
पटना, 27 मार्च। राज्य में राजस्व सेवाओं के बाधित होने के बीच सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जनहित से जुड़े कार्य किसी भी स्थिति में रुकने नहीं दिए जाएंगे। सामूहिक अवकाश पर गए बिहार राजस्व सेवा के अधिकारियों के खिलाफ निर्णायक कदम उठाते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने 1 अप्रैल से पूरे राज्य में नई प्रशासनिक व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है।
उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने दो टूक कहा कि जनता से जुड़े कामों में बाधा डालना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार को जनता ने काम करने का जनादेश दिया है, न कि हड़ताल के नाम पर सेवाएं रोकने का। ऐसे में 1 अप्रैल से हर अंचल कार्यालय में नियमित कामकाज सुनिश्चित किया जाएगा, चाहे इसके लिए अतिरिक्त प्रभार ही क्यों न देना पड़े।
सरकार की नई व्यवस्था के तहत जो अधिकारी हड़ताल में शामिल नहीं हैं, उन्हें उनके मूल पद के साथ-साथ एक या उससे अधिक अंचलों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इस निर्णय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि दाखिल-खारिज, परिमार्जन, ई-मापी, अतिक्रमण हटाने और विभिन्न प्रमाण पत्रों से जुड़े कार्य बिना किसी रुकावट के जारी रहें।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि किसी भी अंचल को खाली नहीं रहने दिया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंचलाधिकारी, सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी, राजस्व अधिकारी और कानूनगो को अतिरिक्त प्रभार देकर हर अंचल में पदाधिकारी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
विभाग ने यह भी माना है कि प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) पर पहले से ही कई जिम्मेदारियां हैं, इसलिए अब उन्हें अंचल का अतिरिक्त प्रभार देना व्यावहारिक नहीं है। इसके बजाय सीधे राजस्व सेवा के कार्यरत अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी जाएगी, जिससे कामकाज अधिक प्रभावी ढंग से संचालित हो सके।
नई व्यवस्था के तहत अतिरिक्त प्रभार पाने वाले अधिकारियों को पूर्ण वित्तीय अधिकार भी दिए जाएंगे, ताकि वेतन भुगतान, योजनाओं के क्रियान्वयन और अन्य प्रशासनिक कार्यों में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। साथ ही यह निर्देश भी दिया गया है कि कार्यभार का संतुलन बनाए रखते हुए नजदीकी अंचलों में ही अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जाए, ताकि कार्य निष्पादन में सुगमता बनी रहे।
सरकार ने यह भी तय किया है कि हड़ताल से लौटने वाले अधिकारियों को सदर अंचल और अनुमंडल मुख्यालय वाले अंचलों की जिम्मेदारी दी जाएगी, जिससे प्रशासनिक नियंत्रण मजबूत बना रहे।
इस पूरी व्यवस्था के जरिए सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि प्रशासनिक कामकाज किसी भी परिस्थिति में ठप नहीं होने दिया जाएगा। जनता से जुड़े मामलों में देरी या बाधा को गंभीरता से लिया जाएगा और जरूरत पड़ने पर और भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।


