पटना में गूँजी ‘चारूलता’ की स्वाभिमान भरी आवाज! महिला नाट्य उत्सव में ‘प्रांगण’ की शानदार प्रस्तुति; प्रेमचंद रंगशाला में भावुक हुए दर्शक

समाचार के मुख्य बिंदु: कला और संवेदना का अद्भुत संगम

  • भव्य आयोजन: कला एवं संस्कृति विभाग और बिहार संगीत नाटक अकादमी के तत्वावधान में आयोजित पांच दिवसीय महिला नाट्य उत्सव का चौथा दिन रहा बेहद खास।
  • मंचन: सोमा चक्रवर्ती के निर्देशन में नाट्य संस्था ‘प्रांगण’ द्वारा सुप्रसिद्ध नाटक ‘चारूलता’ की भावपूर्ण प्रस्तुति।
  • मूल संदेश: नाटक ने महिला स्वाभिमान, संवेदनशीलता और आत्मनिर्णय के अधिकार को प्रमुखता से रेखांकित किया।
  • कथानक: व्यस्त पति की उपेक्षा और साहित्यिक निकटता से उपजी भावनात्मक जटिलताओं के बीच एक स्त्री के संघर्ष की कहानी।
  • नुक्कड़ नाटक: प्रेमचंद रंगशाला के बाहरी परिसर में माध्यम फाउंडेशन द्वारा ‘खुच्चड़’ नाटक का मंचन, सामाजिक विसंगतियों पर किया प्रहार।
  • VOB इनसाइट: राजधानी पटना के सांस्कृतिक परिदृश्य में महिला केंद्रित नाटकों का यह मंचन समाज में आधी आबादी के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने का सशक्त माध्यम बना है।

पटना | 26 मार्च, 2026

​राजधानी पटना की सांस्कृतिक धड़कन कहे जाने वाले प्रेमचंद रंगशाला में इन दिनों संवेदनाओं और अभिनय का अनूठा उत्सव चल रहा है। महिला नाट्य उत्सव के चौथे दिन दर्शकों को महान साहित्य और उत्कृष्ट अभिनय का मेल देखने को मिला। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, सोमा चक्रवर्ती के मंझे हुए निर्देशन में मंचित नाटक ‘चारूलता’ ने न केवल दर्शकों की तालियां बटोरीं, बल्कि उन्हें एक स्त्री के अंतर्मन की गहराइयों को सोचने पर भी मजबूर कर दिया।

‘चारूलता’: उपेक्षा, अनुराग और स्वाभिमान का त्रिकोण

​नाटक ‘चारूलता’ की कहानी एक ऐसी महिला के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका जीवन संपन्नता के बावजूद एकाकीपन से भरा है। नाटक के मुख्य पहलुओं को यहाँ विस्तार से समझा जा सकता है:

  • उपेक्षा और एकाकीपन: चारूलता का पति भूपति एक समाचार पत्र का मालिक है। वह अपने काम और दुनियादारी में इतना मशगूल है कि अपनी पत्नी की भावनात्मक जरूरतों और उसके व्यक्तित्व को समय नहीं दे पाता।
  • साहित्यिक जुड़ाव: चारूलता के एकाकीपन को दूर करने के लिए भूपति अपने चचेरे भाई ‘अमल’ को उसके अध्ययन के लिए नियुक्त करता है। चारूलता और अमल के बीच साहित्य के प्रति साझा अनुराग धीरे-धीरे एक गहरी भावनात्मक निकटता में बदल जाता है।
  • मानसिक आघात: परिस्थितियों के फेर में अमल अचानक चारूलता से दूर चला जाता है और विदेश में विवाह कर लेता है। यह अलगाव चारूलता के लिए एक गहरा मानसिक आघात साबित होता है, जहाँ वह खुद को पूरी तरह टूटता हुआ महसूस करती है।
  • अंतिम निर्णय (क्लाइमेक्स): नाटक का अंत बेहद प्रभावशाली रहा। जब भूपति का अखबार धोखाधड़ी के कारण बंद हो जाता है और वह चारूलता को अपने साथ ले जाना चाहता है, तब चारूलता अपने आत्मसम्मान का परिचय देते हुए उसके साथ जाने से इंकार कर देती है। यह दृश्य महिला की आत्मनिर्भरता और अपनी नियति खुद तय करने की शक्ति का प्रतीक बना।

नुक्कड़ नाटक ‘खुच्चड़’ ने भी बटोरीं सुर्खियां

​मुख्य सभागार के बाहर का परिसर भी कला की गूँज से अछूता नहीं रहा। माध्यम फाउंडेशन के कलाकारों ने ‘खुच्चड़’ नामक नुक्कड़ नाटक का सशक्त प्रदर्शन किया। इस नाटक के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों और ज्वलंत मुद्दों पर तीखा प्रहार किया गया, जिसे वहां मौजूद दर्शकों ने काफी सराहा।

सांस्कृतिक दिग्गजों की उपस्थिति और मंच का संचालन

​इस कलात्मक संध्या की गरिमा बढ़ाने के लिए बिहार संगीत नाटक अकादमी के कई प्रमुख चेहरे मौजूद थे।

  • विशिष्ट अतिथि: अकादमी के सचिव महमूद आलम और सहायक सचिव कीर्ति आलोक ने कलाकारों के प्रदर्शन की सराहना की और उन्हें सम्मानित किया।
  • सफल संचालन: कार्यक्रम का मंच संचालन श्वेता सुरभि ने किया, जिन्होंने अपनी प्रभावी शब्दावली से नाटकों की पृष्ठभूमि को दर्शकों के सामने जीवंत रखा।

VOB का नजरिया: कला के आईने में महिला सशक्तिकरण

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि ‘चारूलता’ जैसे नाटक आज के समय में और भी प्रासंगिक हो जाते हैं।

  1. भावनात्मक निवेश: यह नाटक याद दिलाता है कि रिश्तों में केवल आर्थिक सुरक्षा पर्याप्त नहीं है; भावनात्मक समय और सम्मान भी उतना ही अनिवार्य है।
  2. आत्मनिर्भरता की गूँज: नाटक का अंत यह संदेश देता है कि स्त्री अब केवल पुरुष की अनुगामिनी नहीं है, बल्कि वह अपने स्वाभिमान के लिए अकेले चलने का साहस भी रखती है।
  3. सांस्कृतिक चेतना: पटना में इस तरह के नाट्य उत्सवों का आयोजन शहर की बौद्धिक और कलात्मक विरासत को समृद्ध करता है।

निष्कर्ष: स्वाभिमान की एक नई पटकथा

​महिला नाट्य उत्सव का चौथा दिन ‘चारूलता’ के माध्यम से महिला मन की उलझनों और उसके स्वाभिमान की जीत का गवाह बना। सोमा चक्रवर्ती और उनकी टीम ‘प्रांगण’ ने अपनी प्रस्तुति से यह साबित कर दिया कि रंगमंच आज भी समाज को आइना दिखाने का सबसे सशक्त माध्यम है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस पांच दिवसीय उत्सव के समापन समारोह और कला जगत की हर बड़ी हलचल की अपडेट आप तक सबसे पहले पहुँचाता रहेगा।

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