सहरसा में कलेजा चीर देने वाली घटना! पोते का शव देखते ही दादा ने तोड़ा दम; एक ही आंगन से उठेंगी दो अर्थियां, मातम में डूबा सिमरी बख्तियारपुर

HIGHLIGHTS: चपरांव गांव में पसरा सन्नाटा, नियति का क्रूर प्रहार; दो दिनों से लापता था 16 वर्षीय शिवधन, पोते के वियोग में दादा का भी थमा दिल

  • हृदयविदारक हादसा: सहरसा जिले के बलवाहाट थाना क्षेत्र में पोते की मौत का सदमा बर्दाश्त नहीं कर सके दादा; चंद घंटों के भीतर दो मौतों से परिवार तबाह।
  • लापता किशोर: रविवार से लापता था 16 वर्षीय शिवधन कुमार; परिजनों ने काफी खोजबीन के बाद थाने में दर्ज कराई थी गुमशुदगी।
  • दुखद अंत: मंगलवार सुबह गांव के ही पोखर में उतराता मिला किशोर का शव; पुलिस ने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा।
  • शोक की लहर: पोते की तलाश में पहले से बीमार चल रहे 65 वर्षीय बंगाली सादा ने जैसे ही शव देखा, उनके प्राण पखेरू उड़ गए।
  • VOB इनसाइट: ग्रामीण अंचल में दादा-पोते के प्रगाढ़ प्रेम की यह परिणति समाज को झकझोर देने वाली है; गांव में नहीं जला किसी के घर चूल्हा।

सहरसा / सिमरी बख्तियारपुर | 25 मार्च, 2026

​बिहार के सहरसा जिले से एक ऐसी मार्मिक खबर सामने आई है जिसे सुनकर पत्थर दिल भी पसीज जाए। सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल के बलवाहाट थाना अंतर्गत चपरांव गांव (वार्ड नंबर 14) में मंगलवार को कुदरत का एक ऐसा क्रूर खेल देखने को मिला, जहाँ एक ही परिवार के दो चिराग बुझ गए। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, एक किशोर पोते की मौत का गम उसके बुजुर्ग दादा के लिए इतना भारी पड़ा कि उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया। पूरा गांव इस वक्त गहरे शोक में डूबा है और हर आने-जाने वाले की आंखें नम हैं।

रविवार से शुरू हुआ था ‘इंतजार’ का दर्दनाक सफर

​घटनाक्रम की शुरुआत रविवार दोपहर से हुई थी, जब गांव के भूपेंद्र सादा का 16 वर्षीय पुत्र शिवधन कुमार घर से खेलने के लिए निकला था। देर शाम तक जब वह घर वापस नहीं लौटा, तो परिजनों की चिंता बढ़ने लगी। रिश्तेदारों और आसपास के इलाकों में काफी खोजबीन की गई, लेकिन शिवधन का कहीं कोई सुराग नहीं मिला। सोमवार को परिजनों ने थक-हारकर बलवाहाट थाने में किशोर की गुमशुदगी की सूचना दी। दो दिनों से परिवार की आंखों से नींद गायब थी और सबसे ज्यादा परेशान थे उसके दादा बंगाली सादा, जिनका अपने पोते से गहरा लगाव था।

VOB डेटा चार्ट: चपरांव (सहरसा) त्रासदी — पूरी जानकारी

 

पोखर के किनारे टूटा ‘उम्मीदों’ का आखिरी सहारा

​मंगलवार सुबह जब ग्रामीण पोखर की ओर गए, तो वहां एक शव उतराता हुआ देखा गया। पास जाकर पहचान की गई तो वह शिवधन कुमार का ही शरीर था। जैसे ही यह खबर गांव में फैली, सैकड़ों की भीड़ उमड़ पड़ी। सूचना पाकर बलवाहाट थाना पुलिस भी मौके पर पहुँच गई। इसी बीच, घर में पोते की सलामती की दुआएं मांग रहे दादा बंगाली सादा को जैसे ही यह खबर मिली कि शिवधन का शव मिल गया है, वे बदहवास होकर वहां पहुँचे।

​पोते के निर्जीव शरीर को देखते ही 65 वर्षीय बंगाली सादा का कलेजा फट गया। वे इस सदमे को बर्दाश्त नहीं कर सके और वहीं गिर पड़े। परिजनों और ग्रामीणों ने उन्हें संभालने की कोशिश की, लेकिन तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। एक ही साथ दो मौतों की खबर ने परिवार के ऊपर दुखों का पहाड़ तोड़ दिया है।

VOB का नजरिया: ग्रामीण सुरक्षा और स्वास्थ्य जागरूकता का सवाल

​’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि यह घटना केवल एक व्यक्तिगत परिवार की क्षति नहीं, बल्कि एक सामाजिक त्रासदी है।

  1. पोखरों के पास सुरक्षा: बिहार के ग्रामीण इलाकों में बच्चे अक्सर पोखरों के पास खेलते हैं। सुरक्षा घेरा या चेतावनी न होने के कारण ऐसी दुर्घटनाएं अक्सर होती रहती हैं। प्रशासन को मानसून से पहले ग्रामीण जलाशयों की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए।
  2. बुजुर्गों का मानसिक स्वास्थ्य: बंगाली सादा पहले से ही पोते के लापता होने से बीमार थे। ऐसी स्थितियों में परिवार के बुजुर्गों को विशेष देखभाल और सांत्वना की जरूरत होती है ताकि उन्हें अचानक लगने वाले सदमे से बचाया जा सके।
  3. पुलिस की भूमिका: किशोर के लापता होने के बाद पुलिस की सक्रियता और ग्रामीण समन्वय को और बेहतर करने की आवश्यकता है, ताकि समय रहते बच्चों को रेस्क्यू किया जा सके।

सुशासन और संवेदना का संगम

​बलवाहाट थाना पुलिस ने शिवधन के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की छानबीन कर रही है कि यह दुर्घटना थी या कोई साजिश। दादा-पोते की एक साथ अंतिम विदाई ने पूरे जिले को गमगीन कर दिया है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस पीड़ित परिवार के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता है और जिला प्रशासन से मांग करता है कि आपदा कोष से पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा प्रदान किया जाए।

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