समाचार के मुख्य बिंदु: लंबी कानूनी कैद के बाद परिवार के बीच लौटे शरजील
- बड़ी राहत: दिल्ली दंगे के आरोपी शरजील इमाम को भाई की शादी में शामिल होने के लिए कोर्ट से 20 मार्च से 30 मार्च तक की विशेष पेरोल मिली।
- सफर का आगाज: बुधवार की सुबह जहानाबाद जिले के काको स्थित अपने पैतृक आवास से भारी सुरक्षा और परिजनों के साथ लखनऊ के लिए रवाना।
- शादी का कार्यक्रम: आज 25 मार्च की रात लखनऊ में भाई मुजम्मिल इमाम का निकाह; 28 मार्च को काको (जहानाबाद) में होगा भव्य रिसेप्शन।
- कानूनी पृष्ठभूमि: 2020 में CAA विरोध के दौरान भड़काऊ भाषण और दिल्ली दंगे भड़काने के आरोप में UAPA के तहत तिहाड़ जेल में थे बंद।
- पारिवारिक प्रोफाइल: IIT बॉम्बे से इंजीनियरिंग कर चुके शरजील के पिता दिवंगत अशरफ इमाम जेडीयू (JDU) के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं।
- VOB इनसाइट: 6 साल के लंबे अंतराल के बाद शरजील की घर वापसी ने जहानाबाद के काको में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है।
जहानाबाद | 25 मार्च, 2026
बिहार के जहानाबाद जिले का काको इलाका आज सुबह से ही सुर्खियों में है। दिल्ली दंगे और देशद्रोह जैसे गंभीर आरोपों का सामना कर रहे शरजील इमाम करीब 6 साल बाद जेल की चहारदीवारी से बाहर निकलकर अपने घर पहुँचे और आज अपने भाई की बारात में शामिल होने के लिए लखनऊ रवाना हो गए। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, तिहाड़ जेल में बंद शरजील को कोर्ट ने उनके भाई मुजम्मिल इमाम की शादी में शामिल होने के लिए 10 दिनों की मानवीय पेरोल मंजूर की है।
जहानाबाद से लखनऊ: खुशियों और बंदिशों के बीच का सफर
बुधवार की अलसुबह शरजील इमाम अपने भाई मुजम्मिल की बारात के साथ लखनऊ के लिए रवाना हुए। परिजनों के मुताबिक, मुजम्मिल का निकाह आज 25 मार्च की रात लखनऊ में संपन्न होना है। इसके बाद पूरी बारात वापस जहानाबाद लौटेगी, जहाँ 28 मार्च को काको स्थित उनके पैतृक गांव में प्रीतिभोज (रिसेप्शन) का आयोजन किया गया है। 2020 में गिरफ्तारी के बाद यह पहला मौका है जब शरजील अपने परिवार और समाज के बीच किसी मांगलिक कार्य में हिस्सा ले रहे हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य और कानूनी घटनाक्रम: एक नजर में
शरजील इमाम के मामले और उनकी वर्तमान पेरोल से जुड़ी विस्तृत जानकारी यहाँ विस्तार से दी गई है:
- पेरोल की अवधि: शरजील इमाम को 20 मार्च 2026 से 30 मार्च 2026 तक की पेरोल दी गई है। इस अवधि के समाप्त होते ही उन्हें पुनः दिल्ली की तिहाड़ जेल में सरेंडर करना होगा।
- आरोप और गिरफ्तारी: शरजील पर साल 2020 में CAA-NRC विरोध प्रदर्शनों के दौरान अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) और दिल्ली में भड़काऊ भाषण देने का आरोप लगा था। दिल्ली पुलिस ने उन पर UAPA (यूएपीए) और दंगा भड़काने की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
- शिक्षा और पृष्ठभूमि: शरजील इमाम की पहचान एक कुशाग्र छात्र के रूप में रही है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान IIT बॉम्बे से इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की थी और उसके बाद जेएनयू (JNU) में शोध कार्य कर रहे थे।
- राजनैतिक रसूख: शरजील का परिवार जहानाबाद की राजनीति में सक्रिय रहा है। उनके पिता स्वर्गीय अशरफ इमाम जेडीयू के कद्दावर नेता थे और जहानाबाद विधानसभा सीट से चुनाव भी लड़ चुके थे।
- पेरोल की शर्तें: पेरोल के दौरान शरजील को कोर्ट द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। उन पर किसी भी प्रकार के सार्वजनिक भाषण देने या सोशल मीडिया पर बयानबाजी करने की पाबंदी होने की संभावना है।
VOB का नजरिया: कानून, शिक्षा और विचारधारा का टकराव
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि शरजील इमाम का मामला भारतीय न्यायपालिका और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की बहस में एक बड़ा केंद्र रहा है।
- मानवीय आधार पर राहत: 6 साल की लंबी न्यायिक हिरासत के बाद भाई की शादी के लिए मिली यह पेरोल न्यायपालिका के मानवीय पक्ष को दर्शाती है।
- प्रतिभा और भटकाव: एक IIT स्नातक का देशद्रोह जैसे गंभीर आरोपों में जेल जाना उच्च शिक्षा और विचारधारा के बीच के संघर्ष को उजागर करता है।
- सामाजिक प्रतिक्रिया: जहानाबाद में उनके पिता के राजनैतिक कद के कारण शरजील की वापसी को लेकर स्थानीय लोगों में मिली-जुली प्रतिक्रिया है। एक वर्ग इसे पारिवारिक राहत के रूप में देख रहा है, तो दूसरा वर्ग कानूनी प्रक्रियाओं पर नजर बनाए हुए है।
30 मार्च को वापस सलाखों के पीछे
फिलहाल, मुजम्मिल इमाम की शादी को लेकर पूरे परिवार में खुशी का माहौल है और शरजील की मौजूदगी ने इस खुशी को दोगुना कर दिया है। 28 मार्च को होने वाले रिसेप्शन में जिले के कई गणमान्य लोगों के पहुँचने की उम्मीद है। 30 मार्च को पेरोल अवधि समाप्त होने के साथ ही शरजील को वापस दिल्ली जाना होगा। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस विवाह कार्यक्रम और शरजील इमाम से जुड़ी कानूनी अपडेट आप तक सबसे पहले पहुँचाता रहेगा।


