सुपौल, 25 मार्च 2026: बिहार के सुपौल जिले के किशनपुर प्रखंड में एक मामूली विवाद ने देखते ही देखते हिंसक रूप ले लिया। मामला इतना बढ़ गया कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) का परिसर ही जंग का मैदान बन गया। पुलिस की मौजूदगी के बावजूद दो गुटों के बीच जमकर लात-घूंसे चले, जिससे अस्पताल में अफरा-तफरी मच गई।
गांव से शुरू होकर अस्पताल तक पहुंचा विवाद
जानकारी के अनुसार, करहैया पंचायत के वार्ड-9 में दो पक्षों के बीच किसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ। पहले यह झगड़ा गांव की गलियों में हुआ, फिर मामला थाना तक पहुंचा। पुलिस ने दोनों पक्षों को शांत कराने के बाद मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेजा, लेकिन वहां स्थिति और बिगड़ गई।
इलाज के दौरान फिर भड़की हिंसा
अस्पताल में पहले से एक पक्ष के लोग भर्ती थे। इसी दौरान दूसरे पक्ष के लोग भी वहां पहुंचे। आरोप है कि जैसे ही वे अस्पताल परिसर में दाखिल हुए, पहले से मौजूद लोगों ने उन पर हमला कर दिया। देखते ही देखते दोनों ओर से मारपीट शुरू हो गई।
इस दौरान मरीज, उनके परिजन और स्वास्थ्यकर्मी डर के कारण इधर-उधर भागने लगे, जिससे अस्पताल में भगदड़ जैसे हालात बन गए।
विवाद की वजह पर अलग-अलग दावे
घटना को लेकर दोनों पक्ष अलग-अलग दावे कर रहे हैं। एक पक्ष का कहना है कि मकई के खेत में संदिग्ध वस्तु (गांजा) मिलने के बाद पूछताछ को लेकर विवाद शुरू हुआ।
वहीं दूसरे पक्ष का आरोप है कि उनकी महिला सदस्य (आंगनबाड़ी सेविका) के साथ अभद्र व्यवहार किया गया, जिससे विवाद बढ़ा।
इसके अलावा, शादी के निमंत्रण (कार्ड) को लेकर पुरानी रंजिश भी इस झगड़े की एक बड़ी वजह बताई जा रही है।
पुलिस के सामने ही बेकाबू हालात
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की। हालांकि, इस दौरान पुलिस और एक पक्ष के लोगों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। काफी मशक्कत के बाद पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग किया और सुरक्षा के बीच थाने ले जाया गया।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर पुलिस की मौजूदगी में इस तरह की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल परिसर में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं होने के कारण स्थिति बेकाबू हो गई।
जांच शुरू, दोषियों पर होगी कार्रवाई
किशनपुर थाना अध्यक्ष ज्ञान रंजन कुमार ने बताया कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और अस्पताल में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि छोटी-छोटी बातों पर बढ़ते विवाद किस तरह बड़े हिंसक रूप ले लेते हैं, और ऐसे मामलों में समय रहते हस्तक्षेप कितना जरूरी है।


