भागलपुर में ‘डिजिटल डकैती’ का महाखुलासा! फिंगरप्रिंट क्लोन बनाकर करोड़ों की ठगी करने वाला CSP संचालक गिरफ्तार; 320 लोगों के अंगूठों के निशान बरामद

समाचार के मुख्य बिंदु: पीरपैंती में हाई-टेक जालसाजी का भंडाफोड़

  • बड़ी कार्रवाई: भागलपुर के पीरपैंती थाना क्षेत्र अंतर्गत खोशलपुर में पुलिस की रेड; फिंगरप्रिंट क्लोनिंग गिरोह का मास्टरमाइंड राजकिशोर यादव पुलिस की गिरफ्त में।
  • बरामदगी का अंबार: छापेमारी के दौरान 320 लोगों के आधार नंबर और सिलिकॉन पेपर पर बने फिंगरप्रिंट क्लोन, लैपटॉप, फिंगरप्रिंट कैप्चर मशीन और दर्जनों एटीएम कार्ड बरामद।
  • ठगी का तरीका: लोगों के अंगूठों का क्लोन बनाकर उनके बैंक खातों से सरकारी योजनाओं (पेंशन, किसान सम्मान निधि आदि) की राशि उड़ाई जा रही थी।
  • करोड़ों का घोटाला: सिटी एसपी शैलेंद्र सिंह के अनुसार, प्रारंभिक जांच में करोड़ों रुपये की हेराफेरी की आशंका; साइबर थाना की टीम पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है।
  • VOB इनसाइट: ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित सीएसपी (CSP) केंद्रों के जरिए होने वाली यह ‘डिजिटल लूट’ गरीब जनता की गाढ़ी कमाई पर सीधा प्रहार है।

भागलपुर / पीरपैंती | 25 मार्च, 2026

​भागलपुर जिले के पीरपैंती थाना क्षेत्र से साइबर अपराध की एक ऐसी सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जिसने बैंकिंग सुरक्षा और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो बिना ओटीपी और बिना पासवर्ड के केवल फिंगरप्रिंट क्लोन के जरिए लोगों के बैंक खाते खाली कर रहा था। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब खोशलपुर निवासी प्रभात कुमार ने 23 मार्च को भागलपुर साइबर थाने में अपनी शिकायत दर्ज कराई।

खोशलपुर सीएसपी सेंटर पर पुलिस की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

​पीड़ित प्रभात कुमार द्वारा लिखित आवेदन दिए जाने के बाद सिटी एसपी शैलेंद्र सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने जाल बिछाते हुए खोशलपुर स्थित सीएसपी (ग्राहक सेवा केंद्र) पर अचानक छापेमारी की। केंद्र संचालक राजकिशोर यादव पुलिस को देखकर घबरा गया और पूछताछ के दौरान संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। जब पुलिस ने उसके केंद्र की गहन तलाशी ली, तो वहां आधुनिक साइबर अपराध के तमाम उपकरण और सामग्री बरामद हुई।

बरामद सामग्री और अपराध की विस्तृत कार्यप्रणाली

​पुलिस ने छापेमारी के दौरान जो सामान बरामद किया है, वह किसी फिल्म की पटकथा जैसा प्रतीत होता है। इस गिरोह द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे उपकरणों का विवरण नीचे दिया गया है:

  • सिलिकॉन फिंगरप्रिंट क्लोन: पुलिस को सिलिकॉन पेपर पर तैयार किए गए लगभग 320 लोगों के फिंगरप्रिंट क्लोन मिले हैं। इन क्लोन्स के साथ संबंधित लोगों के आधार नंबर भी लिखे हुए थे।
  • इलेक्ट्रॉनिक उपकरण: मौके से एक लैपटॉप, फिंगरप्रिंट कैप्चर मशीन और क्लोनिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले अन्य आधुनिक उपकरण जब्त किए गए हैं।
  • बैंकिंग दस्तावेज: बड़ी संख्या में अलग-अलग लोगों के बैंक पासबुक, एटीएम कार्ड और चेकबुक भी बरामद किए गए हैं, जिनका उपयोग अवैध निकासी के लिए किया जाता था।
  • अपराध का तरीका: आरोपी राजकिशोर यादव आधार सक्षम भुगतान प्रणाली (AePS) की खामियों का फायदा उठाता था। वह ग्रामीणों के अंगूठों के निशान को सिलिकॉन पेपर पर कॉपी कर लेता था और फिर उन क्लोन किए गए निशानों का उपयोग कर बैंक से पैसे निकाल लेता था। इसके लिए उसे ग्राहक की भौतिक उपस्थिति की भी आवश्यकता नहीं पड़ती थी।

VOB का नजरिया: क्या सुरक्षित है आपका आधार और बैंक खाता?

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि पीरपैंती की यह घटना ग्रामीण बैंकिंग व्यवस्था की एक बड़ी कमजोरी को उजागर करती है।

  1. सरकारी योजनाओं पर प्रहार: यह गिरोह मुख्य रूप से उन गरीबों को निशाना बना रहा था जिनके खातों में वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन या किसान सम्मान निधि जैसी सरकारी सहायता राशि आती थी।
  2. सीएसपी केंद्रों की निगरानी: जिले में चल रहे सीएसपी केंद्रों की नियमित जांच और उनके लाइसेंस की समीक्षा अनिवार्य होनी चाहिए। बिना सख्त मॉनिटरिंग के ऐसे केंद्र अपराध के अड्डे बनते जा रहे हैं।
  3. जन-जागरूकता की कमी: ग्रामीणों को यह समझने की जरूरत है कि वे अपना अंगूठा किसी भी मशीन पर लगाने से पहले उसकी प्रामाणिकता की जांच अवश्य करें। आधार बायोमेट्रिक्स को लॉक करने की सुविधा के बारे में भी जागरूकता बढ़ानी होगी।

गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी

​सिटी एसपी शैलेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया है कि गिरफ्तार राजकिशोर यादव इस बड़े सिंडिकेट का केवल एक हिस्सा हो सकता है। पुलिस अब उन लोगों की तलाश कर रही है जो उसे सिलिकॉन क्लोन बनाने की तकनीक और डेटा उपलब्ध कराते थे। इस मामले में करोड़ों रुपये के गबन की आशंका है, जिसकी जड़ें जिले के बाहर भी फैली हो सकती हैं। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस साइबर घोटाले की हर नई अपडेट और पीड़ितों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया पर अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा।

  • Related Posts

    टीएमबीयू में ‘प्रमोशन’ की खबर पर मचा बवाल! विश्वविद्यालय प्रशासन ने दावों को बताया सफेद झूठ; कुलसचिव ने मीडिया रिपोर्ट्स का किया कड़ा खंडन

    Share Add as a preferred…

    Continue reading
    भोजपुर में नीतीश कुमार का ‘विकास-धमाका’! 466 करोड़ की 721 योजनाओं की सौगात; आरा बनेगा ‘मेडिकल हब’, 1 करोड़ नौकरियों का मिशन शुरू

    Share Add as a preferred…

    Continue reading