देहरादून — उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से भारतीय सेना की अदम्य साहस और बलिदान की एक मार्मिक कहानी सामने आई है। महज 25 वर्ष की उम्र में कैप्टन प्रशांत चौरसिया ने अपने साथी जवान की जान बचाने के लिए अपनी जान न्यौछावर कर दी। उनकी इस वीरता ने पूरे देश को भावुक कर दिया है।
ट्रेनिंग के दौरान हुआ हादसा
जानकारी के अनुसार, देहरादून में भैरव बटालियन का नियमित प्लाटून अभ्यास चल रहा था। इसी दौरान नदी किनारे प्रशिक्षण के समय अचानक एक जवान तेज बहाव की चपेट में आ गया। पानी का तेज रेला उसे बहाकर ले जाने लगा और स्थिति बेहद गंभीर हो गई।
बिना सोचे-समझे लगा दी छलांग
जैसे ही कैप्टन प्रशांत चौरसिया ने यह देखा, उन्होंने एक पल भी देर नहीं की। साथी की जान बचाने के लिए वे तुरंत नदी में कूद पड़े। तेज धारा से जूझते हुए उन्होंने जवान तक पहुंचकर उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
हालांकि इस दौरान खुद कैप्टन प्रशांत तेज बहाव में फंस गए। पानी के तेज दबाव के कारण वे पत्थरों से टकरा गए, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं।
दो दिन तक जिंदगी से जंग, फिर शहादत
घटना के तुरंत बाद साथी जवानों ने उन्हें बाहर निकालकर सेना के अस्पताल में भर्ती कराया। वहां दो दिनों तक वे जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष करते रहे, लेकिन 22 मार्च को उन्होंने अंतिम सांस ली।
उनकी शहादत ने पूरे सैन्य बल और आम लोगों को शोक में डुबो दिया है।
परिवार में पसरा मातम
कैप्टन प्रशांत उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के जमानियां कस्बे के रहने वाले थे। जैसे ही उनके शहीद होने की खबर घर पहुंची, पूरे परिवार में मातम छा गया। उनकी मां सुमन देवी यह खबर सुनते ही बेसुध हो गईं।
परिवार के सदस्य तुरंत देहरादून के लिए रवाना हो गए। कुछ ही समय पहले घर में खुशियों का माहौल था, लेकिन अब वही घर गम में डूब गया है।
आज होगा अंतिम संस्कार
सूत्रों के अनुसार, कैप्टन प्रशांत का पार्थिव शरीर गाजीपुर लाया जाएगा, जहां बलुआ घाट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।
गंगा के उसी तट पर, जहां उन्होंने अपने बचपन के कई पल बिताए, आज उन्हें अंतिम विदाई दी जाएगी।
‘No man left behind’ की मिसाल
भारतीय सेना का मूल मंत्र “No man left behind” यानी किसी भी साथी को पीछे नहीं छोड़ना, कैप्टन प्रशांत ने अपने जीवन से साबित कर दिया। उन्होंने न सिर्फ अपने साथी की जान बचाई, बल्कि कर्तव्य और बलिदान की सर्वोच्च मिसाल पेश की।
देश को मिला एक अमर नायक
कैप्टन प्रशांत चौरसिया भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनकी वीरता और बलिदान की कहानी हमेशा जिंदा रहेगी। उनका साहस आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाता रहेगा कि सच्चा सैनिक वही होता है, जो अपने कर्तव्य के लिए सब कुछ न्यौछावर कर दे।


