IAS संजीव हंस पर CBI का शिकंजा: ₹1 करोड़ रिश्वत मामले में नई FIR, पुराने आरोपों ने भी बढ़ाई मुश्किलें

पटना/नई दिल्ली — बिहार कैडर के चर्चित आईएएस अधिकारी संजीव हंस एक बार फिर जांच एजेंसियों के रडार पर आ गए हैं। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने उनके खिलाफ कथित तौर पर ₹1 करोड़ की रिश्वत लेने के मामले में नई एफआईआर दर्ज की है। यह मामला उस समय का बताया जा रहा है, जब वे केंद्र सरकार में मंत्री के निजी सचिव के रूप में कार्यरत थे।

CBI का आरोप: बिल्डर को पहुंचाया गया फायदा

CBI के अनुसार, मुंबई की एक रियल एस्टेट कंपनी को फायदा पहुंचाने के बदले रिश्वत का लेनदेन किया गया। आरोप है कि राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) में लंबित मामले में राहत दिलाने के लिए यह सौदा हुआ था।

जांच एजेंसी का कहना है कि रिश्वत की रकम सीधे नहीं ली गई, बल्कि बिचौलियों और हवाला नेटवर्क के जरिए लेनदेन किया गया। इसके लिए कथित तौर पर कोडवर्ड का इस्तेमाल भी किया गया था।

निर्णयों को प्रभावित करने का आरोप

CBI की FIR में यह भी आरोप लगाया गया है कि अधिकारी ने बिल्डर के पक्ष में सुनवाई की तारीखों को प्रभावित किया और कंपनी से जुड़े एक मामले में गिरफ्तारी टालने में मदद की।

हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि अभी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

पहले से विवादों में घिरे रहे हैं अधिकारी

संजीव हंस का नाम इससे पहले भी कई मामलों में सामने आ चुका है। आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने वर्ष 2024 में उन्हें गिरफ्तार किया था।

करीब 10 महीने जेल में रहने के बाद उन्हें 2025 में जमानत मिली थी। इसके बाद जनवरी 2026 में बिहार सरकार ने उन्हें सेवा में बहाल कर राजस्व बोर्ड में पदस्थापित किया।

बेनामी संपत्ति के आरोप भी

पूर्व में हुई जांच में उनके और एक पूर्व विधायक के बीच कथित आर्थिक लेनदेन और बेनामी संपत्ति का मामला भी सामने आया था। छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में नकदी, सोना-चांदी और निवेश से जुड़े दस्तावेज मिलने की बात सामने आई थी।

यौन शोषण का आरोप भी जुड़ा

इस पूरे विवाद के बीच एक महिला द्वारा लगाए गए यौन शोषण के आरोपों ने भी मामले को और संवेदनशील बना दिया था। हालांकि, इन मामलों में भी जांच प्रक्रिया जारी है।

बचाव पक्ष ने आरोपों को बताया निराधार

संजीव हंस के वकील ने CBI द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि यह मामला तथ्यों पर आधारित नहीं है और अदालत में टिक नहीं पाएगा।

उन्होंने दावा किया कि जांच एजेंसी द्वारा लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं।

आगे क्या?

CBI की इस नई कार्रवाई के बाद संजीव हंस की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। अब जांच एजेंसी मामले की गहराई से पड़ताल कर रही है और आने वाले दिनों में पूछताछ या अन्य कार्रवाई हो सकती है।

निष्कर्ष

संजीव हंस पर लगे ताजा आरोपों ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था और पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सभी की नजर जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई और अदालत के फैसले पर टिकी हुई है।

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