
HIGHLIGHTS: सिल्क सिटी से राजधानी तक बिहार दिवस की धूम; बुनियादी ढांचे में लंबी छलांग और ‘पपोन’ की रूहानी आवाज के साथ तीन दिवसीय महोत्सव संपन्न
- भव्य समापन: पटना के गांधी मैदान में आयोजित 114वां बिहार दिवस समारोह मंगलवार को संपन्न हुआ; प्रदेश के गौरव और विकास गाथा का भव्य प्रदर्शन।
- बड़ा बयान: उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा— “बिहार अब बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास में छलांग लगा रहा है, उन्नत बिहार का सपना अब साकार हो रहा है।”
- भविष्य का रोडमैप: आगामी वर्षों में युवाओं के लिए स्वरोजगार और तकनीक आधारित गवर्नेंस (Tech-based Governance) को सरकार देगी सर्वोच्च प्राथमिकता।
- शिक्षा में क्रांति: शिक्षा मंत्री सुनील कुमार और ACS डॉ. बी. राजेन्दर ने ‘मॉडल स्कूल’ और ‘निपुण बिहार’ योजना के जरिए बदलते शैक्षणिक परिवेश की चर्चा की।
- सांस्कृतिक धमाका: समापन समारोह में मशहूर पार्श्व गायक पपोन (अंगराग महंत) की प्रस्तुति ने दर्शकों को झूमने पर मजबूर किया।
- VOB इनसाइट: 114 साल के सफर के बाद बिहार अब ‘पलायन’ के बजाय ‘निवेश’ और ‘नवाचार’ के केंद्र के रूप में अपनी पहचान बना रहा है।
पटना | 25 मार्च, 2026
बिहार की अस्मिता, संस्कृति और विकास के संकल्प का महापर्व ‘114वां बिहार दिवस’ मंगलवार को राजधानी पटना के गांधी मैदान में एक नई ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ। ‘उन्नत बिहार, उज्ज्वल बिहार’ के मूल मंत्र के साथ आयोजित इस तीन दिवसीय समारोह ने राज्य की बदलती तस्वीर को दुनिया के सामने पेश किया। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) की विशेष रिपोर्ट के अनुसार, समापन समारोह के मुख्य मंच से उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने न केवल राज्य की उपलब्धियों का लेखा-जोखा पेश किया, बल्कि 2047 के विकसित भारत में बिहार की अग्रणी भूमिका का खाका भी खींचा।
“बिहार की छलांग गौरवान्वित करने वाली”: सम्राट चौधरी
समारोह के मुख्य मंच से जनता को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार अब पिछड़ेपन की बेड़ियों को तोड़कर औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण की ओर बढ़ चला है।
उनके संबोधन के प्रमुख बिंदु:
- औद्योगिक प्रगति: राज्य में निवेश के नए अवसर पैदा हो रहे हैं और बुनियादी ढांचे में जो सुधार हुआ है, वह पूरे देश के लिए एक उदाहरण है।
- युवा और तकनीक: सरकार का अगला बड़ा लक्ष्य युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ना है। इसके लिए तकनीक आधारित गवर्नेंस को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से लोगों तक पहुँचे।
- सांस्कृतिक विरासत: बिहार की 114 वर्षों की विकास यात्रा में हमारी संस्कृति और आधुनिकता का अद्भुत मेल है।
शिक्षा की नई इबारत: ‘निपुण बिहार’ और ‘मॉडल स्कूल’
समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने राज्य के स्कूलों में हो रहे क्रांतिकारी बदलावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि किस तरह सरकारी स्कूलों की आधारभूत संरचना को निजी स्कूलों के समकक्ष लाया जा रहा है।
शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव (ACS) डॉ. बी. राजेन्दर ने ‘निपुण बिहार’ अभियान की सफलता का जिक्र करते हुए कहा कि प्राथमिक स्तर पर बच्चों को भाषा और गणित में दक्ष बनाने की दिशा में बिहार देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। ‘मॉडल स्कूलों’ की स्थापना से ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को अब वैश्विक स्तर की सुविधाएं मिल रही हैं।
पपोन की सुरमयी शाम: गांधी मैदान में गूंजी रूहानी आवाज
बिहार दिवस के अंतिम दिन की सांस्कृतिक संध्या बेहद यादगार रही। सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक पपोन (अंगराग महंत) ने अपनी रूहानी आवाज से गांधी मैदान में मौजूद हजारों की भीड़ को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुति ने शास्त्रीय और लोक संगीत के एक अनूठे मिश्रण को पेश किया, जो बिहार की विविधतापूर्ण संस्कृति से मेल खाता है। इस दौरान श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल और रविंद्र भवन में भी विभिन्न कलात्मक आयोजन हुए, जिन्होंने पटना को तीन दिनों तक कला के केंद्र में तब्दील कर रखा था।
VOB का नजरिया: क्या ‘उन्नत बिहार’ का दावा धरातल पर उतरेगा?
’द वॉयस ऑफ बिहार’ (VOB) का मानना है कि 114वां बिहार दिवस केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि राज्य के आत्मविश्वास का प्रतीक है।
- इंफ्रास्ट्रक्चर की ताकत: एनएच और राज्य मार्गों का जाल बिछने से बिहार में कनेक्टिविटी बढ़ी है, जो उद्योगों के लिए प्राथमिक शर्त है।
- शिक्षा बनाम पलायन: अगर ‘मॉडल स्कूल’ और स्वरोजगार के दावे सफल होते हैं, तो मेधावी युवाओं का पलायन कम होगा, जो राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा प्लस पॉइंट होगा।
- गवर्नेंस में बदलाव: तकनीक का बढ़ता उपयोग भ्रष्टाचार पर लगाम लगाएगा और ‘उज्ज्वल बिहार’ के संकल्प को सच करने में मदद करेगा।
सुशासन और विकास का नया संकल्प
बिहार दिवस 2026 का समापन एक नए संकल्प के साथ हुआ है। उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उनकी टीम ने जो रोडमैप पेश किया है, वह बिहार को राष्ट्रीय पटल पर एक नई पहचान दिलाने की क्षमता रखता है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ राज्य के इस गौरवमयी सफर और विकास की हर जमीनी हकीकत को आप तक पहुँचाता रहेगा।


