
भागलपुर। भागलपुर संसदीय क्षेत्र के किसानों से जुड़े मुद्दे अब राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता से उठने लगे हैं। क्षेत्र के सांसद ने लोकसभा में प्रश्न संख्या 5099 (दिनांक 24 मार्च 2026) के माध्यम से किसानों की आय, फसल उत्पादकता, बीमा, सिंचाई व्यवस्था और प्राकृतिक खेती जैसे अहम विषयों को जोरदार तरीके से उठाया।
इस प्रश्न के जवाब में कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री ने विस्तृत जानकारी साझा करते हुए बताया कि केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के जरिए भागलपुर समेत देशभर के किसानों को लगातार लाभ पहुंचाया जा रहा है।
सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, किसानों की आय और उत्पादकता बढ़ाने के लिए सब्सिडी वाले बीज वितरण, मुख्यमंत्री क्रैश बीज योजना और कृषि इनपुट सब्सिडी जैसी योजनाएं प्रभावी साबित हुई हैं। इसके साथ ही किसान उत्पादक संगठन (FPOs) के गठन से किसानों को बेहतर बाजार और मूल्य मिल रहा है, जिससे उनकी आमदनी में वृद्धि दर्ज की गई है। आंकड़ों के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में चावल, गेहूं और मक्का सहित कुल खाद्यान्न उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, वहीं उत्पादकता में भी 2019-20 के मुकाबले 2024-25 में स्पष्ट सुधार देखा गया है।
सिंचाई के क्षेत्र में भी भागलपुर को बड़ी सौगात मिली है। जिले में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं के लिए 594.436 लाख रुपये की राशि आवंटित की गई है। इससे जल प्रबंधन बेहतर होने के साथ किसानों को सूखे जैसी समस्याओं से राहत मिलने की उम्मीद है।
प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए भी सरकार सक्रिय है। राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत देशभर में बड़े पैमाने पर क्लस्टर विकसित किए जा रहे हैं। भागलपुर जिले में 500 हेक्टेयर क्षेत्र में 10 समूहों के जरिए करीब 1250 किसानों को इससे जोड़ा गया है। वहीं परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) के तहत जैविक खेती को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। नमामि गंगे-पीकेवीवाई योजना के अंतर्गत 1500 एकड़ भूमि में 1480 किसानों को शामिल कर सतत खेती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
सांसद द्वारा उठाया गया यह प्रश्न न सिर्फ भागलपुर के किसानों की समस्याओं को उजागर करता है, बल्कि क्षेत्र में कृषि विकास की संभावनाओं को भी राष्ट्रीय मंच पर सामने लाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से आने वाले समय में किसानों की आय में और वृद्धि होगी तथा खेती को अधिक टिकाऊ और लाभकारी बनाया जा सकेगा।


