
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (बिहार बोर्ड) ने मैट्रिक वार्षिक परीक्षा 2026 का परिणाम जारी कर दिया है। लगातार पांचवें वर्ष बिहार बोर्ड ने देश में सबसे पहले मार्च महीने में ही मैट्रिक और इंटरमीडिएट का रिजल्ट घोषित कर नया रिकॉर्ड कायम किया है। इस बार का परिणाम कई मायनों में खास रहा, जिसमें सबसे बड़ा आकर्षण टॉपर्स के रिकॉर्ड अंक रहे।
इस वर्ष मैट्रिक परीक्षा में 492 अंक (98.4%) के साथ दो छात्राएं—पुष्पांजलि कुमारी और सबरीन परवीन—संयुक्त रूप से राज्य की टॉपर बनी हैं। यह अब तक बिहार बोर्ड के इतिहास में मैट्रिक टॉपर द्वारा प्राप्त किया गया सर्वाधिक अंक है। टॉप 10 में कुल 126 परीक्षार्थियों ने जगह बनाई, जबकि टॉप 5 में 13 छात्र-छात्राएं शामिल हैं।
बोर्ड अध्यक्ष आनंद किशोर ने बताया कि टॉप 5 में शामिल सभी छात्रों को बिहार बोर्ड द्वारा संचालित निशुल्क आवासीय कोचिंग (इंजीनियरिंग और मेडिकल) में नामांकन का अवसर मिलेगा। इसके अलावा अन्य इच्छुक छात्र 5 अप्रैल तक आवेदन कर सकते हैं। राज्य के सभी नौ प्रमंडलों में भी मेडिकल और इंजीनियरिंग की मुफ्त कोचिंग की सुविधा उपलब्ध है।
इस वर्ष परीक्षा में कुल 15,10,928 परीक्षार्थी शामिल हुए थे, जिनमें से 12,35,743 (81.79%) छात्र-छात्राएं सफल हुए। इनमें छात्राओं का प्रदर्शन बेहतर रहा। प्रथम श्रेणी में 4,43,723, द्वितीय श्रेणी में 4,75,511 और तृतीय श्रेणी में 3,03,103 परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए।
आनंद किशोर के नेतृत्व में बिहार बोर्ड ने परीक्षा प्रणाली में तकनीकी सुधार किए हैं, जैसे बारकोड, लिथो कोड, फोटोयुक्त कॉपियां और प्री-प्रिंटेड OMR शीट्स। नए सॉफ्टवेयर की मदद से मूल्यांकन प्रक्रिया तेज हुई, जिसके कारण मात्र 28 दिनों में परिणाम जारी करना संभव हो पाया।
जो छात्र अपने परिणाम से संतुष्ट नहीं हैं या असफल हुए हैं, वे स्क्रुटनी और कंपार्टमेंटल परीक्षा के लिए 1 अप्रैल से 7 अप्रैल तक आवेदन कर सकते हैं। बोर्ड का लक्ष्य है कि कंपार्टमेंटल परीक्षा का परिणाम मई में ही जारी कर दिया जाए, ताकि छात्रों का एक साल बर्बाद न हो।
बिहार बोर्ड की यह तेज और पारदर्शी व्यवस्था अब अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बनती जा रही है।


