
पटना, राजधानी पटना के गांधी मैदान में 22 से 24 मार्च तक आयोजित बिहार दिवस समारोह इस बार कई मायनों में खास रहा। जहां एक ओर सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने लोगों को आकर्षित किया, वहीं कृषि विभाग का पवेलियन आधुनिक तकनीक और नवाचार के कारण खास चर्चा में रहा। इस पवेलियन ने बिहार की बदलती कृषि व्यवस्था और तकनीकी प्रगति की एक नई तस्वीर प्रस्तुत की।
आधुनिक तकनीक से खेती में आ रहा बदलाव
कृषि विभाग के पवेलियन में खेती से जुड़ी नवीनतम तकनीकों और मशीनों का प्रदर्शन किया गया, जिसने किसानों और आम लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। यहां बताया गया कि कैसे आधुनिक उपकरणों और वैज्ञानिक तरीकों के इस्तेमाल से किसान अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ा सकते हैं।
सरकार की विभिन्न योजनाओं और सब्सिडी के जरिए किसानों को इन तकनीकों से जोड़ने के प्रयासों की भी जानकारी दी गई। इससे यह स्पष्ट हुआ कि बिहार में कृषि अब पारंपरिक सीमाओं से निकलकर आधुनिकता की ओर तेजी से बढ़ रही है।
डिजिटल पहल से किसानों को मिल रही नई सुविधा
पवेलियन में ‘बिहार कृषि ऐप’, डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री जैसी डिजिटल पहलों को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया। इन माध्यमों से किसानों को योजनाओं की जानकारी, फसल से जुड़े आंकड़े और सरकारी सहायता सीधे उपलब्ध हो रही है।
आगंतुकों को बताया गया कि इन डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए खेती अब अधिक व्यवस्थित, पारदर्शी और लाभकारी बन रही है।
ड्रोन और मिट्टी जांच तकनीक बनी आकर्षण का केंद्र
पौध संरक्षण से जुड़े स्टॉल पर कृषि ड्रोन के जरिए कीटनाशक और तरल उर्वरकों के छिड़काव की जानकारी दी गई, जिसने खासकर युवाओं और किसानों को प्रभावित किया। इसके अलावा मिट्टी जांच प्रयोगशाला के स्टॉल पर भूमि की गुणवत्ता जांचने और उसके अनुसार खेती करने के तरीकों को समझाया गया।
जैविक खेती और उन्नत बीजों पर जोर
बिहार राज्य जैविक मिशन के स्टॉल पर प्राकृतिक खेती के महत्व और उसके लाभों के बारे में जानकारी दी गई। वहीं बिहार राज्य बीज निगम के स्टॉल पर उन्नत बीजों के इस्तेमाल से अधिक उत्पादन कैसे हासिल किया जा सकता है, यह समझाया गया।
इसके साथ ही किसानों को भूमि की सेहत बनाए रखने और टिकाऊ खेती के तरीकों को भी रचनात्मक तरीके से प्रस्तुत किया गया।
कृषि उत्पाद और लघु उद्योगों की झलक
पवेलियन में विभिन्न कृषि उत्पादों जैसे उन्नत बीज, फल-फूल के पौधे, मोटे अनाज, शहद, मशरूम और अचार आदि का भी प्रदर्शन किया गया। इन स्टॉल्स ने न केवल उत्पादों की विविधता दिखाई, बल्कि कृषि आधारित लघु एवं कुटीर उद्योगों की सफलता की कहानियों को भी सामने रखा।
बदलते बिहार की तस्वीर पेश करता पवेलियन
कृषि विभाग का यह पवेलियन बिहार की तेजी से आधुनिक होती खेती और विकास की ओर बढ़ते राज्य की कहानी को बखूबी दर्शाता नजर आया। यहां आने वाले लोगों ने महसूस किया कि अब बिहार की कृषि तकनीक, नवाचार और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ रही है।
निष्कर्ष:
बिहार दिवस समारोह में कृषि विभाग की यह प्रस्तुति इस बात का संकेत है कि राज्य में खेती का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। आधुनिक तकनीक, डिजिटल पहल और सरकारी सहयोग के जरिए बिहार के किसान अब अधिक सशक्त और आत्मनिर्भर बनते जा रहे हैं, जो राज्य के समग्र विकास के लिए एक सकारात्मक संकेत है।


