बिहार सरकार की कलाकार पेंशन योजना कलाकारों के लिए वरदान साबित

बिहार सरकार की मुख्यमंत्री कलाकार पेंशन योजना प्रदेश के कलाकारों के जीवन को बेहतर और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने में अहम भूमिका निभा रही है। इस योजना के तहत कलाकारों को 3,000 रुपये प्रति माह पेंशन के रूप में सहायता दी जा रही है, ताकि वे अपने बुढ़ापे के दिनों में सम्मानजनक जीवन यापन कर सकें।

कलाकारों ने साझा किए अनुभव

कई अलग-अलग क्षेत्रों के कलाकारों ने पेंशन मिलने के बाद अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि यह योजना उनके आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ आत्मविश्वास भी बढ़ा रही है, जिससे वे राज्य और देश के बाहर अपनी कला का प्रदर्शन कर सकें।

कवि विवेकानंद: सम्मानजनक जीवन की राह

किशनगंज जिले के 59 वर्षीय कवि व लेखक विवेकानंद ठाकुर ने बताया कि पेंशन मिलने से उनका जीवन सम्मानजनक हुआ है। पेशे से कवि विवेकानंद अब तक 8 से अधिक किताबें लिख चुके हैं। हाल ही में उन्होंने स्थानीय भाषा सुरजापुरी में ‘कुकडूमर्कूं’ नामक किताब प्रकाशित की, जिसे इस भाषा में पहला काव्य पुस्तक माना जा रहा है। इसके अलावा उनकी किताब फेसबुक का रमन एक्सप्रेस भी काफी लोकप्रिय हुई है।

घटमवादक बासुकीनाथ: जीवनदान समान योजना

जहानाबाद जिले के 54 वर्षीय घटमवादक बासुकीनाथ ने कहा कि इस योजना ने बुढ़ापे में उन्हें आत्मनिर्भर बनाया है। पेशे से तबलावादक बासुकीनाथ बिहार सहित अन्य जगहों पर अपनी कला का प्रदर्शन करते हैं। उन्होंने कहा कि अब उन्हें अपने जीवन-व्यापन के लिए किसी पर निर्भर होने की जरूरत नहीं है और वे सिर उठाकर जी सकते हैं।

कलाकारों ने इस योजना को समाज में उनकी पहचान, सम्मान और आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने वाला एक महत्वपूर्ण कदम बताया।


 

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