भागलपुर, 23 मार्च 2026: लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा के पावन अवसर पर भागलपुर में सामाजिक सेवा और सहयोग की एक प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली। शहर के बरारी पुल घाट के समीप मां आनंदी संस्था द्वारा छठ व्रतियों के बीच पूजन सामग्री वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में व्रती, महिलाएं और स्थानीय लोग शामिल हुए।
कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह श्रद्धा और भक्ति से ओत-प्रोत रहा। सबसे पहले संस्था के सदस्यों ने उपस्थित छठ व्रतियों और महिलाओं को सुहाग के प्रतीक सिंदूर लगाकर उनके सुखी, स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की। इस दौरान आपसी स्नेह और सम्मान का भाव साफ झलक रहा था।
गंगा घाट पर गूंजे छठ के पारंपरिक गीत
कार्यक्रम के दौरान गंगा घाट पर छठ से जुड़े पारंपरिक लोकगीतों का आयोजन किया गया। संस्था की महिलाओं और व्रतियों ने मिलकर गीत गाए, जिससे पूरा घाट भक्ति रस में डूब गया। छठ गीतों की गूंज ने वातावरण को और अधिक आध्यात्मिक और भावुक बना दिया।
व्रतियों को उपलब्ध कराई गई आवश्यक सामग्री
इसके बाद संस्था की ओर से छठ व्रतियों को पूजा में उपयोग होने वाली आवश्यक सामग्री वितरित की गई। इसमें सूप, नारियल, केला, कद्दू, घी, गुड़, साड़ी सहित अन्य पूजन सामग्री शामिल थीं।
इस पहल का उद्देश्य उन व्रतियों की मदद करना था, जिन्हें आर्थिक या अन्य कारणों से पूजा की सामग्री जुटाने में कठिनाई होती है।
संस्थापिका का प्रेरणादायक संदेश
इस मौके पर संस्था की संस्थापिका प्रिया सोनी ने छठ पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि डूबते सूर्य को अर्घ्य देने की परंपरा जीवन की गहरी सीख देती है।
उन्होंने कहा कि यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन के हर पहलू—चाहे वह सुख हो या दुख—का सम्मान करना चाहिए। असफलताओं से डरने के बजाय उनसे सीख लेकर आगे बढ़ना ही जीवन का सच्चा मार्ग है।
उन्होंने आगे कहा कि छठ पूजा हमें धैर्य, विनम्रता और संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देती है। यह हमें सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने और हर परिस्थिति में उम्मीद बनाए रखने का संदेश देता है।
सामाजिक सहभागिता का सशक्त उदाहरण
कार्यक्रम में संस्था के सदस्य, महिलाएं और छठ व्रती बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर इस आयोजन को सफल बनाया और समाज में सहयोग एवं सेवा की भावना को मजबूत किया।
निष्कर्ष
बरारी पुल घाट पर आयोजित यह कार्यक्रम केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय संवेदनाओं का भी एक उत्कृष्ट उदाहरण बनकर सामने आया।
मां आनंदी संस्था की यह पहल यह दर्शाती है कि त्योहार केवल पूजा-अर्चना का माध्यम नहीं, बल्कि जरूरतमंदों की मदद करने और समाज को जोड़ने का भी एक अवसर होते हैं।


