
- वित्तीय वर्ष 2026-27 के पहले ही दिन आम आदमी की जेब पर महंगाई की एक नई कैंची चली है, जहां नेशनल हाईवे पर सफर करना अब पहले के मुकाबले 5 से 10 प्रतिशत तक महंगा हो गया है।
- भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने 31 मार्च की आधी रात से ही नई टोल दरों को प्रभावी कर दिया है, जिसके चलते अब छोटे वाहनों से लेकर भारी ट्रकों तक को 5 रुपये से लेकर 25 रुपये तक अतिरिक्त भुगतान करना होगा।
- दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने देश भर के टोल प्लाजा को पूरी तरह ‘नकद मुक्त’ (Cashless) करने के अपने महत्वाकांक्षी फैसले को फिलहाल एक महीने के लिए टाल दिया है।
- अब 1 अप्रैल के बजाय 1 मई 2026 से टोल पर नकद भुगतान की व्यवस्था पूरी तरह बंद होगी; तब तक यात्रियों को फास्टैग के साथ-साथ नकद और यूपीआई/क्यूआर कोड से भुगतान की वैकल्पिक सुविधा मिलती रहेगी।
- सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार, तकनीकी तैयारियों और यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए नकद बंदी के फैसले को विस्तार दिया गया है ताकि अंतिम छोर तक डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हो सके।
पटना/नई दिल्ली (द वॉयस ऑफ बिहार)।
वित्तीय वर्ष का ‘कड़वा’ आगाज: सड़कों पर महंगा हुआ सफर
1 अप्रैल 2026 की सुबह जब देश एक नए वित्तीय वर्ष की ओर कदम बढ़ा रहा था, तभी नेशनल हाईवे के टोल बूथों पर यात्रियों का सामना बदली हुई कीमतों से हुआ। केंद्र सरकार ने इस साल भी टोल दरों में सालाना संशोधन की परंपरा को जारी रखते हुए कीमतों में 5 से 10 प्रतिशत की औसत वृद्धि कर दी है। यह वृद्धि उन सभी मार्गों पर लागू हुई है जो राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का हिस्सा हैं। अगर हम आंकड़ों की बात करें, तो अब प्रति फेरे (Single Trip) के लिए वाहन चालकों को कम से कम 5 रुपये और अधिकतम 25 रुपये तक ज्यादा चुकाने होंगे। यह बदलाव उन लोगों के लिए एक बड़ा झटका है जो अपने निजी वाहनों से लंबी दूरी का सफर तय करते हैं या जो व्यावसायिक परिवहन के क्षेत्र से जुड़े हैं। बिहार की राजधानी पटना से दिल्ली, कोलकाता या अन्य शहरों की ओर जाने वाले ट्रकों और बसों के लिए यह मासिक बजट बिगाड़ने वाली खबर है।
कीमतों का गणित: आपकी जेब पर कितना पड़ेगा बोझ?
टोल दरों में हुई इस वृद्धि को अगर विस्तार से समझें, तो यह श्रेणीवार लागू की गई है। छोटे निजी वाहनों (कार, जीप, वैन) के लिए टोल दरों में 5 से 10 रुपये की बढ़ोतरी देखी गई है। वहीं, हल्के व्यावसायिक वाहनों (LCV) और मिनी बसों के लिए यह इजाफा 15 रुपये के आसपास है। भारी वाहनों जैसे ट्रक और मल्टी-एक्सेल वाहनों (MAV) के लिए यह मार सबसे ज्यादा है, जहां उन्हें 25 रुपये तक अतिरिक्त टोल देना होगा। गौर करने वाली बात यह है कि ये दरें 31 मार्च की रात 12 बजे के बाद से ही सिस्टम में अपडेट कर दी गई थीं। रात के समय सफर करने वाले कई चालकों को शुरुआत में इस बदलाव का पता नहीं चला, जिससे कई टोल प्लाजा पर कर्मियों और यात्रियों के बीच बहस की स्थिति भी देखी गई। हालांकि, एनएचएआई ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि सड़क रखरखाव की बढ़ती लागत और इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास के लिए दरों में यह मामूली सुधार आवश्यक है।
कैशलेस इंडिया का ‘टोटल’ इंतजार: क्यों टला सरकार का फैसला?
टोल कीमतों में बढ़ोतरी के बीच एक खबर राहत देने वाली भी आई है। केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल से देश के सभी टोल प्लाजा को पूरी तरह ‘कैशलेस’ करने का जो संकल्प लिया था, उसे फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। पहले की योजना के अनुसार, आज से नकद भुगतान की खिड़कियां बंद होनी थी और केवल फास्टैग (FASTag) या फास्टैग खराब होने की स्थिति में यूपीआई (UPI) व क्यूआर कोड (QR Code) के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान ही अनिवार्य होना था। लेकिन धरातल पर कई टोल प्लाजा पर इंटरनेट कनेक्टिविटी की समस्या और ग्रामीण क्षेत्रों के वाहन चालकों के पास डिजिटल भुगतान के विकल्पों की कमी को देखते हुए मंत्रालय ने अपने कदम पीछे खींचे हैं। सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की है कि अब यह व्यवस्था 1 मई 2026 से अनिवार्य होगी। इसका मतलब है कि यात्रियों के पास अब भी एक महीने का समय है कि वे अपनी डिजिटल भुगतान प्रणालियों को दुरुस्त कर लें।
फास्टैग और क्यूआर कोड का तालमेल: भविष्य की नई व्यवस्था
सरकार जिस नई व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, उसमें फास्टैग की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। लेकिन अक्सर देखा जाता है कि फास्टैग रीडर तकनीकी खराबी या सर्वर डाउन होने के कारण काम नहीं करता, जिससे टोल पर लंबी कतारें लग जाती हैं। इसी समस्या के समाधान के लिए मंत्रालय ने यूपीआई और क्यूआर कोड को अनिवार्य करने का निर्णय लिया है। 1 मई से यदि किसी वाहन का फास्टैग रीड नहीं होता है, तो उसे नकद भुगतान का विकल्प नहीं दिया जाएगा। चालक को मौके पर मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन कर मोबाइल के जरिए भुगतान करना होगा। यदि कोई चालक नकद देने की जिद करता है, तो उसे भारी जुर्माना या दोगुना टोल भी देना पड़ सकता है। इस एक महीने के विस्तार का उपयोग टोल प्लाजा पर हाई-स्पीड इंटरनेट फाइबर लगाने और कर्मियों को डिजिटल भुगतान के सुचारू संचालन के लिए प्रशिक्षित करने में किया जाएगा।
महंगाई की दोहरी मार: केवल टोल नहीं, माल भाड़ा भी चढ़ेगा
टोल दरों में वृद्धि केवल निजी कार मालिकों को ही प्रभावित नहीं करती, बल्कि इसका सीधा असर आम आदमी की रसोई तक पहुंचता है। नेशनल हाईवे पर चलने वाले ट्रकों के लिए टोल का खर्च उनके कुल परिचालन लागत का एक बड़ा हिस्सा होता है। जब टोल टैक्स में 10 प्रतिशत तक की वृद्धि होती है, तो ट्रांसपोर्टर भी अपने माल भाड़े (Freight Charges) में इजाफा करते हैं। इससे बाजार में आने वाली सब्जियां, अनाज, सीमेंट, छड़ और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में उछाल आने की प्रबल संभावना रहती है। बिहार जैसे उपभोक्ता प्रधान राज्य में, जहां अधिकांश सामान अन्य राज्यों से ट्रकों के जरिए आता है, वहां इस 25 रुपये की वृद्धि का असर बाजार की कीमतों में प्रत्यक्ष रूप से दिखाई दे सकता है। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामूली बढ़ोतरी से थोक महंगाई दर में भी हल्का उतार-चढ़ाव आ सकता है।
** commuters की चिंता: पटना के रिंग रोड और बाईपास पर क्या होगा असर?**
बिहार के संदर्भ में देखें तो पटना के आसपास के टोल प्लाजा जैसे दीदारगंज या फतुहा की ओर जाने वाले मार्गों पर यात्रियों की भीड़ अधिक रहती है। दैनिक यात्रियों (Daily Commuters) के लिए यह वृद्धि किसी झटके से कम नहीं है। हालांकि, स्थानीय निवासियों को मासिक पास (Monthly Pass) की सुविधा मिलती है, लेकिन उसमें भी दरों का संशोधन होने से उनके बजट पर 50 से 100 रुपये का अतिरिक्त भार पड़ेगा। लोगों का कहना है कि एक तरफ सड़कों की हालत सुधर रही है, लेकिन दूसरी ओर सफर इतना महंगा होता जा रहा है कि आम आदमी के लिए अपनी गाड़ी निकालना भी अब लग्जरी जैसा होता जा रहा है। सरकार को चाहिए कि वह टोल की दरों को एक निश्चित सीमा तक ही सीमित रखे ताकि मध्यम वर्गीय परिवारों पर बोझ न बढ़े।
मंत्रालय का तर्क: रखरखाव और नई सड़कों के लिए फंड जरूरी
सड़क परिवहन मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि भारत में नेशनल हाईवे का नेटवर्क दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ रहा है। नई सड़कों के निर्माण और पुरानी सड़कों की मरम्मत के लिए प्रतिवर्ष अरबों रुपये की आवश्यकता होती है। टोल से होने वाली आय का एक बड़ा हिस्सा ऋणों के भुगतान और राजमार्गों की सुरक्षा व्यवस्था पर खर्च होता है। मंत्रालय का मानना है कि फास्टैग ने टोल संग्रह में पारदर्शिता बढ़ाई है और नकद लेनदेन बंद होने से भ्रष्टाचार पर पूरी तरह लगाम लग जाएगी। 1 मई की नई डेडलाइन को लेकर विभाग अब युद्धस्तर पर काम कर रहा है ताकि अगली बार इसे टालने की नौबत न आए। डिजिटल इंडिया के विजन को सड़क परिवहन के साथ पूरी तरह एकीकृत करना ही सरकार का अंतिम लक्ष्य है।
निष्कर्ष: संभलकर निकलें और डिजिटल बनें
आज से शुरू हुआ यह नया सफर आपके लिए थोड़ा महंगा जरूर है, लेकिन यह डिजिटल भविष्य की ओर एक अनिवार्य कदम भी है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे अपने फास्टैग को समय पर रिचार्ज रखें और अपने मोबाइल में कम से कम एक डिजिटल वॉलेट या यूपीआई ऐप चालू रखें, क्योंकि 1 मई के बाद टोल प्लाजा पर नकद की खनक सुनाई देना बंद हो जाएगी। फिलहाल 25 रुपये तक की यह बढ़ोतरी आपकी जेब पर हल्का घाव जरूर देगी, लेकिन बेहतर सड़कों और कम इंतजार के वादे के साथ आपको इसे स्वीकार करना होगा। द वॉयस ऑफ बिहार की टीम आपको लगातार अपडेट करती रहेगी कि आपके क्षेत्र के किस टोल प्लाजा पर कितनी दरें बढ़ी हैं और नई डिजिटल व्यवस्था का उपयोग कैसे करना है।


