मुजफ्फरपुर में सामुदायिक भवन बना शराब का ठिकाना, छापेमारी में भारी मात्रा में बीयर बरामद

मुजफ्फरपुर — बिहार में शराबबंदी के बीच मुजफ्फरपुर जिले से चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां सरकारी सामुदायिक भवन का इस्तेमाल अवैध शराब के भंडारण और कारोबार के लिए किया जा रहा था। उत्पाद विभाग की टीम ने छापेमारी कर बड़ी मात्रा में बीयर बरामद की है, हालांकि आरोपी मौके से फरार हो गए।

गुप्त सूचना पर हुई कार्रवाई

जानकारी के अनुसार, सरैया थाना क्षेत्र के गोरीगामा डीह पंचायत के आनंदपुर गंगोलिया गांव स्थित सामुदायिक भवन में शराब के अवैध कारोबार की सूचना उत्पाद विभाग को मिली थी।

सूचना मिलते ही उत्पाद इंस्पेक्टर दीपक कुमार सिंह अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और छापेमारी शुरू की।

भारी मात्रा में शराब बरामद

छापेमारी के दौरान सामुदायिक भवन से भारी मात्रा में बीयर और विदेशी शराब बरामद की गई। अधिकारियों के अनुसार, जब्त शराब की कीमत लाखों रुपये में आंकी जा रही है।

हालांकि, कार्रवाई के दौरान कोई भी शराब कारोबारी मौके पर नहीं मिला, जिससे यह अंदेशा जताया जा रहा है कि छापेमारी की भनक पहले ही लग गई थी।

मुजफ्फरपुर में सामुदायिक भवन बना शराब का ठिकाना, छापेमारी में भारी मात्रा में बीयर बरामद

तस्करी का केंद्र बना था भवन

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस सामुदायिक भवन को शराब के भंडारण के साथ-साथ तस्करी के केंद्र के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। यहां से आसपास के इलाकों में अवैध शराब की सप्लाई की जाती थी।

स्थानीय प्रशासन भी हुआ सतर्क

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशिक्षु आईपीएस सह सरैया थाना प्रभारी और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी मौके पर बुलाया गया। पूरी कार्रवाई की जानकारी उन्हें दी गई और आगे की जांच तेज कर दी गई है।

आरोपियों की तलाश जारी

उत्पाद विभाग ने बताया कि फिलहाल शराब कारोबारियों की पहचान की जा रही है। जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

अधिकारियों का कहना है कि इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भी जांच की जा रही है।

सामुदायिक भवन के दुरुपयोग पर सवाल

यह घटना सरकार द्वारा बनाए गए सामुदायिक भवनों के दुरुपयोग पर सवाल खड़े करती है। जिन भवनों का उद्देश्य सामाजिक और विकास कार्यों के लिए था, उनका इस्तेमाल अवैध गतिविधियों के लिए होना प्रशासनिक निगरानी की कमी को दर्शाता है।

निष्कर्ष

मुजफ्फरपुर का यह मामला साफ संकेत देता है कि शराबबंदी के बावजूद अवैध कारोबार के लिए नए-नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। अब जरूरत है सख्त निगरानी और त्वरित कार्रवाई की, ताकि ऐसे मामलों पर पूरी तरह लगाम लगाई जा सके।

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