रवाह की ओर मोड़ा जा सके। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी आधुनिक तकनीक के जरिए भी की जा रही है, जिसमें ड्रोन से लगातार नदी की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

स्थिति का जायजा लेने के लिए जल संसाधन विभाग के प्रधान सचिव संतोष कुमार मल्ल खुद मौके पर पहुंचे। वे कठिन रास्तों के बीच ट्रैक्टर के जरिए नदी के करीब पहुंचे और निर्माण कार्यों की प्रगति का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि मानसून आने से पहले हर हाल में यह कार्य पूरा कर लिया जाए। साथ ही वे पटना मुख्यालय से रोजाना मॉनिटरिंग कर रहे हैं और प्रगति रिपोर्ट ले रहे हैं।

2.5 किलोमीटर लंबा पायलट चैनल निर्माणाधीन

कोसी नदी को मुख्य धारा में लाने के लिए करीब 2.50 किलोमीटर लंबा और लगभग 30 मीटर चौड़ा पायलट चैनल बनाया जा रहा है। यह चैनल वीरपुर बराज के 56 गेटों में से 28वें और 29वें गेट के सामने डाउनस्ट्रीम में तैयार किया जा रहा है।

योजना के तहत, जैसे ही चैनल का निर्माण पूरा होगा, बराज के पूर्वी हिस्से के गेटों को धीरे-धीरे बंद किया जाएगा, जिससे नदी का बहाव नियंत्रित होकर मध्य हिस्से की ओर आ सके। इससे पूर्वी तटबंध की ओर बढ़ रहे दबाव को कम करने में मदद मिलेगी और संभावित बाढ़ के खतरे को टाला जा सकेगा।

इंजीनियर 24 घंटे कर रहे काम

विभाग के निर्देश पर अभियंता और श्रमिक दिन-रात इस परियोजना को पूरा करने में जुटे हैं। लक्ष्य है कि मई के अंत तक चैनल का निर्माण पूरा कर लिया जाए, ताकि मानसून से पहले कोसी को उसके प्राकृतिक प्रवाह में वापस लाया जा सके।

250 वर्षों में 120 किमी बदल चुकी है कोसी

कोसी नदी का इतिहास भी बेहद रोचक और चुनौतीपूर्ण रहा है। वर्ष 1949 से पहले लगभग 250 वर्षों में यह नदी उत्तर से दक्षिण बहते हुए करीब 120 किलोमीटर पश्चिम की ओर खिसक चुकी है। इस कारण बिहार के कई नए इलाकों में बाढ़ का खतरा पैदा हुआ।

इसी समस्या को देखते हुए भारत और नेपाल के बीच 1954 में वीरपुर में बराज निर्माण का समझौता हुआ। 1959 में इसका निर्माण शुरू हुआ और 1963 में यह पूरा हुआ। इसके बाद से नदी को तटबंधों के भीतर नियंत्रित रखने की कोशिश की जा रही है।

सरकार का दावा – समय पर पूरा होगा काम

जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि सरकार पूरी तरह सतर्क है और वीरपुर बराज के पास कोसी को उसकी मूल धारा में वापस लाने के लिए पायलट चैनल का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि मानसून से पहले यह कार्य पूरा कर लिया जाएगा और कोसी फिर से अपने प्राकृतिक स्वरूप में बहने लगेगी।

कोसी की बदलती धारा हर साल बिहार के लिए चुनौती बनती रही है। ऐसे में सरकार की यह पहल आने वाले दिनों में बाढ़ नियंत्रण और लोगों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है।

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