
- भागलपुर के वार्ड संख्या 20 स्थित खरमनचक इलाके में ब्रिटिश कालीन हथिया नाले के ओवरफ्लो होने से भारी तबाही, पानी के भारी दबाव के कारण दीवार गिरने से इलाके में दहशत का माहौल।
- दीवार ढहने और बेसमेंट में गंदा पानी भर जाने की गंभीर शिकायत के बाद नगर निगम प्रशासन हरकत में आया, मेयर और डिप्टी मेयर ने तकनीकी अधिकारियों की पूरी टीम के साथ किया स्थलीय निरीक्षण।
- मेयर ने क्षतिग्रस्त नाले के तत्काल निर्माण और मलबे की त्वरित सफाई का दिया अल्टीमेटम, हथिया नाले के पक्कीकरण के लिए लंबे समय से अटकी डीपीआर पर तेजी से काम करने का निर्देश।
- आगामी मानसून से पहले जल निकासी की मुकम्मल व्यवस्था सुनिश्चित करने और अन्य विभागों से एनओसी की प्रक्रिया जल्द पूरी करने की हिदायत, स्थानीय निवासियों को मिला स्थाई समाधान का भरोसा।
भागलपुर (द वॉयस ऑफ बिहार)।
खरमनचक में हथिया नाले के कहर से गिरी दीवार और बेसमेंट में भरा गंदा पानी
स्मार्ट सिटी भागलपुर में जल निकासी की व्यवस्था किस कदर चरमराई हुई है, इसका ताजा और भयावह उदाहरण शहर के हृदय स्थल कहे जाने वाले वार्ड संख्या 20 के खरमनचक इलाके में देखने को मिला है। यहां से गुजरने वाला शहर का सबसे पुराना और प्रमुख हथिया नाला ओवरफ्लो होकर आसपास के लोगों के लिए एक बड़ी त्रासदी बन गया है। नाले में पानी का दबाव इतना अधिक था कि किनारे बनी एक मजबूत दीवार भरभरा कर गिर पड़ी। दीवार गिरने की इस घटना से पूरे इलाके में न केवल तेज आवाज से दहशत फैल गई, बल्कि नाले का सड़ांध मारता गंदा पानी तेजी से आसपास के घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के बेसमेंट में घुस गया। बेसमेंट में पानी भर जाने से लोगों का भारी आर्थिक नुकसान हुआ है और पूरे क्षेत्र में महामारी फैलने का खतरा मंडराने लगा है। जलभराव के कारण स्थानीय लोगों का घरों से निकलना मुहाल हो गया है और नारकीय स्थिति उत्पन्न हो गई है।
दीवार गिरने की घटना के बाद जागी नगर निगम की टीम, मेयर ने किया स्थलीय जायजा
खरमनचक में दीवार ढहने और जलजमाव की इस विकराल समस्या की खबर जैसे ही नगर निगम प्रशासन तक पहुंची, महकमे में हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए मेयर ने खुद मोर्चा संभाला और पूरे दलबल के साथ प्रभावित इलाके का स्थलीय निरीक्षण करने पहुंच गईं। उनके साथ डिप्टी मेयर, संबंधित वार्ड के पार्षद, सहायक अभियंता, कनीय अभियंता और योजना शाखा के प्रभारी सहित कई अन्य तकनीकी अधिकारी मौजूद रहे। पूरी टीम ने उस जगह का बारीकी से मुआयना किया जहां से दीवार गिरी थी और जहां से नाले का पानी ओवरफ्लो होकर रिहायशी इलाके में प्रवेश कर रहा था। अधिकारियों की टीम ने बेसमेंट में भरे पानी और जल निकासी के अवरुद्ध हुए रास्तों की तकनीकी खामियों को समझने का प्रयास किया। इस दौरान मेयर ने अधिकारियों की लापरवाही पर गहरी नाराजगी भी जाहिर की।
अधिकारियों को सख्त हिदायत, मलबे की सफाई और क्षतिग्रस्त नाले का तुरंत हो निर्माण
निरीक्षण के दौरान मेयर के तेवर काफी सख्त नजर आए। उन्होंने मौके पर मौजूद अभियंताओं और निगम कर्मियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि सबसे पहले प्राथमिकता के आधार पर गिरे हुए मलबे को वहां से हटाया जाए ताकि पानी के प्रवाह में जो रुकावट आ रही है, उसे खत्म किया जा सके। मलबे के कारण नाला पूरी तरह से चोक हो गया था, जिससे बैकफ्लो की समस्या उत्पन्न हो रही थी। इसके साथ ही उन्होंने क्षतिग्रस्त नाले के उस हिस्से का तत्काल अस्थाई या स्थाई निर्माण शुरू करने का आदेश दिया जहां से पानी का रिसाव हो रहा है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि जनता को इस नारकीय स्थिति में लंबे समय तक नहीं छोड़ा जा सकता। आपदा प्रबंधन के तहत युद्ध स्तर पर काम शुरू किया जाए और पंप सेट लगाकर बेसमेंट में भरे गंदे पानी को निकालने की व्यवस्था तुरंत सुनिश्चित की जाए।
ब्रिटिश कालीन हथिया नाले के पक्कीकरण की अटकी डीपीआर पर तेज होगी कार्रवाई
हथिया नाला भागलपुर शहर के लिए कोई नया नाम नहीं है। यह ब्रिटिश काल में शहर के बरसाती पानी की निकासी के लिए बनाया गया था, लेकिन समय के साथ बढ़ती आबादी और अतिक्रमण के कारण यह नाला शहर के बड़े सीवरेज का रूप ले चुका है। इसकी वहन क्षमता अब खत्म हो चुकी है। मेयर ने इस ऐतिहासिक और जर्जर नाले की दुर्दशा पर चिंता जताते हुए योजना शाखा के प्रभारी को निर्देश दिया कि हथिया नाले के पक्कीकरण और सुदृढ़ीकरण को लेकर जो डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है या जो फाइलें लंबित हैं, उन पर त्वरित गति से कार्रवाई की जाए। जब तक इस नाले का कंक्रीट से पक्कीकरण और चौड़ीकरण नहीं होगा, तब तक ओवरफ्लो की यह समस्या हर साल शहरवासियों को इसी तरह डराती रहेगी। उन्होंने इस योजना को निगम की सर्वोच्च प्राथमिकताओं की सूची में शामिल करने का निर्देश दिया।
विभिन्न विभागों के बीच समन्वय और एनओसी की प्रक्रिया जल्द पूरी करने का अल्टीमेटम
अक्सर देखा जाता है कि नगर निगम की कोई भी बड़ी योजना जब धरातल पर उतरने वाली होती है, तो वह पथ निर्माण विभाग, बिजली विभाग या रेलवे जैसे अन्य विभागों की अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) के अभाव में लालफीताशाही की भेंट चढ़ जाती है। इस पुरानी बीमारी को दूर करने के लिए मेयर ने अधिकारियों को स्पष्ट तौर पर ताकीद की है कि हथिया नाले के सुदृढ़ीकरण से जुड़ी योजना में जिन-जिन विभागों से एनओसी की आवश्यकता है, उनसे तुरंत पत्राचार किया जाए। विभिन्न विभागों के बीच एक बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए जरूरत पड़ने पर संयुक्त बैठक बुलाई जाए। उन्होंने कहा कि कागजी प्रक्रियाओं में उलझकर जनहित के कार्यों को रोका नहीं जा सकता। अधिकारियों को खुद अन्य विभागों के चक्कर लगाकर जल्द से जल्द सभी तरह की एनओसी प्राप्त करनी होगी ताकि निर्माण कार्य में कोई कानूनी या विभागीय अड़चन न आए।
स्थानीय लोगों को मिला स्थाई समाधान का आश्वासन, मानसून से पहले जल निकासी पर जोर
निरीक्षण के दौरान वहां मौजूद खरमनचक और आसपास के आक्रोशित और परेशान निवासियों ने मेयर और निगम अधिकारियों के समक्ष अपना दर्द साझा किया। लोगों ने बताया कि हल्की बारिश में भी यह इलाका टापू बन जाता है। मेयर ने स्थानीय लोगों की बातों को पूरी गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ सुना। उन्होंने जनता को आश्वस्त किया कि यह दौरा केवल रस्म अदायगी नहीं है, बल्कि क्षेत्र की सुरक्षा और जल निकासी की इस चिरपरिचित समस्या का स्थाई समाधान हर हाल में निकाला जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि आगामी मानसून आने में अब कुछ ही महीने शेष बचे हैं। मानसून से पूर्व शहर की जल निकासी व्यवस्था को पूरी तरह से दुरुस्त करना नगर निगम की पहली प्राथमिकता है। अगर मानसून से पहले इस नाले की सफाई और मरम्मत का काम पूरा नहीं हुआ, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
स्मार्ट सिटी भागलपुर में जलजमाव की चुनौती और मास्टर प्लान की आवश्यकता
खरमनचक की यह घटना इस बात की ओर भी स्पष्ट इशारा करती है कि केवल कागजों पर स्मार्ट सिटी का तमगा लगा लेने से जमीनी हकीकत नहीं बदलती। भागलपुर का ड्रेनेज सिस्टम आज भी दशकों पुराना है जो वर्तमान आबादी का बोझ उठाने में पूरी तरह से अक्षम साबित हो रहा है। ऐसे में मेयर द्वारा लिया गया यह संज्ञान शहर के लिए एक सकारात्मक संकेत है। लेकिन इस समस्या का समाधान केवल एक नाले की मरम्मत से नहीं होने वाला है। भागलपुर को जलजमाव जैसी गंभीर समस्या से हमेशा के लिए मुक्त करने के लिए एक समग्र ड्रेनेज मास्टर प्लान की आवश्यकता है। हथिया नाला शहर की जल निकासी की रीढ़ है, और अगर इसे अतिक्रमण मुक्त कर वैज्ञानिक तरीके से विकसित कर दिया जाए, तो आधे शहर को जलभराव से मुक्ति मिल सकती है। फिलहाल, निगम प्रशासन की इस तत्परता ने खरमनचक के लोगों में एक नई उम्मीद जरूर जगाई है कि शायद इस बार बरसात में उन्हें अपने घरों में कैद नहीं होना पड़ेगा।


