
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष को लेकर देश और दुनिया के सामने मौजूद चुनौतियों पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि यह युद्ध सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर असर डाल रहा है और इसके दुष्प्रभाव लंबे समय तक बने रह सकते हैं।
युद्ध से वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया
प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष ने दुनिया भर में ऊर्जा संकट को गंभीर बना दिया है। पेट्रोल, डीजल, गैस और उर्वरक की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिसका असर भारत पर भी पड़ रहा है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और ईंधन आपूर्ति को बनाए रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं कर रही है।
भारत का फोकस: संवाद और कूटनीति
पीएम मोदी ने बताया कि भारत ने इस संकट को देखते हुए सभी प्रमुख देशों से संपर्क साधा है।
इन देशों के साथ लगातार बातचीत जारी है, ताकि संवाद और कूटनीति के जरिए स्थिति को सामान्य किया जा सके। उन्होंने कहा कि भारत हमेशा शांति का पक्षधर रहा है और इस दिशा में प्रयास जारी रखेगा।
हॉर्मुज स्ट्रेट बना चिंता का केंद्र
प्रधानमंत्री ने बताया कि में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक प्रमुख मार्ग है।
इस क्षेत्र में कई जहाज फंसे हुए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय क्रू मेंबर्स भी मौजूद हैं। उनकी सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है।
प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि खाड़ी देशों में करीब 1 करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा और रोजगार भारत सरकार के लिए बड़ी चिंता का विषय है।
उन्होंने राज्य सरकारों से भी अपील की कि संकट के समय प्रवासी मजदूरों का विशेष ध्यान रखा जाए और उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिले।
हर चुनौती के लिए तैयार रहने की अपील
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से अपील करते हुए कहा कि यह संकट अलग प्रकार का है और इसके समाधान भी अलग तरीके से खोजे जा रहे हैं।
उन्होंने कहा,
“हमें धैर्य, संयम और सतर्कता के साथ हर चुनौती का सामना करना होगा। हालात तेजी से बदल रहे हैं, इसलिए हर स्थिति के लिए तैयार रहना जरूरी है।”
सरकार ने किए पर्याप्त इंतजाम
पीएम मोदी ने आश्वासन दिया कि भारत के पास कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार है और सप्लाई चेन को बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
साथ ही सरकार LPG के साथ-साथ PNG जैसी वैकल्पिक गैस सप्लाई पर भी जोर दे रही है, ताकि किसी एक स्रोत पर निर्भरता कम की जा सके।
निष्कर्ष
राज्यसभा में प्रधानमंत्री का यह बयान साफ संकेत देता है कि भारत सरकार मध्य-पूर्व संकट को लेकर पूरी तरह सतर्क है। वैश्विक हालात भले ही चुनौतीपूर्ण हों, लेकिन सरकार रणनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर लगातार काम कर रही है, ताकि देश की अर्थव्यवस्था और नागरिकों पर इसका असर कम से कम पड़े।


