समाचार के मुख्य बिंदु: सिल्क सिटी के नन्हे लेखक की बड़ी उड़ान लिखा Teenhood
- असाधारण उपलब्धि: भागलपुर के मात्र 13 वर्षीय देवांश गहलोत ने अपनी पहली पुस्तक प्रकाशित कर साहित्य जगत में अपनी धमक दी है।
- किताब का नाम: “Teenhood: A Tempting Disaster” — किशोर उम्र की चुनौतियों और भावनाओं पर आधारित एक प्रभावशाली कृति।
- मां का मार्गदर्शन: देवांश की सफलता के पीछे उनकी माता रूपाली की प्रेरणा और इंग्लिश लिटरेचर के प्रति उनके प्रोत्साहन का बड़ा हाथ।
- मल्टी-टैलेंटेड: पुस्तक के लेखन से लेकर कवर पेज डिजाइन और हेडिंग्स तक, सब कुछ देवांश ने खुद तैयार किया है।
- भविष्य का लक्ष्य: देवांश का सपना न्यूरोसर्जन डॉक्टर बनना है, लेकिन वे अपने लेखन के जुनून को भी साथ लेकर चलेंगे।
- VOB इनसाइट: डिजिटल युग में जहाँ बच्चे सोशल मीडिया में व्यस्त हैं, देवांश जैसे किशोरों का मौलिक लेखन की ओर मुड़ना बिहार की बौद्धिक संपदा के लिए सुखद संकेत है।
भागलपुर | 26 मार्च, 2026
मेधा और प्रतिभा की धरती भागलपुर ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि यहाँ की मिट्टी में रचनात्मकता रची-बसी है। सन्हौला और नाथनगर की खबरों के बीच आज चर्चा एक ऐसे नन्हे साहित्यकार की है जिसने अपनी उम्र से कहीं ज्यादा परिपक्वता अपनी कलम में दिखाई है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, 13 वर्षीय देवांश गहलोत ने अपनी पुस्तक के माध्यम से यह संदेश दिया है कि अगर सही मार्गदर्शन मिले, तो सपने किसी भी उम्र में साकार किए जा सकते हैं।
कक्षा 3 से शुरू हुआ सफर: “जुनून जब बन जाए पहचान”
देवांश के लेखक बनने की कहानी किसी फिल्म की पटकथा से कम नहीं है। उन्होंने अपनी भावनाओं को शब्दों में पिरोने का काम बहुत छोटी उम्र में ही शुरू कर दिया था।
- प्रारंभिक रुचि: देवांश ने कक्षा 3 से ही छोटी कविताएं और कहानियां लिखना शुरू किया था। उनके माता-पिता ने उनके इस शौक को दबाने के बजाय उसे निखारा।
- कड़ी मेहनत: जब देवांश कक्षा 6 में पहुँचे, तब उन्होंने अपनी पुस्तक “Teenhood: A Tempting Disaster” पर गंभीरता से काम शुरू किया। सालों की मेहनत और शोध के बाद आज यह किताब पाठकों के सामने है।
- पूर्ण रचनात्मकता: इस पुस्तक की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह ‘वन मैन शो’ है। देवांश ने न केवल इसका कंटेंट लिखा, बल्कि इसके कवर पेज का ग्राफिक डिजाइन भी खुद तैयार किया, जो उनकी बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है।
सफलता के पीछे ‘मदर फैक्टर’: रूपाली का अटूट विश्वास
देवांश की इस उपलब्धि में उनकी मां रूपाली की भूमिका सबसे अहम रही है। एक गृहिणी के रूप में रूपाली ने अपने बेटे की प्रतिभा को समय रहते पहचाना और उसे हमेशा उच्च श्रेणी के अंग्रेजी साहित्य (English Literature) को पढ़ने के लिए प्रेरित किया।
”मुझे अपने बेटे पर गर्व है। मैंने केवल उसे सही दिशा दिखाई और इंग्लिश लिटरेचर की बारीकियों को समझने के लिए प्रोत्साहित किया। पुस्तक के प्रकाशन में हमने साथ दिया, लेकिन इसकी हर एक लाइन और इसकी पूरी क्रिएटिविटी सिर्फ और सिर्फ देवांश की मेहनत का परिणाम है।”
— रूपाली, देवांश की माता
वहीं, देवांश के पिता, जो स्वयं एक सरकारी स्कूल में अंग्रेजी के शिक्षक हैं, ने भी अपने बेटे की इस रचनात्मक यात्रा पर खुशी जाहिर की है। एक शिक्षक पिता और समर्पित माता के साये में पला-बढ़ा यह बालक आज पूरे जिले के लिए प्रेरणास्रोत बन गया है।
युवाओं को संदेश: “गहराई से समझें, तभी आगे बढ़ें”
अपनी पुस्तक के विमोचन के अवसर पर देवांश ने अपने हमउम्र साथियों और युवाओं के लिए एक परिपक्व संदेश भी साझा किया। उनका मानना है कि सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता।
- गहन अध्ययन: देवांश के अनुसार, किसी भी विषय में महारत हासिल करने के लिए उसकी गहराई से पढ़ाई और समझ जरूरी है।
- भविष्य की योजना: हालांकि देवांश का प्राथमिक लक्ष्य एक न्यूरोसर्जन डॉक्टर बनकर मानवता की सेवा करना है, लेकिन उन्होंने दृढ़ता के साथ कहा कि ‘लेखक देवांश’ हमेशा उनके भीतर जीवित रहेगा और वे अपनी कलम को कभी रुकने नहीं देंगे।
VOB का नजरिया: क्या भागलपुर बन रहा है नया ‘साहित्यिक हब’?
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि देवांश गहलोत की यह उपलब्धि भागलपुर के अन्य बच्चों के लिए एक बेंचमार्क स्थापित करेगी।
- पेरेंटिंग का मॉडल: देवांश के माता-पिता ने यह दिखाया है कि बच्चों की नैसर्गिक प्रतिभा को पहचानना और उसे सपोर्ट करना कितना जरूरी है।
- मौलिकता की जीत: एआई (AI) और कॉपी-पेस्ट के दौर में एक 13 साल के बच्चे का खुद कवर डिजाइन करना और मौलिक कंटेंट लिखना काबिले तारीफ है।
- डॉक्टर और लेखक का संगम: चिकित्सा और साहित्य का पुराना नाता रहा है; देवांश का न्यूरोसर्जन बनने का सपना उनके लेखन को एक नया दृष्टिकोण दे सकता है।
उम्र सिर्फ एक संख्या है
देवांश गहलोत ने यह साबित कर दिया है कि अगर इरादे फौलादी हों और मां का आशीर्वाद साथ हो, तो 13 साल की उम्र में भी दुनिया को अपनी प्रतिभा से चौंकाया जा सकता है। भागलपुर का यह होनहार बेटा अब राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाने की राह पर अग्रसर है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ देवांश की किताब की सफलता और उनके भावी डॉक्टर बनने के सफर की हर अपडेट आप तक पहुँचाता रहेगा।


