भागलपुर में मजदूर संगठनों की संयुक्त बैठक: 1 अप्रैल को ‘काला दिवस’ मनाने का ऐलान, लेबर कोड के विरोध में प्रदर्शन की तैयारी

भागलपुर, 28 मार्च 2026: केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित लेबर कोड कानूनों के विरोध में देशभर में 1 अप्रैल को ‘काला दिवस’ मनाने की तैयारी तेज हो गई है। इसी क्रम में भागलपुर के कचहरी परिसर में शनिवार को विभिन्न मजदूर संगठनों की संयुक्त बैठक आयोजित की गई, जिसमें बड़े स्तर पर विरोध कार्यक्रम को सफल बनाने की रणनीति तय की गई।

कई संगठनों की साझा बैठक, आंदोलन की रूपरेखा तैयार
बैठक में ऐक्टू, एटक, सीटू, सेवा और इंटक सहित कई प्रमुख ट्रेड यूनियनों के पदाधिकारी शामिल हुए। इनमें मुकेश मुक्त, डॉ. सुधीर शर्मा, दशरथ प्रसाद, मौसम देवी, पूनम केशरी और ई. रवि कुमार जैसे श्रमिक नेताओं ने हिस्सा लिया।
सभी संगठनों ने एकजुट होकर लेबर कोड कानूनों का विरोध करने का निर्णय लिया और इसे मजदूर हितों के खिलाफ बताया।

काली पट्टी लगाकर जताएंगे विरोध
बैठक में तय किया गया कि 1 अप्रैल को संगठित और असंगठित दोनों क्षेत्रों के मजदूर अपने-अपने कार्यस्थलों पर काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराएंगे।
इसके अलावा शाम के समय शहर के स्टेशन चौक पर सभी केंद्रीय ट्रेड यूनियन एक साथ जुटकर प्रदर्शन करेंगे, जिसमें बड़ी संख्या में मजदूरों की भागीदारी की उम्मीद जताई गई है।

लेबर कोड को बताया मजदूर विरोधी
बैठक के दौरान श्रमिक नेताओं ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रस्तावित चार लेबर कोड मजदूरों के मौजूदा अधिकारों को कमजोर करेंगे। उनका आरोप है कि ये कानून श्रमिकों की सुरक्षा और अधिकारों को सीमित कर देंगे और कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देंगे।
नेताओं ने यह भी कहा कि फरवरी में हुई आम हड़ताल के जरिए देशभर के मजदूर पहले ही इन कानूनों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद सरकार इन्हें लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

संविधान और अधिकारों का मुद्दा उठाया
वक्ताओं ने दावा किया कि वर्तमान श्रम कानून लंबे संघर्ष और बलिदान के बाद हासिल हुए हैं, जो मजदूरों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करते हैं। उनका कहना है कि नए लेबर कोड इन अधिकारों को खत्म कर सकते हैं और इससे श्रमिक वर्ग की स्थिति कमजोर होगी।
उन्होंने इसे संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ बताते हुए व्यापक आंदोलन की जरूरत पर जोर दिया।

किसान संगठनों का भी समर्थन
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने भी इस ‘काला दिवस’ के आह्वान का समर्थन किया है। इससे आंदोलन को और व्यापक स्वरूप मिलने की संभावना जताई जा रही है।

बढ़ सकती है आंदोलन की तीव्रता
मजदूर संगठनों के इस ऐलान के बाद साफ है कि 1 अप्रैल को भागलपुर सहित पूरे देश में विरोध प्रदर्शन देखने को मिल सकता है।
स्थानीय स्तर पर भी प्रशासन और आम लोगों की नजर अब इस विरोध कार्यक्रम पर टिकी हुई है, क्योंकि इसका असर जनजीवन और कामकाज पर भी पड़ सकता है।

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