मनरेगा में पारदर्शिता को बढ़ावा: सोशल ऑडिट के लिए ₹9.47 करोड़ की स्वीकृति, पंचायत स्तर पर बढ़ेगी जवाबदेही

पटना, बिहार में मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के तहत कराए जा रहे विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। ग्रामीण विकास विभाग ने सोशल ऑडिट (सामाजिक अंकेक्षण) के लिए 9 करोड़ 47 लाख 84 हजार 111 रुपये की राशि को अंतिम स्वीकृति दे दी है। इससे राज्य भर की ग्राम पंचायतों में किए गए कार्यों की निष्पक्ष जांच का रास्ता और मजबूत होगा।

पंचायत स्तर पर होगी पारदर्शी जांच

इस राशि के जारी होने के बाद मनरेगा के तहत हुए विकास कार्यों की सोशल ऑडिट प्रक्रिया को गति मिलेगी। सरकार का मानना है कि इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता आएगी और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही भी तय होगी।

राज्य के सभी जिलों में सामाजिक अंकेक्षण सोसायटी का गठन किया गया है, जो पंचायत स्तर पर योजनाओं की समीक्षा और ऑडिट का कार्य करेगी। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंचे और किसी तरह की अनियमितता न हो।

केंद्र से मिली थी 10 करोड़ से अधिक की स्वीकृति

वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए भारत सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने सामाजिक अंकेक्षण के लिए 10 करोड़ 12 लाख 41 हजार 500 रुपये की स्वीकृति दी थी। इसमें से बिहार सरकार के ग्रामीण विकास विभाग ने 9.47 करोड़ रुपये की राशि को मंजूरी देते हुए आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

अधिकारियों के अनुसार, इस राशि के उपयोग से पंचायतों में हुए कार्यों का मूल्यांकन बेहतर तरीके से किया जा सकेगा और विकास कार्यों की गुणवत्ता में भी सुधार आएगा।

मनरेगा: ग्रामीण विकास की रीढ़

मनरेगा का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा को मजबूत करना और टिकाऊ परिसंपत्तियों का निर्माण करना है। इसके तहत जल संरक्षण, कृषि विकास, ग्रामीण बुनियादी ढांचे का निर्माण और स्वच्छता से जुड़े कार्य किए जाते हैं।

योजना के अंतर्गत तालाब और कुओं का निर्माण, चेक डैम, पौधरोपण, ग्रामीण सड़कें, आंगनवाड़ी भवन, स्कूल शौचालय और खेल मैदान जैसे कार्य शामिल हैं। साथ ही, प्रत्येक इच्छुक वयस्क को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों की अकुशल मजदूरी उपलब्ध कराने का प्रावधान भी है।

भ्रष्टाचार पर लगेगी लगाम

ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि ग्राम पंचायतों में हुए कार्यों का निष्पक्ष और पारदर्शी सोशल ऑडिट बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

उन्होंने यह भी कहा कि सोशल ऑडिट से भ्रष्टाचार पर प्रभावी रोक लगेगी और यह सुनिश्चित होगा कि विकास कार्यों का लाभ सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचे।

निष्कर्ष:
बिहार सरकार का यह कदम मनरेगा के क्रियान्वयन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। सोशल ऑडिट के जरिए न सिर्फ योजनाओं की निगरानी मजबूत होगी, बल्कि ग्रामीण विकास कार्यों की गुणवत्ता और भरोसे में भी वृद्धि होगी।

  • Related Posts

    बिहार पुलिस की बड़ी कार्रवाई: अंतरराज्यीय ड्रग्स नेटवर्क का भंडाफोड़, 5 तस्कर गिरफ्तार, लाखों की हेरोइन बरामद

    Share Add as a preferred…

    Continue reading
    सहरसा में कलेजा चीर देने वाली घटना! पोते का शव देखते ही दादा ने तोड़ा दम; एक ही आंगन से उठेंगी दो अर्थियां, मातम में डूबा सिमरी बख्तियारपुर

    Share Add as a preferred…

    Continue reading