लालू प्रसाद यादव को दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका: ‘लैंड फॉर जॉब’ मामले में FIR रद्द करने की याचिका खारिज

नई दिल्ली | 24 मार्च 2026 राष्ट्रीय जनता दल (राजद) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को ‘जमीन के बदले नौकरी’ (Land for Job) मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने इस मामले में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। कोर्ट ने याचिका को निराधार बताते हुए स्पष्ट किया कि मामले की जांच जारी रहेगी।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला वर्ष 2004 से 2009 के बीच का है, जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उस दौरान रेलवे में कुछ नियुक्तियों में अनियमितताएं की गईं और नौकरी देने के बदले उम्मीदवारों से जमीन के टुकड़े लिए गए, जिन्हें कथित तौर पर यादव परिवार या उनके करीबी लोगों के नाम पर ट्रांसफर कराया गया।

इस पूरे मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा की जा रही है।

अदालत में क्या हुई बहस?

सुनवाई के दौरान लालू यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने दलील दी कि यह फैसले उनके आधिकारिक कार्यकाल के दौरान लिए गए थे। ऐसे में किसी भी तरह की जांच शुरू करने से पहले संबंधित प्रावधानों के तहत पूर्व स्वीकृति (सैंक्शन) जरूरी थी।

वहीं, सीबीआई की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने इस तर्क का विरोध किया। उन्होंने कहा कि रेलवे में नियुक्तियों का निर्णय सीधे मंत्री नहीं, बल्कि संबंधित अधिकारियों द्वारा लिया जाता है। इसलिए इस मामले में धारा 17A के तहत सुरक्षा का लाभ नहीं दिया जा सकता।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने सीबीआई की एफआईआर को वैध ठहराया और उसे रद्द करने से साफ इनकार कर दिया।

2022 में दर्ज हुई थी FIR

सीबीआई ने इस मामले में 18 मई 2022 को एफआईआर दर्ज की थी। इसमें लालू यादव के साथ उनकी पत्नी, दो बेटियों और कुछ अज्ञात सरकारी अधिकारियों व निजी व्यक्तियों को आरोपी बनाया गया है।

याचिका में यह भी कहा गया था कि कथित घटनाओं के करीब 14 साल बाद एफआईआर दर्ज की गई, जो कानून का दुरुपयोग है। हालांकि कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।

बढ़ सकती हैं कानूनी मुश्किलें

हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद अब साफ हो गया है कि इस मामले की जांच आगे भी जारी रहेगी। ऐसे में लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार की कानूनी चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

यह फैसला राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे न सिर्फ जांच एजेंसियों को मजबूती मिली है, बल्कि आने वाले समय में इस मामले की सुनवाई और तेज होने की संभावना भी जताई जा रही है।

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